रेटिनोब्लास्टोमा बचपन में ही दिख जाते है लक्षण- *डॉ . प्रदीप शर्मा

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आंखें हमारे मन का आइना होती हैं। शरीर की स्वस्थता व अस्वस्थता तो कोई भी हमारी आखों में झांककर ही देख सकता है। आंखें कुछ न कहते हुए भी इशारों में बहुत कुछ कह जाती हैं। लेकिन, सोचिए उस अवस्था या उन लोगों के बारे में, जिनकी आंखें नहीं हैं। वे लोग जो कि नेत्रहीन हैं। यह भी सच है कि बहुत से दुर्भाग्यवश बच्चे आंख के साथ पैदा तो होते हैं लेकिन रेटिनोब्लास्टोमा जैसी बीमारियां उनकी दृष्टि पर धावा बोल देती हैं। अगर समय रहते निदान या उपचार न हो तो बच्चों को अपनी जान से भी हाथ धोना पड़ सकता है। दरअसल, रेटिनोब्लास्टोमा आंखों का एक ऐसा कैंसर होता है जो कि छोटे बच्चों की आंखों पर प्रहार कर सकता है। ये एक आंख या दोनों आंखों में एक साथ भी हो सकता है। इसका ट्यूमर रेटिना में उभरता है जो कि आंखों को दृष्टि प्रदान करती है। जिस केस में एक आंख में ही ट्यूमर उभरता है, उसे यूनी-लेटरल रेटिनोब्लास्टोमा कहा जाता है। जिन केसों में दोनों आंखों में ट्यूमर उभरता है, उस स्थिति को बाईलेटरल रेटिनोब्लास्टोमा कहा जाता है।
रेटिनोब्लास्टोमा के लक्षण
भेंगापन, आंखों की पुतली का लाल होना, सामान्य से बड़ी पुतली, रंग-बिरंगी पुतली, निम्न दृष्टि या दृष्टि का कम होना, आंखों में सूजन होना आदि। यदि उपरोक्त दिए गए किन्हीं भी लक्षणों से आप का बच्चा पीडित हो तो यह आवश्यक नहीं है कि आप के बच्चे को रेटिनोब्लास्टामा ही हो। किंतु ऐसी अवस्था आने से पहले ही अपने बच्चे की आंखों की जांच अवश्य ही कराएं।
निदान
अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन, एम आर आई। बायोप्सी की आवष्यकता हर केस में नहीं होती है। रेटिनोब्लास्टोमा का एक मुख्य कारण आनुवांशिक होता है। यह अक्सर पैदा हुए बच्चों से लेकर 4 वर्ष तक के बच्चों को हो सकता है। लक्षणों की बात करें तो बच्चों की आंखों के मध्य में सफेद रोशनी जैसी दिखने लगती है। इसके अलावा भेंगापन के कई केंसों में भी कैंसर हो सकता है। प्राय:आंखों के कैंसर का निदान एक कुशल नेत्र रोग विषेशज्ञ के द्वारा ही किया जा सकता है। लेकिन जितनी जल्दी इसका निदान हो सके, उतना ही आसानी से उपचार हो सकता है। इसकी रोकथाम इसके प्रति अधिक से अधिक जागरुकता से ही की जा सकती है। पहले कुछ समय तक रेटिनोब्लास्टोमा को जानलेवा समझा जाता था लेकिन आज चिकित्सा जगत की नई तकनीकों के आ जाने से इसका उपचार संभव हो गया है। नई तकनीक व उचित प्रबंधन से आंखों की बरौनियों, पलकों, आंखों के भीतरी भाग आदि में होने वाले ट्यूमरों को भी कम किया जा सकता है। लेकिन, आम लोगों में इसके प्रति जागरुकता होना आवश्यक है, तभी यह संभव हो पाएगा। उपचारों की बात करें तो रेटिनोब्लास्टोमा के लिए बहुत से उपचार उपलब्ध हैं जैसे कीमोथैरेपी, रेडियोथैरेपी, लेजर थैरेपी, क्रायोथैरेपी, थर्मोथैरेपी, सर्जरी। केस की जटिलता को देखते हुए ही चिकित्सक के द्वारा उपयुक्त उपचार सुझाया जाता है। लेकिन उपचार के साथ बच्चों को विषेश तौर पर समझाना व उपचार के लिए तैयार करना बहुत आवश्यक होता है जो कि मां बाप के लिए मुश्किल भी होता है.

*डॉ . प्रदीप शर्मानेत्र रोग विशेषज्ञसेंटर  फॉर  साइट , नई दिल्ली

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