बजट सत्र: ट्रकों में छिपाकर लायी जा रही शराब की खेप, नीतीश सरकार नहीं खरीदेगी ट्रक स्कैनर

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बिहार में शराबबंदी के बावजूद हर दिन बड़ी तादाद में शराब की खेप बरामद हो रही है. शराब की खेप दूसरे राज्यों से बिहार में लाई जा रही है और यहां उसका अवैध कारोबार हो रहा है. खुद सरकार मानती है कि सड़क मार्ग से ट्रकों के जरिए छिपाकर शराब की एंट्री बिहार में कराई जाती है. शराब की एंट्री रोकने के लिए सीमावर्ती राज्यों से लगे बिहार के सभी बॉर्डर पर गाड़ियों की चेकिंग भी होती है लेकिन उसके बावजूद आखिर शराब कैसे पहुंच रही और इसका क्या निदान है. इस पर सरकार की नीति स्पष्ट में ही नजर आती.

बिहार विधानसभा में आज शराब की बिहार में अवैध एंट्री पर नकेल कसने के लिए ट्रक स्कैनर खरीदने का मामला उठा. विधानसभा के प्रश्नोत्तर काल में बीजेपी विधायक संजय सरावगी ने इस मामले को उठाया. संजय सरावगी ने सरकार से जानना चाहा कि शराबबंदी लागू होने के बाद बिहार सरकार ने स्कैनर की खरीद करने की योजना बनाई थी, उस समय मद्य निषेध विभाग के सचिव केके पाठक ने इसके लिए कार्ययोजना भी तैयार की थी, लेकिन बाद में इस योजना पर काम नहीं हुआ, क्या सरकार ट्रक स्कैनर खरीद कर शराब की एंट्री नहीं रोकना चाहती?

बीजेपी विधायक के इस सवाल पर सरकार की तरफ से जवाब देते हुए मद्य निषेध मंत्री सुनील कुमार ने कहा कि फिलहाल हम ट्रक स्कैनर नहीं खरीदने जा रहे हैं. सरकार के पास ऐसी कोई योजना नहीं है जिसमें ट्रक स्कैनर की खरीद की जाए. मंत्री सुनील कुमार ने कहा कि इंटेलिजेंस इनपुट के आधार पर ही शराब की बरामदगी की जाती है. इसके लिए स्कैनर की जरूरत नहीं है.

सरकार की तरफ से यह जवाब आने के बाद बीजेपी विधायक ने यह भी कहा है कि बाहर से आने वाले फलों के ट्रक को जिस तरह चेक किया जाता है उससे वे कारोबारियों को नुकसान हो रहा है. हो सकता है कि इन ट्रकों में शराब भी छिपाकर लाई जा रही हो. ऐसे में अगर ट्रक स्कैनर लगाया जाए तो सरकार की शराबबंदी नीति सफल हो सकती है.

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