पुरुलिया रैली में PM मोदी का वार,बोले-TMC मतलब ट्रांसफर माय कमीशन, हम कहते हैं डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर

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पश्चिम बंगाल के सियासी घमासान में गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मोर्चा संभाला। उन्होंने पुरुलिया की रैली में अपने भाषण की शुरुआत बांग्ला भाषा में की। उन्होंने कहा कि दीदी को बंगाल के लोगों के हितों से ज्यादा खेल की चिंता पड़ी है, लेकिन दीदी यह भूल रही हैं कि इस बार बंगाल की जनता खुद उनके विरोध में खड़ी है। दस साल की दूरनीति का सजा लोग उन्हें देकर रहेंगे।

उन्होंने कहा कि दस साल के तुष्टिकरण के बाद, लोगों पर लाठियां-डंडे चलवाने के बाद अब ममता दीदी अचानक बदली-बदली सी दिख रही है। यह हृदय परिवर्तन नहीं, हार का डर है। दीदी यह सब करते रहिए, हर तरह से खेलते रहिए, लेकिन यह मत भूलिए कि बंगाल की जनता की याद बहुत तेज होती है। उसे याद है कि आपने गाड़ी से उतरकर कितने लोगों को डांटा-फटकारा था।

मोदी के भाषण की अहम बातें
भगवान राम के नाम से की शुरूआत

यह धरती भगवान राम और माता सीता के वनवास की भी साक्षी रही है। यहां अजुध्या पर्वत है, सीता कुंड है। अजुध्या नाम से ग्राम पंचायत भी है। कहते हैं कि जब माता सीता को प्यास लगी थी, तो रामजी ने जमीन पर बाण मारकर पानी की धारा निकाल दी थी। सोचिए जब पुरुलिया में जमीन में पानी का स्तर क्या रहा होगा। यह विडंबना है कि आज मेरे किसान आदिवासी भाइयों को इतना पानी भी नहीं मिलता कि वे सही से खेती कर सकें। यहां की महिलाओं को पीने के पानी के इंतजाम के लिए बहुत दूर तक जाना पड़ता है।

TMC सरकार अपने ही खेल में लगी रही
पुरुलिया में पानी का संघर्ष बड़ी समस्या है। यहां पहले वामपंथियों और फिर तृणमूल की सरकार ने उद्योगों को नहीं पनपने दिया। पानी के जो इंतजाम किए जाने थे, वह नहीं किए गए। यहां लोगों की समस्याओं पर ध्यान देने की बजाय TMC सरकार अपने ही खेल में लगी रही। इन लोगों ने पुरुलिया को जलसंकट, पलायन और भेदभाव भरा शासन दिया है। इन्होंने पुरुलिया की पहचान बनाई है, देश के सबसे पिछड़े इलाके के रूप में। यहां गैस पाइप लाइन का काम बीते आठ साल से अधूरा पड़ा है। यहां बांध का काम भी अधूरा पड़ा है। इसका जवाब कौन देगा। दीदी यहां के लोग आपसे जवाब मांग रहे हैं।

TMC मतलब ट्रांसफर माई कमीशन
हमारी नीति डीबीटी है। डीबीटी यानी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर। वहीं बंगाल में TMC नीति है। TMC मतलब ट्रांसफर माई कमीशन। हम डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर करते हैं। वे ट्रांसफर माई कमीशन में डूबे हैं। दो मई दीदी जॉछे। इस बार भॉय नहीं, सिर्फ जॉय। इस बार जोर से छाप, कमल छाप।

डबल इंजन की सरकार बंगाल का विकास करेगी
मैं आज पुरुलिया के लोगों को पूरे जगल महल क्षेत्र के लोगों को विश्वास दिलाने आया हूं कि बंगाल में भाजपा की सरकार बनने के बाद आपकी इन दिक्कतों को प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाएगा। बंगाल में जब डबल इंजन की सरकार बनेगी, तब यहां विकास भी होगा ओर आपका जीवन भी आसान बनेगा। यहां पुरुलिया में तो टूरिज्म और हैंडिक्राफ्ट की इतनी संभावनाएं हैं, इन्हें बढ़ावा दिया जाएगा। यहां जैसा जल संकट देश के दूसरे हिस्सों में भी रहा है, लेकिन वहां भाजपा की सरकारें रहीं तो हजारों किलोमीटर की पाइप लाइन बिछवाईं। पानी की समस्या दूर हुई तो वहां के किसान अलग-अलग फसलों को बोने लगे।

