बजट सत्र: बिहार विद्यापीठ का मामला विधान परिषद में उठा, अवैध कब्जे और व्यावसायिक इस्तेमाल के आरोपों की जांच सदन की कमिटी करेगी

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राजधानी पटना स्थित बिहार विद्यापीठ की बदहाली का मामला आज बिहार विधान परिषद में उठा. कांग्रेसी प्रेमचंद्र मिश्रा ने प्रश्नोत्तर काल में इस मामले को उठाया था. सरकार से उन्होंने यह जानना चाहा कि बिहार विद्यापीठ जैसी धरोहर बदहाल स्थिति में क्यों है. सरकार इसके रखरखाव के लिए राशि खर्च करती है तो इसके बावजूद इसका नियंत्रण किन लोगों के हाथ में है और विद्यापीठ परिसर का व्यवसाय के समय के साथ-साथ उस पर अवैध कब्जा कैसे चल रहा है.

सरकार की तरफ से जवाब देते हुए विभागीय मंत्री आलोक रंजन झा ने कहा कि इस संबंध में विद्यापीठ प्रशासन की तरफ से रिपोर्ट मंगाई गई है और इस तरह की कोई शिकायत नहीं मिली है. इसके बाद प्रेमचंद्र मिश्रा ने कहा कि वित्त प्रबंधन के जिन लोगों की तरफ से उसका बेजा इस्तेमाल किया जा रहा है उनकी रिपोर्ट पर सरकार कैसे भरोसा कर रही है. प्रेमचंद्र मिश्रा के इस सवाल के बाद इस मामले पर सदन में कई अन्य सदस्यों ने भी अपनी राय रखी. जेडीयू एमएलसी राम वचन राय ने भी बिहार विद्यापीठ की बदहाली को लेकर सदन में चिंता जताई. इसके अलावे रामचंद्र पूर्वे, संजय पासवान समेत अन्य सदस्यों ने भी सदन की कमेटी बनाकर इसकी जांच कराने की मांग रखी.

सदन की कमेटी से जांच कराए जाने की मांग रखने जाने के बाद कार्यकारी सभापति अवधेश नारायण सिंह ने कहा कि उन्होंने बिहार विद्यापीठ की स्थिति को लेकर जांच कराने की पहल पहले भी की थी. विधान परिषद की एक कमेटी भी बनाई गई थी, लेकिन एक -एक कर सभी सदस्यों का कार्यकाल खत्म हो गया और कमेटी की कोई रिपोर्ट नहीं आ सकी. सभापति अवधेश नारायण सिंह ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि कमेटी बनाने से कोई हल निकलने वाला है. बावजूद इसके सदस्य कमेटी बनाए जाने की मांग करते रहे. प्रेमचंद मिश्रा ने कहा कि अगर सभापति एक समय सीमा के भीतर कमेटी से रिपोर्ट मांगें तो शायद कुछ नतीजा निकल जाए. इसके बाद कार्यकारी सभापति ने इस मामले पर जांच के लिए कमेटी बनाने का आदेश दे दिया.

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