खराब गुरु(Jupiter) देते हैं रोग, मान सम्मान में भी लाते हैं कमी, शुभ बनाने के लिए जानें उपाय

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गुरु यानि बृहस्पति ग्रह को नव ग्रहों में एक महत्वपूर्ण ग्रह माना गया है. बृहस्पति को देवताओं का गुरु भी माना गया है. गुरु को ज्योतिष शास्त्र में ज्ञान, उच्च पद और मान सम्मान का कारक भी माना गया है. गुरु ग्रह विशेष परिस्थितियों में अशुभ फल भी प्रदान करते हैं. गुरु जब अशुभ होते हैं तो इसका पता आसानी से लगाया जा सकता है. गुरु जब अशुभ होते हैं तो पेट संबंधी रोग देते हैं. इसके साथ ही मान सम्मान में कमी लाते हैं और शिक्षा संबंधी मामलों में दिक्कत पैदा करते हैं.

गुरु की वर्तमान स्थिति
वर्तमान गोचर की दृष्टि से गुरु इस समय मकर राशि में शनि के साथ युति बनाए हुए हैं. गुरु यहां पर नीच राज योग भंग का निर्माण भी कर रहे हैं. मकर राशि पर शनि की साढ़ेसाती चल रही है. शनि के साथ गुरु का संबंध सम है.

गुरु जब अशुभ होते हैं तो देते हैं ये परेशानियां
गुरु जब अशुभ होते हैं तो व्यक्ति को कई तरह की दिक्कतों का समाना करना पड़ता है. गुरु खराब होने पर व्यापार में हानि का कारक बनते हैं. व्यक्ति के आय के स्त्रोतों में कमी आने लगती है. प्रशासनिक स्तर से दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. इसके साथ ही जॉब, प्रमोशन आदि में भी देरी कराते हैं. गुरु का संबंध शिक्षा से भी है. इसलिए जो शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं या फिर शिक्षा संबंधी किसी क्षेत्र से जुड़े होते हैं उन्हें भी रुकावटों का सामना पड़ता है.

गुरु का उपाय
गुरु जब अशुभ फल देने लगें तो गुरु को शुभ बनाने के उपाय करने चाहिए. इसके लिए नाभि पर केसर का तिलक लगाने से गुरु प्रसन्न होते हैं. ऐसा करने से गुरु की अशुभता में कमी आती है. इसके साथ प्रत्येक बृहस्पतिवार को भगवान विष्णु की पूजा करने से भी गुरु प्रसन्न होते हैं. पीले वस्त्रों का दान करने से भी गुरु की अशुभता दूर होती है.

गुरु का मंत्र

ॐ गुं गुरवे नम:।

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