रोजगार के अवसर बनाएंगे
पुरुलिया समेत इस पूरे क्षेत्र में विकास की असंख्य संभावनाए हैं। पश्चिम बंगाल के हर हिस्से को रेल सेवा से जोड़ना हमारी प्राथमिकता है। इस समय पश्चिम बंगाल के अलग-अलग हिस्सों में 50 हजार करोड़ के विकास कामों को मंजूरी दी जा चुकी है। दो मई के बाद यहां जब भाजपा सरकार बनेगी तो पश्चिम बंगाल में जो दानपुनी तक का जो सेक्शन है वहां भी फ्रेट कॉरिडोर का काम शुरू कर दिया जाएगा। पुरुलिया भी इससे जुड़ेगा और यहां रोजगार के अनेक अवसर बनेंगे।

यहां कृषि आधारित उद्योगों पर बल दिया जाएगा, ताकि यहां के युवाओं को यहीं के यहीं रोजगार मिल सके। दलित, आदिवासी और पिछड़े इलाकों के युवा रोजगार से जुड़ सकें, इसके लिए कौशल विकास पर फोकस किया जाएगा।

बंगाल में ममता की निर्मम सरकार
मां, मानुस और माटी की बात करने वाली दीदी के मन में अगर दलित, पिछड़ों और आदिवासियों के प्रति ममता होती, तो वह यहां विकास करती। लेकिन उन्होंने तो यहां माओवादी माफिया की फौज तैयार कर दी। सब जानते हैं कि यहां बालू माफिया और कोयला माफियाओं को किसकी शह मिली हुई है। दीदी ने माओवादियों को बढ़ावा दिया है और इसका कष्ट यहां के लोगों को उठाना पड़ता है।

पुरुलिया के साथ हमेशा अन्याय हुआ
इस इलाके के साथ हमेशा अन्याय किया गया। मैं दिल्ली में रहते हुए भी यहां का दर्द और समस्याओं को समझता रहा। आपका अधिकार छीनकर किसी और को दे दिया गया। मैं जानता हूं कि OBC समुदाय के मेरे भाई-बहनों के साथ यहां पर विश्वासघात किया गया है।

बंगाल की जनता TMC के खिलाफ
दीदी को बंगाल के लोगों के हितों से ज्यादा खेल की चिंता पड़ी है, लेकिन दीदी यह भूल रही हैं कि इस बार बंगाल की जनता खुद उनके विरोध में खड़ी है। दस साल की दूरनीति का सजा लोग उन्हें देकर रहेंगे। दस साल के तुष्टिकरण के बाद, लोगों पर लाठियां-डंडे चलवाने के बाद अब ममता दीदी अचानक बदली-बदली सी दिख रही है। यह हृदय परिवर्तन नहीं, हार का डर है। दीदी यह सब करते रहिए, हर तरह से खेलते रहिए, लेकिन यह मत भूलिए कि बंगाल की जनता की याद बहुत तेज होती है। उसे याद है कि आपने गाड़ी से उतरकर कितने लोगों को डांटा-फटकारा था।

बंगाल में घुसपैठ को हवा देने की वजह तुष्टिकरण
बंगाल की जनता को याद है जब आपने देश की सेना पर तख्ता पलट की कोशिश का आरोप लगाया। जब पुलवामा पर हमला हुआ, तब आप किसके साथ खड़ी थीं, यह सबको याद है। दिल्ली की कोर्ट ने बहुत बड़ा फैसला किया। यह बाटला हाउस से जुड़ा है। इस फैसले ने आतंकवाद और उनका साथ देने वालों का चेहरा उजागर कर दिया। इसमें एक इंस्पेक्टर शहीद हुआ। लेकिन ममता दीदी और उस समय उनकी पार्टी का व्यवहार कोई भूल नहीं सकता। तब ये आतंकवाद के साथ खड़े थे। बंगाल में घुसपैठ को हवा देने की भी एक ही वजह है तुष्टिकरण। भारत को वंदेमातरम का पाठ पढ़ाने वाली इस जमीन पर दीदी से किसी को ऐसी उम्मीद नहीं थी।

