उपेंद्र कुशवाहा को नीतीश सरकार में कौन सा मंत्रालय मिलेगा? JDU ने बनाया MLC

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हाल ही में जदयू (JDU) में शामिल हुए उपेंद्र कुशवाहा (Upendra Kushwaha) को नीतीश सरकार के मंत्रिमंडल (Nitish kumar Cabinet) में जगह मिलना तय हो गया है. सवाल ये हैं कि उन्हें कौन सा मंत्रालय दिया जाएगा? मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish kumar) की पार्टी जदयू कुशवाहा को अपने कोटे से एमएलसी (MLC) बनाने जा रही है. इस खबर के बाद से ही कुशवाहा की नीतीश कैबिनेट में इंट्री को लेकर अटकलें चल रहीं हैं. माना जा रहा था कि जदयू उन्‍हें राज्‍यसभा भेजेगा, लेकिन इस कयास पर फिलहाल विराम लग गया है. पार्टी ने उन्‍हें बिहार में एमएलसी बनाने का फैसला किया है.दरअसल, बिहार विधान परिषद (BIhar MLC) में मनोनयन कोटे की 12 सीटों को भरा जाना था. मंगलवार शाम ये तय हुआ की छह छह सीटें भाजपा और जदयू के हिस्से आएगी. मंगलवार शाम ये तय हुआ कि छह-छह सीटें भाजपा और जदयू को मिलेगी. मुख्यमंत्री कार्यालय से मनोनीत होने वाले 12 सदस्यों की सूची भी राजभवन को भेज दी गयी. औऱ बुधवार को राज्यपाल भवन से अधिसूचना जारी कर दी गयी.

इस सूची में उपेंद्र कुशवाहा के साथ ही दो मंत्रियों अशोक चौधरी (जदयू) और जनक राम (भाजपा) का है जो अब तक किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं. उम्मीद है कि शुक्रवार को विधान परिषद के सदस्य के रूप में उन्हें शपथ दिलायी जायेगी.

गौरतलब है कि पिछले साल मई से विधान परिषद की मनोनयन कोटे की सभी 12 सीटें खाली हैं. बीच में कई बार इन सीटों को भरे जाने की अटकलें लगती रहीं. सूत्रों के मुताबिक भाजपा की ओर से सूची आ जाने के बाद कैबिनेट की बैठक में मंगलवार को सबकुछ तय हो गया.

HAM और VIP को झटका
मनोनयन वाले 12 नामों में एनडीए के घटक दल जीतन राम मांजी की पार्टी हम और मुकेश सहनी की पार्टी वीआइपी से किसी का नाम नहीं है. ये दोनों दलों के लिए गहरे झटके से कम नहीं है क्योंकि वीआइपी अध्यक्ष मुकेश सहनी अपने दल के नेताओं के लिए मनोनयन कोटे की एक सीट चाहते हैं. हम के अध्यक्ष व पूर्व सीएम जीतन राम मांझी ने मुख्यमंत्री से एक सीट की मांग की है.

अशोक चौधरी और जनक राम किसी भी सदन के नहीं हैं सदस्य
नीतीश सरकार में दो मंत्री फिलहाल किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं. इनमें भवन निर्माण विभाग के मंत्री अशोक चौधरी और भाजपा कोटे से खनन मंत्री जनक राम को हर हाल में छह महीने के भीतर किसी-न-किसी सदन का सदस्य होना संवैधानिक मजबूरी है. मनोनयन कोटे की सूची में इन दोनों मंत्रियों के नाम भी शामिल हैं.

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