MLC मनोनय में हिस्सेदारी नहीं मिलने से मांझी और सहनी नाराज, लेकिन NDA छोड़कर नहीं जाएंगे

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राज्यपाल कोटे से 12 एमएलसी मनोनयन के बाद एनडीए में शामिल जीतन राम मांझी और मुकेश सहनी में अपनी हिस्सेदारी नहीं मिलने पर विरोध जताया है. जीतन राम मांझी की पार्टी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा ने इस मसले पर पहले ही अपना विरोध दर्ज कराया था और अब मुकेश सहनी की पार्टी भी इस फैसले से नाखुश है. जीतन राम मांझी और मुकेश सहनी को इस बात का मलाल है कि एमएलसी मनोनयन पर फैसला लेने से पहले उनकी राय तक नहीं पूछी गई. हालांकि इस नाराजगी के बावजूद दोनों एनडीए में ही बने रहेंगे.

पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने कहा है कि वह नीतीश कुमार के साथ विधानसभा चुनाव के पहले बिना शर्त आए थे. लेकिन उन्हें उम्मीद थी कि एमएलसी मनोनयन कोटे में कम से कम उन्हें एक सीट मिलेगी. बावजूद इसके एनडीए में उन्हें तरजीह नहीं दी गई. जीतन राम मांझी ने कहा कि उन्हें इस बात की तकलीफ है कि एमएलसी मनोनयन से पहले विचार विमर्श तक नहीं किया गया.

जीतन राम मांझी से यह पूछे जाने पर कि क्या आगे पार्टी कोई बड़ा फैसला करने वाली है. इसपर मांझी ने कहा कि यह बाद में देखा जाएगा. हालांकि उनकी पार्टी के प्रवक्ता दानिश रिजवान ने एमएलसी की लिस्ट जारी होने के साथ ही बयान जारी करते हुए कहा था कि अब जीतन राम मांझी इस मामले पर कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं. हालांकि मांझी एनडीए छोड़ने का साहस दिखाते नजर नहीं आ रहे हैं. मामला उनके बेटे संतोष सुमन के मंत्री पद पर बने रहने का है.

उधर विकासशील इंसान पार्टी के नेता मुकेश सहनी भी एनडीए गठबंधन छोड़ने का साहस नहीं जुटा सकते उनकी पार्टी के प्रवक्ता राजीव मिश्रा ने बयान जारी करते हुए कहा है कि वह एमएलसी मनोनयन के फैसले का विरोध करते हैं. उनकी पार्टी की स्पष्ट मांग है कि नोनिया समाज के किसी व्यक्ति को विधान परिषद भेजा जाना चाहिए वीआईपी प्रवक्ता ने कहा कि अगर उनकी पार्टी से ना तो किसी दूसरी पार्टी से ही सही लेकिन नोनिया समाज की नुमाइंदगी होनी चाहिए थी.

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