बाटला हाउस पर सवाल उठाने वाले बेनकाब हुए
बंगाल की जनता को याद है जब आपने देश की सेना पर तख्ता पलट की कोशिश का आरोप लगाया। जब पुलवामा पर हमला हुआ, तब आप किसके साथ खड़ी थीं, यह सबको याद है। दिल्ली की कोर्ट ने बहुत बड़ा फैसला किया। यह बाटला हाउस से जुड़ा है। इस फैसले ने आतंकवाद और उनका साथ देने वालों का चेहरा उजागर कर दिया। इसमें एक इंस्पेक्टर शहीद हुआ। लेकिन ममता दीदी और उस समय उनकी पार्टी का व्यवहार कोई भूल नहीं सकता। तब ये आतंकवाद के साथ खड़े थे। बंगाल में घुसपैठ को हवा देने की भी एक ही वजह है तुष्टिकरण। भारत को वंदेमातरम का पाठ पढ़ाने वाली इस जमीन पर दीदी से किसी को ऐसी उम्मीद नहीं थी।

ममता की चोट का भी जिक्र किया
हमारे लिए तो दीदी भी भारत की एक बेटी है, जिसका सम्मान हमारे संस्कारों में रचा-बसा है। जब उन्हें चोट लगी तो हमें भी चिंता हुई। मेरी प्रार्थना है कि उनकी चोट जल्द से जल्द ठीक हो। साथियों पश्चिम बंगाल तभी प्रगति कर सकता है, जब विकास प्रक्रिया में सभी पक्ष साथ आ सकें। लेकिन दीदी ने यहां के दलित, पिछड़े और आदिवासियों को अपना माना ही नहीं। यहा तोलाबाजी का सबसे बड़ा नुकसान आदिवासियों और गरीबों को ही हुआ है। यहां केंद्र से गरीबों के लिए सस्ता चावल भेजा जाता है उसे भी TMC के तोलाबाज भी नहीं छोड़ते। पिछले साल कोरोना के समय टनों चावल और अनाज का प्रबंध किया गया, तो दीदी के तोलाबाजों ने उसमें भी घोटाला किया।

तोलबाजों की पराजय होगी
इस बार बंगाल के चुनाव में तोलबाजों की पराजय होगी। पश्चिम बंगाल में TMC के दिन गिनती के ही रह गए हैं। यह बात ममता दीदी भी अच्छी तरह समझ रही हैं। खेला होबे, खेला होबे। जब जनता की सेवा का संकल्प हो, विकास के लिए दिन-रात एक संकल्प हो, तब खेला नहीं खेला जाता दीदी।

दीदी बोले- खेला होबे, भाजपा बोले- सोनार बांग्ला होबे
इसलिए दीदी बोले खेला होबे, भाजपा बोले विकास होबे। दीदी बोले खेला होबे, भाजपा बोले शिक्षा होबे। भाजपा बोले महिला का उत्थान होबे। दीदी बोले खेला होबे, भाजपा बोले संपूर्ण विकास होबे। दीदी बोले खेला होबे, भाजपा बोले सोनार बांग्ला होबे। दीदी बोले खेला होबे, भाजपा बोले नौकरी होबे। दीदी बोले खेला होबे, भाजपा बोले अस्पताल होबे। दीदी बोले खेला होबे, भाजपा बोले नौकरी होबे। दीदी बोले खेला होबे, भाजपा बोले स्कूल होबे।

