पटना: फणीश्वर नाथ रेणु के फ्लैट से चोर उड़ा ले गए ‘कागज की नाव’, नहीं मिला कोई सुराग

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प्रसिद्ध साहित्यकार फणीश्वर नाथ रेणु के पटना के राजेन्द्र नगर गोलंबर स्थित सोसाइटी के ब्लाक नंबर 2 के फ्लैट 30बी से चोरी गई बहुमूल्य कृतियों का अब तक पता नहीं चल सका है। फणीश्वर नाथ रेणु के घर से लाखों का सामान के साथ उनकी साहित्यिक विरासत व पांडुलिपियां चुरा ले गए थे। 

शातिर चोर रेणुजी के हस्ताक्षर वाली परती परिकथा, मैला आंचल, पलटू बाबू रोड्र, ठुमरी, अधूरा हस्तलिखित कागज की नाव, दर्जनों दुर्लभ चिट्ठियां, अन्य राइटर्स की दर्जनों पुस्तकें, उनके पूर्व विधायक बेटे पद्मपराग राय की महत्वपूर्ण फाइलें, फारबिसगंज जिला अररिया व विस से जुड़ी कई अहम फाइलें, अंगवस्त्र तथा कीमती बर्तन चुरा कर भाग गये, जबकि फ्लैट में रखे फ्रिज, टीवी समेत अन्य महंगे सामानों को छुआ तक नहीं।

रेणु जी की साहित्यिक विरासतों को उनकी स्मृति में बने संग्रहालय में रखने की तैयारी थी, लेकिन कोरोना काल की वजह से इन सामानों को स्थानांतरित नहीं किया जा सका था। पुलिस का कहना है कि विशेष टीम ने फणीश्वर नाथ रेणु के किताबों को बरामद करने के लिए अलग-अलग जगहों पर छापेमारी की थी। लेकिन सफलता हाथ नहीं लग सकी। स्थानीय चोरों पर भी पुलिस को शक था। कदमकुआं थानेदार विमलेंदु कुमार ने बताया कि अब भी पुलिस इस चोर गैंग को पकड़ने के लिये प्रयासरत है।

अधूरा रह गया था उपन्यास
उनके बेटे ने बताया कि रेणुजी ने 1972 में फारबिसगंज विधानसभा से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव भी लड़ा था। इस दौरान उन्होंने यह संकल्प लिया था कि अगर वे विजयी होते हैं तो अपने अनुभवों के आधार पर एक किताब लिखेंगे, लेकिन अगर वे हार जाते हैं तो फिर वे एक उपन्यास की रचना करेंगे। हालांकि, वे चुनाव हार गए थे और इसके बाद उन्होंने एक उपन्यास लिखना शुरू किया था। स्वास्थ्य कारणों से वे इसे पूरा नहीं कर सके। इस उपन्यास का नाम कागज की नाव था। चोरों ने इसे भी अपना निशाना बनाया और उनकी हस्तलिखित इस रचना को चुरा ले गए थे।

सीसीटीवी कैमरों में भी नहीं मिला था सुराग
पुलिस ने चोरी की इस घटना के बाद कई सीसीटीवी कैमरों की पड़ताल की थी। लेकिन चोरों का सुराग नहीं मिला। इसके अलावा पुलिस ने कई संदिग्धों से भी पूछताछ की थी। फणीश्वर नाथ रेणु के यहां चोरी की घटना के बाद कई तरह के सवाल उठने लगे। सवाल यह भी उठ रहे थे कि कहीं साजिशन तो रेणु के घर चोरी की घटना को अंजाम नहीं दिया गया। जान-बूझकर भी इस घटना को अंजाम दिया जा सकता है ताकि कीमती साहित्यों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचा जा सके। ऐसी किताबों को भी चोर अपने साथ ले गए थे जो खुद फणीश्वर नाथ रेणु ने अपने हाथ से लिखी थी।

पिछले साल जनवरी में पैतृक घर हिंगना औराही में भी हुई थी चोरी
रेणुजी के साहित्यिक धरोहरों पर चोरों की नजर पहले से रही है। पिछले साल जनवरी में उनके पैतृक गांव हिंगना औराही में रेणु स्मृति भवन में भी चोरी की घटना हुई थी। पिता फणीश्वरनाथ रेणु की प्रसिद्ध रचना मैला आंचल, परती परिकथा, ठुमरी, पलटू बाबू रोड के प्रथम संस्करण और कुछ रचनाओं की मूल प्रतियों के चोरी होने से परिजन अबतक बेहद दुखी और हतप्रभ हैं। चोरी की घटना पर रेणुजी के छोटे पुत्र दक्षिणेश्वर प्रसाद राय कहा था कि यह घटना रेणुजी की आत्मा की चोरी है। उनके अंगवस्त्र और चिठ्ठियां चोरी गयी हैं। यह बहुत ही दुखद है।

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