महिला दिवस: पटना विश्वविध्यालय के स्नातकोत्तर संस्कृत, बंगाली, मैथिली विभाग के संयुक्त तत्वाधान “नारी तुम श्रद्धा हो” विषय पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन

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आज स्नातकोत्तर संस्कृत, बंगाली, मैथिली विभाग एवं शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास बिहार इकाई के संयुक्त तत्वाधान में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर “नारी तुम श्रद्धा हो” विषय पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर नारी विषयक काव्यपाठ, गीत-गायन एवं विशिष्ट जनों का वक्तव्यों का प्रस्तुतिकरण हुआ।

               मुख्य-वक्ता के रूप में पी जी डिपार्टमेंट ऑफ इंग्लिश के अध्यक्ष प्रो (डॉ) एन के पांडेय ने महिला का शत्रु महिला को ही बताया। घर मे तो महिला की सबसे बडी प्रतिद्वन्दी महिला ही होती है। अतः सर्वप्रथम महिला सशक्तिकरण का प्रारंभ घर से ही होना चाहिए।

              विशिष्ठ वक्ता मुंगेर विश्विद्यालय के सहायक आचार्य डॉ विश्वजीत विद्यालंकार ने अपने क्रांतिकारी उद्बोधन में आधी आबादी को स्वयं जागने और अपने अधिकारों के प्रति सतर्क रहने की प्रेरणा दी। जर्मन भाषा की शिक्षिका डॉ अर्चना रानी ने तो अपने भावनात्मक वक्तव्य से सबके आंखों में आँशु उत्पन्न कर दिया। अंत मे उन्होंने विदा लेते हुए कहा कि आज उन्हें अपनी माँ के साथ लंच करना है और पूरा समय उनके साथ ही बिताना है।

            मैथिली विभाग की अध्यक्षा प्रो (डॉ) अरुणा चौधरी ने खुद को बेटी, माँ, दादी, बहन, पत्नी और एक शिक्षिका के रूप में प्रस्तुत करते हुए कहा उसे सदैव मलाल रहता है कि उसकी कोई बेटी नही है। अगर बेटे चिराग है तो बेटियां घर की रोशनी होती हैं। बिन बेटी के इस माँ से पूछिए कि उसका प्रतिदिन के जीवन मे क्या महत्व है।

       अध्यक्षीय उद्बोधन में संस्कृत-विभाग की अध्यक्षा डॉ सुधा मिश्रा ने महिलाओं को प्रत्येक क्षेत्र में प्रवेश करने का संदेश दिया और कहा अगर नारी खुद का परिष्कार खुद नही करेगी तो आने वाली पीढ़ी भी वैसी ही होगी जैसी अब है। अतः हम महिलाएं जो अपेक्षाएं समाज से करते हैं हमें वैसे ही आचरण करना होगा।

     इन वक्तव्यों से पूर्व नारी-विषयक काव्य पाठ हुआ जिसमें मुख्य भागीदारी अंग्रेजी विभाग, पटना कॉलेज के अतिथि शिक्षक डॉ अजय कुमार, मैथिली के रजनीश प्रियदर्शी, गणित विभाग के सदानंद भूषण, बंगाली की मुनमुन की रही। महिला-विषयक गीत-गायन में संस्कृत-विभाग की मेनका, सौम्य शाम्भवी, विभा तथा पूजा कुमारी ने प्रमुख रूप से भागीदारी की। इस अवसर पर स्नातकोत्तर संस्कृत विभाग के डॉ हरीश दास के काव्यपाठ की पंक्तियों “ अपमान मत करना नारियों का,  इनके बल पर जग चलता है। पुरुष जन्म लेकर तो इन्ही की गोद मे पलट है।।“ पर श्रोतावृन्द झूम उठे और तालियों की गड़गड़ाहट से हॉल गूंज उठा। डॉ दास को ये पंक्तियाँ लोगों की मांग पर 2 बार और सुनना पड़ा।

      कार्यक्रम की शुरुवात दीप प्रज्वलन एवं माल्यार्पण से हुआ। स्वागतं भाषण बंगाली विभाग की पूर्व अध्यक्षा प्रो (डॉ) ममता दास शर्मा एवं धन्यवाद ज्ञापन पटना कॉलेज के संस्कृत विभाग के सहायक आचार्य दीपेन्द्र किशोर आर्य ने किया। मंच का बखूबी संचालन डॉ हरीश दास और शोध-छात्रा अंजली कुमारी ने किया।

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