बजट सत्र: जबरन रिटायरमेंट का मामला विधान परिषद में उठा, विपक्ष ने लगाया सरकारी कर्मियों को डराने का आरोप

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बिहार में सरकारी कर्मियों को जबरन रिटायरमेंट दिए जाने का मामला आज परिषद में उठा. दरअसल कांग्रेस के विधान पार्षद प्रेमचंद्र मिश्रा ने इससे जुड़ा सवाल विधान परिषद ने पूछा था. प्रेमचंद मिश्रा ने आरोप लगाया कि आखिर सरकार जबरन रिटायरमेंट के जरिए सरकारी सेवकों के बीच भय का माहौल क्यों बना रही है. अगर किसी सरकारी सेवक को समय से पहले रिटायरमेंट दिया जाता है तो ऐसी स्थिति में उसका परिवार भी प्रभावित होता है.

कांग्रेस कमेटी के सवाल पर जवाब देते हुए प्रभारी मंत्री विजेंद्र यादव ने सदन को बताया कि बिहार में सरकारी सेवकों के लिए सेवा शर्त नियमावली में इस बात का उल्लेख पहले से है कि उनकी कार्य क्षमता के आधार पर समय पूर्व सेवानिवृत्ति दी जा सकती है. सरकार ने किसी नए नियम के तहत ऐसा नहीं किया है बल्कि यह पहले से ही तय है मंत्री विजेंद्र यादव ने इसके साथ-साथ गुजरात सरकार से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के एक मामले का भी जिक्र किया.

अनिवार्य सेवानिवृत्ति के मामले पर सदन में केदारनाथ पांडे और रामचंद्र पूर्वे ने भी अपनी राय रखी. रामचंद्र पूर्वे ने कहा कि सरकार को आखिर अनिवार्य सेवानिवृत्ति को लेकर कोई नया परिपत्र जारी करने की आवश्यकता क्यों पड़ गई. रामचंद्र पूर्वे ने आरोप लगाया कि सरकार के इस फैसले से सरकारी कर्मचारियों का बयान हो रहा है.

हालांकि इस मामले में बीजेपी एमएलसी दिलीप जायसवाल ने सदन में अलग राय रखी. दिलीप जायसवाल ने कहा कि सरकारी कर्मचारी अगर सरकार से डरे हुए हैं तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है.

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