भारत ने हिंदी भाषा में टेक्स्ट टू स्पीच विथ ए.आई टेक्नोलॉजी की दुनिया को दी सौगात

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विज्ञान क्षेत्र में भारत ने पेश की नयी हिंदी टेक्स्ट टू स्पीच टेक्नोलॉजी ‘स्पीचमेक्स’ जिसे भारत में काफी पसंद किया जा रहा  है। भारत ने अपनी उच्चत्तम योग्यता का परचम हर क्षेत्र में फैलाया है। जहाँ बात हो साइंस एंड टेक्नोलॉजी की, तो भारत ने समय के साथ विज्ञान की परंपरा को भी बखूभी निखारा है। इसी परंपरा को निभाते हुए डिजिटल भारत का हिंदी टेक्स्ट टू स्पीच प्लेटफॉर्म ‘स्पीचमेक्स’ अपनी काबिलियत सिद्ध कर रहा है। इसके चलते ही, स्पीचमेक्स के कुछ ही समय में 5,000 से ज्यादा एक्टिव यूज़र्स हो गए हैं।

स्पीचमेक्स टेक्स्ट टू स्पीच एक आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस बेस्ड टेक्नोलॉजी है जिससे यूजर तुरंत ही अपने लिखे हुए शब्दों को आसानी से सुन सकता है। स्पीचमेक्स हिंदी लिपि को कुछ सेकेंड के अंदर ही मानव-जैसी आवाज़ में परिवर्तित कर देता  है। इसका उपयोग विभिन्न कथा- शैलियों में वास्तविक पुरुष/महिला की आवाज उत्पन्न करने के लिए किया जाता है। इसका प्रयोग कस्टमर सर्विस, सोशल मीडिया प्रकरण, फिल्म कथन, गेम वॉइस, पॉडकास्ट, ऑडियोबुक, वॉयस क्लोनिंग और डिजिटल प्लेटफॉर्म में लेख पढ़ने के लिए होता है।

स्पीचमेक्स के तीनों संस्थापक – चक्रपाणि मिश्रा, अनंत त्रिपाठी और दिवाकर मिश्रा  स्पीच ए.आई श्रेणी में 2017 से एक साथ काम कर रहे हैं। चक्रपाणि मिश्रा ने बी.टेक, एम. टेक (दोहरी डिग्री), IIT बॉम्बे  से अपनी उच्च शिक्षा प्राप्त की है। वे 17 साल से हाई-एंड इंजीनियरिंग एनालिटिक्स, न्यूरल नेटवर्क आधारित टेक्नोलॉजीज में काम कर रहे हैं।

वहीं, स्पीचमेक्स के सह-संस्थापक अनंत त्रिपाठी भी एक IIT छात्र रहे हैं। इन्होनें अपनी उच्च शिक्षा बी.टेक, IIT खड़गपुर से और एम.बी.ए की डिग्री आई.एस.बी, हैदराबाद से प्राप्त की।  अनंत त्रिपाठी 10 साल से ज़्यादा समय से कॉर्पोरेट इंडस्ट्री में अपना नाम कमा रहे हैं। बात करें दिवाकर चोपड़ा की, तो इन्होनें अमेरिका से बी.एस. औद्योगिक इंजीनियरिंग में शिक्षा प्राप्त की है।

संस्थापकों की मानें तो हिंदी कंटेंट क्रिएटर्स के लिए स्पीचमेक्स काफी हद तक उपयोगी साबित होगा। स्पीचमेक्स कंपनी का लक्ष्य आगे आने वाले समय में ‘नेक्स्ट बिलियन’ लोगों को टारगेट करना रहेगा ।

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