बजट सत्र छठा दिन: माले ने उठाया 12 घंटें मजदूरी का मामला, सरकार से कानून वापस लेने की मांग

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विधानमंडल में बजट सत्र के छठे दिन मजदूरों के 12 घंटे काम कराने के मुद्दे से किया गया। माले विधायकों ने सदन परिसर में इस संबंध में विरोध जाहिर करते हुए केंद्र सरकार से इस नए आदेश को वापस लेने की मांग की है। इस दौरान माले विधायकों ने स्कूलों में काम करनेवाले रसोइयों का भी मुद्दा उठाया और उनकी जल्द बहाली करने की मांग की है।

माले विधायकों ने कहा कि स्कूलों में काम करनेवाले लोगों को वेतन नहीं दिया जा रहा है। एनजीओ को बढ़ावा देने के नाम पर उन्हें काम से हटाने की साजिश रची जा रही है। विधायकों ने मांग की है कि सभी रसोइयों और आशा कार्यकर्ता को नियमित मानदेय मिलना चाहिए। आज उन्हें बंधूआ मजदूर से कम पैसा दिया जाता है। इनकी स्थिति सुधारने के लिए सभी को सरकारी कर्मी का दर्जा दिया जाना चाहिए। साथ ही जो भी न्यूनतम मजदूरी मिलना चाहिए। आज सरकार सिर्फ महिलाओं के सशक्तिकरण के नाम पर ढकोसला कर रही है।

माले विधायकों ने कहा कि रसोइयों को सिर्फ पांच दिन का ही वेतन दिया जाता है। जो कि पूरी तरह से गलत है। उसी तरह स्वास्थ्य केंद्रों में काम करनेवाली आशा बहनों के लिए भी कोई मानदेय नहीं दिया जाता है। इस दौरान कोरोना काल में स्कूलों में बने क्वारेंटाइन सेंटरों में काम करनेवाले रसोइयों को वेतन नहीं दिए जाने को लेकर भी नीतीश सरकार को कटघरे में खड़ा किया गया। उनका कहना था सरकार कोरोना को लेकर अपनी पीठ थपथपा रही है, लेकिन जमीनी सच्चाई कुछ और है.

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