अत्याचारी पर कानून के मुताबिक कार्रवाई होगी
बीते दिन उत्तर 24 परगना में बम फेंके गए, भाजपा कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया गया। यह अत्याचार, माफियाराज नहीं चलेगा। मैं स्थानीय पुलिस और प्रशासन से आग्रह करूंगा कि लोकतंत्र को सर्वोपरि रखें। हर भाजपा कार्यकर्ता को विश्वास दिलाता हूं कि हर अत्याचारी पर कानून के मुताबिक कार्रवाई होगी।

भाजपा के शासन में कानून का राज फिर से स्थापित किया जाएगा। माफिया और अत्याचारी को कानून जेल के हवाले करके रहेगा। हमारे लिए जनता-जर्नादन ही ईश्वर का रूप है। 130 करोड़ देशवासी ही परमात्मा है। हम उनकी सेवा में लगे हैं। रामकृष्ण परमहंस ने कहा था कि जीव में ही शिव को देखो।

घोष ने दिए चुनाव न लड़ने के संकेत
मोदी की रैली से पहले बंगाल भाजपा के अध्यक्ष दिलीप घोष ने चुनाव नहीं लड़ने के संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि अब तक पार्टी के उम्मीदवारों में उनका नाम नहीं रखा है। पार्टी ने तय किया है कि वे प्रदेश अध्यक्ष हैं, ऐसे में पार्टी ने उन्हें पूरे राज्य में प्रचार का जिम्मा और चुनाव लड़ाने की जिम्मेदारी सौंपी है।

बंगाल में मोदी की संभावित रैलियां

  • 20 मार्च- खड़गपुर
  • 21 मार्च- बांकुड़ा
  • 24 मार्च- कांथी
  • 1 अप्रैल- मथुरापुर और उलबेड़िया
  • 3 अप्रैल- आरामबाग

बचे उम्मीदवारों का ऐलान जल्द
इस बीच भाजपा केंद्रीय चुनाव समिति (CEC) की बुधवार को बैठक हुई। मीटिंग में प्रधानमंत्री मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्‌डा मौजूद थे। बैठक में बंगाल के पांचवें और छठे फेज की 88 सीटों पर प्रत्याशियों के नाम पर चर्चा हुई।

बैठक से निकलकर भाजपा सांसद और केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो ने बताया कि पश्चिम बंगाल के बाकी चार फेज की सीटों पर उम्मीदवारों का नाम तय हो चुका है। इसकी घोषणा पार्टी हाईकमान द्वारा एक-दो दिन में की जाएगी। भाजपा ने अभी बंगाल के चार फेज के प्रत्याशियों की लिस्ट जारी की है। अभी चार फेज की सूची आना बाकी है।

दो बार हो चुकी है चुनाव समिति की बैठक
इससे पहले भाजपा केंद्रीय चुनाव समिति की दो बैठकें हो चुकी हैं। इसमें बंगाल के चार फेज की सीटों और असम, तमिलनाडु, केरल, पुडुचेरी की सीटों पर प्रत्याशी तय किए जा चुके हैं। पार्टी ने रविवार को हुई मीटिंग में बंगाल के तीसरे चरण की 31 में से 27 और चौथे चरण की 44 में से 36 सीटों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा की थी।

बंगाल में 8 फेज में चुनाव
पश्चिम बंगाल में इस बार 8 फेज में वोटिंग होगी। 294 सीटों वाली विधानसभा के लिए वोटिंग 27 मार्च (30 सीट), 1 अप्रैल (30 सीट), 6 अप्रैल (31 सीट), 10 अप्रैल (44 सीट), 17 अप्रैल (45 सीट), 22 अप्रैल (43 सीट), 26 अप्रैल (36 सीट), 29 अप्रैल (35 सीट) को होनी है।

असम में तीन चरणों में चुनाव
असम की 126 सीटों के लिए 27 मार्च, 1 अप्रैल और 6 अप्रैल को तीन चरणों में चुनाव होना है। पहले चरण में कुल 47 सीटें हैं। दूसरे में 39 और तीसरे चरण में 40 सीटों पर मतदान होगा। मतगणना 2 मई को होगी।

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