पटना यूनिवर्सिटी के पी जी डिपार्टमेंट ऑफ संस्कृत में “भवनों में छत वर्षा जल-संचयन” विषय पर परिचर्चा

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आज जल जीवन हरियाली दिवस के अंतर्गत पी जी डिपार्टमेंट ऑफ संस्कृत, पटना यूनिवर्सिटी, पटना में “भवनों में छत वर्षा जल-संचयन” विषय पर परिचर्चा हुई एवं पेड़-पौधों के सरक्षण एवं संवर्धन के लिए विभागीय शिक्षकों और छात्रों द्वारा श्रमदान भी किया गया।

       इस अवसर पर परिचर्चा के मुख्य वक्ता डॉ हरीश दास ने जल को अत्यंत अमूल्य निधि बताया। पीने योग्य पानी की कमी होती जा रही है। कल कारखानों के कारण नदी का पानी भी प्रदूषित होते जा रहा है। भूजल का स्तर और नीचे चला जा रहा है। अतः पानी के दुरुपयोग को रोकना अत्यन्त आवश्यक है। साथ ही वर्षा के दिनों में गिरने वाले पानी के संचयन पर भी कार्य होना चाहिए। डॉ दास ने अनेक दृष्टांतों एवं तथ्यों के माध्यम से जल -संचयन के महत्व को विस्तार से बताया।

        अध्यक्षता करते हुए अपने वक्तव्य में बिभाग की अध्यक्षा डॉ सुधा मिश्रा ने कहा जल ही जीवन है और जीवन को बचाना ही हमसबका परम कर्तव्य है। वेद में वरुण सूक्त के रूप में इस जल की महिमा का गुणगान किया गया है। दिनों दिन जल अपनी शुद्धता खोते जा रहा है। ऐसी स्थिति में हमें अपने अस्तित्व को बचाने के लिए अभी से ही कमर कस लेना चाहिए, वरना वो दिन दूर नहीं जब हमारी अपनी भावी पीढ़ी हमें अभिशाप समझने लगेगी। अतः जल के अपव्यय से हमे बचना होगा । वर्षा के जल को छत से जमा कर टैंक में रखना होगा। बाद के दिनों में इस जल का उपयोग हम कहना बनाने तथा पीने के लिए कर सकते हैं।

        इस परिचर्चा में धन्यवाद ज्ञापन डिपार्टमेंट की अतिथि शिक्षिका प्रतिभा आर्या ने किया तथा मंच-संचालन डॉ सागर सरकार ने किया।

      परिचर्चा के बाद उपस्थित समस्त लोगों ने पौधों को पानी दिया और खर पतवार साफ करके श्रमदान में अपनी भागीदारी दी।

      कार्यक्रम में विभागीय शिक्षक डॉ सुधा मिश्रा, डॉ हरीश दास, परस्तीभ आर्या सागर सरकार एवं गैर शिक्षण कर्मचारी भीम प्रसाद यादव, राणा कुमार सिंह एव उषा देवी जी तथा पीएचडी के छात्र अंजली, अलका, सीता, ललन इत्यादि  पी जी के छात्र सोमेश, निर्मला, नीतीश विवेक, रजनीश, मेनका, विजया इत्यादि उपस्थित थे।

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