गया: बगैर किसी आदेश के सामग्री आपूर्ति और रख-रखाव के नाम पर रेवड़ियों की तरह बांट दिया 6 करोड़ से अधिक का चेक

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घोटालों का अखाड़ा बन गया है, गया जिला का कल्याण विभाग। करोड़ों की छात्रवृति घोटाला का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा है। इसी बीच एक और बड़े घोटाले की परत दर परत खुल रही है। यह सब तब है, जब जिले के ही संतोष कुमार सुमन इस विभाग के कैबिनेट मंत्री हैं। नए घोटाला के सूत्रधार हैं, निवर्तमान और सेवानिवृत्त जिला कल्याण पदाधिकारी नागेन्द्र पासवान। सबसे बड़ा दु:साहस तो यह है कि विभागीय मंत्री सह उनके पिता पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के पैतृक गांव महकार स्थित अनुसूचित जाति आवासीय विद्यालय के नाम पर लाखों की फर्जी निकासी की गई है।

ना टेंडर ना आदेश सिर्फ करोड़ों का बंदरबांट – वितीय वर्ष 2020-2021 में व्यय किए गए राशि की यदि निष्पक्ष जांच हुई तो चौंकाने वाला मामला सामने आएगा। अनुसूचित जाति आवासीय विधालयों और छात्रावासों के रख-रखाव ओर सामग्री आपूर्ति के नाम पर चंद एजेंसियों को करोड़ों का चेक दे दिया गया। सबसे आश्चर्यजनक तो यह कि करोड़ों खर्च के लिए उच्चाधिकारियों का कोई अनुमोदन नहीं लिया गया। यही नहीं निमयों के विपरीत टेंडर भी नहीं हुआ। यही नहीं कार्य अथवा आपूर्ति के बगैर एजेंसियों को करोड़ों रूपए अग्रिम दे दिए गए।

व्यक्तिगत नाम पर भी काटा गया चेक- तत्कालीन जिला कल्याण पदाधिकारी नागेन्द्र पासवान के लिए मानों विभागीय कायदा-कानून कोई चीज ही नहीं थी। एक आपूर्तिकर्ता ओमप्रकाश सिंह को वे अपने साथ ही यहां लाए थे। बताया जाता है कि वे सहरसा जिले के हैं। उनके व्यक्तिगत नाम के अलावा उनके ही फर्म सत्यभाभा इंटरप्राइजेज और मां भवानी इंटरप्राइजेज के नाम करीब तीन करोड़ का भुगतान किया गया है। विदित हो कि सत्यभाभा के खिलाफ बेतिया में केस भी दर्ज है। इसी प्रकार गोलू इंटरप्राइजेज, रौशनी फाउंडेशन सहित आधा दर्जन एजेंसियों को अनुचित तरीके से भुगतान किया गया। यही नहीं एक छात्रावास के पूर्व छात्र नायक रामबली पासवान के नाम पर भी करीब नौ लाख का चेक काटा गया।

इन कार्यों के नाम पर हुआ करोड़ों का बंदरबांट – अनुसूचित जाति कल्याण छात्रावासों और आवासीय विधालयों के रख-रखाव, कहीं मिटटी भराई, बिजली वायरिंग, बोरिंग सहित अन्य कार्यों के नाम पर लाखों का बंदरबांट किया गया। कुछ आवासीय विद्यालयों में ओमप्रकाश सिंह के फर्म के नाम पर झूला सप्लाई के नाम पर लाखों की निकासी की गई है। कुर्सी, टेबुल, चौकी, आलमीरा, डस्टबीन की सप्लाई के नाम पर भी घपला हुआ है। इन मामलों में विभागीय निर्देशों के साथ बिहार वित्त नियमावली का उल्लंघन किया गया है।

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