मुंगेर पुलिस गोलीकांड की सीबीआई जाँच को लेकर हाईकोर्ट में रोज सुनवाई, लिपि सिंह की बढ़ सकती है मुसीबत

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मुंगेर में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान हुई पुलिस फायरिंग से एक बेकसूर युवक की मौत की सीबीआई जांच कराने के लिए दायर याचिका की सुनवाई पटना हाईकोर्ट 10 मार्च से रोजाना (डे टू डे ) करेगा। न्यायमूर्ति राजीव रंजन प्रसाद की एकलपीठ ने अमरनाथ पोद्दार की आपराधिक रिट याचिका को सुनते हुए यह निर्देश दिया है। इसी मामले में याचिकाकर्ता की तरफ से पहले सुप्रीम कोर्ट में न्याय की गुहार लगाते हुए फायरिंग कांड की जाँच सीबीआई या अन्य स्वतंत्र एजेंसी से कराने की मांग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने बीते 25 जनवरी को याचिकाकर्ता की अर्जी को वापस करते हुए अपने आदेश मे पटना हाईकोर्ट से अनुरोध किया था कि इस मामले की जल्दी सुनवाई कर दो महीने में कोई फैसला ले।

सुप्रीम कोर्ट के उस न्यायादेश के आलोक में एकलपीठ ने राज्य सरकार को दो हफ्ते में जवाब दायर करने का निर्देश दिया था। राज्य सरकार की ओर से सरकारी अधिवक्ता नदीम सिराज ने कोर्ट को बताया कि जवाबी हलफनामा तय समय सीमा के अंदर दायर हो चुका है और मामले को अंतिम बहस पर रखा जा सकता है। हाईकोर्ट ने कहा कि सभी पक्षकार अपने अर्ज़ीयों को 9 मार्च तक एक दूसरे को दे दें उंसके बाद 10 मार्च से इस मामले पर रोजाना सुनवाई के लिए सभी पक्षकार तैयार रहें।

पिछले साल दुर्गा पूजा के अवसर पर मुंगेर के दीन दयाल चौक पर मूर्ति विसर्जन के लिए जा रहे जुलूस पर पुलिस फायरिंग के दौरान याचिकाकर्ता के 18 वर्षीय बेटे की मौत हो गयी थी। इस कांड के बाद हुए हंगामे और लोंगों के आक्रोश के कारण मुंगेर की तत्कालीन एसपी लिपि सिंह का तबादला हो गया था। सरकार ने एक जाँच समिति बैठाई जिसने पुलिस को क्लीन चिट दिया। लेकिन चुनाव ड्यूटी पर तैनात केंद्रीय फोर्स के चश्मदीद जवानों के बयान के मुताबिक पुलिस की गोली से ही बेकसूर युवक की मौत हुई थी। याचिकाकर्ता ने राज्य सरकार की पुलिस से भरोसा उठाते हुए उक्त कांड की सीबीआई जांच की मांग हाईकोर्ट से किया है ।

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