भारत-पाक के बीच कैसे बनी सहमति? NSA डोभाल ने निभाई अहम भूमिका, सिर्फ इन मंत्रियों को ही थी जानकारी

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भारत और पाकिस्तान ने नियंत्रण रेखा पर और अन्य क्षेत्रों में संघर्ष विराम पर सभी समझौतों का सख्ती से पालन करने पर सहमति जताई है। इस सिलसिले में दोनों ने संयुक्त बयान भी जारी किया। इस समझौते के पीछे नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर (NSA) अजीत डोभाल की अहम भूमिका रही। इस मामले से वाकिफ सूत्रों ने सहयोगी अखबार हिन्दुस्तान टाइम्स को बताया कि डोभाल और इस्लामाबाद के उनके समकक्ष के बीच बैक-चैनल बातचीत हुई थी, जिसके बाद यह फैसला लिया गया।

एक शख्स ने कहा, एनएसए डोभाल और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान के राष्ट्रीय सुरक्षा डिविजन और रणनीतिक नीति नियोजन के विशेष सहायक, मोइद डब्ल्यू यूसुफ आपस में सीधे संपर्क में थे। उन्होंने बताया कि संयुक्त बयान इसी का हिस्सा है और तीसरे देश में कम से कम एक बार दोनों के बीच आमने-सामने बैठक भी हुई। हालांकि, इसके बारे में सरकार के एक छोटे से ग्रुप को ही जानकारी थी, जिसमें गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस. जयशंकर शामिल हैं। सिर्फ ये लोग ही दोनों के बीच में हो रही बातचीत के बारे में जानते थे।

रक्षा मंत्रालय द्वारा नई दिल्ली में गुरुवार को जारी संयुक्त बयान में कहा गया है कि दोनों सेनाओं (भारत-पाक) के सैन्य संचालन (डीजीएमओ) के निदेशक ने बुधवार आधी रात से नियंत्रण रेखा पर सभी समझौतों, समझ और संघर्ष विराम का कड़ाई से पालन करने पर सहमति जताई है। दोनों शीर्ष कमांडरों ने एक दूसरे के प्रमुख मुद्दों और चिंताओं को संबोधित करने पर भी सहमति व्यक्त की। हालांकि, यह पहली बार नहीं है कि सेना के दो शीर्ष अधिकारी सीमा पर शांति बनाए रखने के लिए सहमत हुए हैं। उन्होंने 2018 में एक समान समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जब उन्होंने पत्र में 2003 की संघर्ष विराम समझ की शर्तों का कड़ाई से पालन करने का वादा किया था।

अधिकारियों ने कहा कि गुरुवार का संयुक्त बयान उन कई कदमों में से पहला हो सकता है जो दोनों देशों को संबंधों को सामान्य बनाने में अगले कुछ महीनों में उठाए जाने वाले हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा योजनाकारों ने कहा कि पिछले महीने के दौरान पांच डेवलपमेंट्स हुए हैं, जो बारीक बदलाव का संकेत दे रहे।

पहला संकेत इस महीने की शुरुआत में आई बैक चैनल बातचीत थी। पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा ने 2019 में बालाकोट हवाई हमले के बाद भारत के खिलाफ अपने कड़े तेवर के विपरीत, 2 फरवरी को इस्लामाबाद की प्रतिबद्धता के बारे में बात की, जिसे उन्होंने पारस्परिक सम्मान और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का आदर्श कहा। उन्होंने कहा कि सभी दिशाओं में शांति का हाथ बढ़ाने का समय है। अगला संकेत पांच फरवरी को इस्लामाबाद से आए बयान थे। इस दिन को पाकिस्तानी प्रतिष्ठान कश्मीर सॉलिडेरिटी डे के रूप में मनाता है। इस बातचीत का हिस्सा नहीं रहने वाले एक काउंटर टेरर अधिकारी ने कहा कि मैंने इन बयानों को असामान्य पाया। इसके साथ ही, अधिकारी ने कहा कि हाल के हफ्तों में जम्मू और कश्मीर में सीमा पर संघर्ष विराम उल्लंघन में कमी आई है। एक शीर्ष सरकारी अधिकारी ने कहा कि जनरल बाजवा का बहुप्रचारित शांति प्रस्ताव, संघर्ष विराम उल्लंघन में गिरावट और पाकिस्तान की टोन्ड-डाउन बयानबाजी यह दिखा रही थी कि शांतिपूर्ण बातचीत हो रही है।

वहीं, चौथा संकेत पिछले हफ्ते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कोविड-19 महामारी पर बुलाई गई सार्क बैठक में पाकिस्तान के कई मुद्दों पर सहमति से मिला था। स्वास्थ्य पर इमरान खान के स्पेशल असिस्टेंट फैसल सुल्तान ने खुद को कोरोना संबंधित मुद्दों तक ही सीमित रखा था, जबकि पिछले साल मार्च में आयोजित की गई सार्क की बैठक में पाकिस्तान ने कश्मीर मुद्दा उठाने की कोशिश की थी। अधिकारी ने बताया कि जो पांचवां संकेत था वह पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान के स्पेशल एयरक्राफ्ट को भारतीय वायु क्षेत्र का इस्तेमाल करने को मंजूरी देना था। पीएम खान के पाकिस्तान वायु सेना के विमान ने कोलंबो में उतरने से पहले भारत के समुद्र तट और लक्षद्वीप द्वीपसमूह ऊपर से उड़ान भरी थी।

उल्लेखनीय है कि सितंबर 2019 में, पाकिस्तान ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को यूरोप ले जाने वाली विशेष उड़ान को  हवाई क्षेत्र के इस्तेमाल की अनुमति नहीं दी थी। इएक अन्य उड़ान जिससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र में भाग लेने के लिए अमेरिका की यात्रा पर जाना था, उसे भी नहीं दी थी। इसके अलावा, पाकिस्तान ने अक्टूबर 2019 में मोदी की सऊदी अरब यात्रा के दौरान अपने हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल करने से मंजूरी देने से मना कर दिया था।

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