परमबीर लेटर केस में ई-मेल और साइन पर ट्विस्ट, मुख्यमंत्री आफिस के बयान ने बढ़ा दिया सस्पेंस

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मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह द्वारा महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख पर निलंबित पुलिस अधिकारी सचिन वाजे से हर महीने 100 करोड़ रुपये की वसूली करने के लिए कहने का आरोप लगाए जाने के मामले में मुख्यमंत्री ऑफिस का पहला बयान आया है। सीएम उद्धव ठाकरे के दफ्तर से जारी बयान से मामले में सस्पेंस और बढ़ गया है। इस सस्पेंस की वजह राज्य सरकार द्वारा परमबीर सिंह की उस ई-मेल आईडी की जांच करने की बात कहना है, जिस ई-मेल आईडी से मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र भेजा गया है। इसके साथ ही सरकार ने पत्र में परमबीर सिंह का साइन नहीं होने की बात भी कही है।

मुख्यमंत्री ऑफिस की ओर से कहा गया, “होमगार्ड कमांडेंट जनरल परमबीर सिंह के नाम का एक पत्र आज (शनिवार) शाम 4.37 बजे मुख्यमंत्री सचिवालय के आधिकारिक ई-मेल पर प्राप्त हुआ। Paramirs3@gmail.com से यह ई-मेल मिला, जिसमें केवल परमबीर सिंह का नाम है, हस्ताक्षर नही हैं। विभाग के माध्यम से परमबीर सिंह से संपर्क करने का प्रयास किया जा रहा है। वास्तव में, IPS अधिकारियों की सूची के लिए परमबीर सिंह द्वारा दिया गया व्यक्तिगत ईमेल पता parimbirs@hotmail.com है, इसलिए प्राप्त ईमेल की जांच करना आवश्यक है।” हालांकि, आपको बता दें कि अब पत्र का आखिरी पेज सामने आया है, जिसपर साइन दिख रहा है।

परमबीर सिंह ने पत्र में क्या-क्या कहा?

परमबीर सिंह ने अपनी चिट्ठी में लिखा है, ‘गृह मंत्री अनिल देशमुख ने क्राइम इंटेलीजेंस यूनिट के मुखिया सचिन वाज़े को पिछले कुछ महीनों में लगातार अपने आधिकारिक आवास पर बुलाया और पैसे इकट्ठे करने को कहा। फरवरी के मध्य में देशमुख ने वाज़े को अपने घर बुलाया। उस वक्त अनिल देशमुख के निजी सचिव मिस्टर पलांडे समेत मंत्री के स्टाफ के 1-2 लोग  मौजूद थे। इस मीटिंग में देशमुख ने वाज़े से हर महीने 100 करोड़ रुपए इकट्ठा करने को कहा। देशमुख ने इस टारगेट को हासिल करने के लिए वाज़े को बताया कि मुंबई में करीब 1,750 रेस्टोरेंट, बार और दूसरे एस्टेब्लिशमेंट हैं। अगर हर एक से हर महीने 2-3 लाख रुपये लिए जाते हैं तो 40-50 करोड़ रुपए इकट्ठा हो जाएंगे, बाकी बची हुई रकम दूसरे सोर्सेज से हासिल की जा सकती है।’

परमबीर सिंह ने पत्र में लिखा है, ‘कुछ दिनों बाद गृह मंत्री अनिल देशमुख ने सोशल सर्विस ब्रांच के ACP संजय पाटिल को अपने घर बुलाया। इस मीटिंग में गृह मंत्री के निजी सचिव मिस्टर पलांडे और कुछ अफसर शामिल थे। मीटिंग में गृह मंत्री अनिल देशमुख ने ACP संजय पाटिल से मुंबई में मौजूद हुक्का पार्लर की जानकारी मांगी। 2 दिन बाद गृह मंत्री अनिल देशमुख ने ACP संजय पाटिल और DCP भुजबल को अपने घर बुलाया। पहले इन दोनों अफसरों को बाहर इंतज़ार करवाया, इसके बाद मिस्टर पलांडे ACP संजय पाटिल और DCP भुजबल को अंदर लेकर गए। मिस्टर पलांडे ने ACP संजय पाटिल को बताया कि गृह मंत्री अनिल देशमुख मुंबई के 1,750 रेस्टोरेंट, बार और दूसरे एस्टेबिल्शमेंट से हर महीने 40-40 करोड़ रुपए की वसूली चाहते हैं।’

देशमुख ने जारी किया बयान, आरोपों को बताया गलत

अनिल देशमुख ने प्रेस नोट जारी करके कहा, “परमबीर सिंह के आरोप पूरी तरह से झूठे हैं। उन्हें अपने आरोपों को साबित करना चाहिए। मैं उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर कर रहा हूं।” उन्होंने कहा है कि “परमबीर सिंह द्वारा मेरे ऊपर लगाए गए आरोप झूठे हैं। यह मुझे बदनाम करने तथा महाविकास अघाड़ी सरकार द्वारा उनकी रक्षा न करने के बाद बदले के लिए साजिश है।” उन्होंने कहा, “सचिन वाज़े को गिरफ्तार किए जाने के इतने दिनों बाद तक परमबीर सिंह चुप क्यों बैठे थे? उसी समय अपना मुंह क्यों नहीं खोला? यह महसूस करने के बाद कि आपको 17 मार्च को पुलिस आयुक्त के पद से हटा दिया जाएगा, 16 मार्च को परमबीर सिंह ने एसीपी पाटिल से व्हाट्सएप चैट में कुछ सवाल पूछे और उन्हें अपेक्षित जवाब मिले।”

उन्होंने कहा, “यह परमबीर सिंह की एक बड़ी साजिश का हिस्सा था। इस चैट के माध्यम से, परमबीर सिंह व्यवस्थित रूप से सबूत इकट्ठा करना चाहते थे।  इस चैट से उत्तर प्राप्त करते समय, आप देख सकते हैं कि परमवीर सिंह कितने अधीर थे। परमबीर सिंह को बार-बार एसीपी पाटिल ने पूछा है। इसका क्या मतलब है?” बयान में उन्होंने कहा, “18 मार्च को मैंने एक बयान दिया, उसके बाद अपने आप को बचाने के लिए 19 मार्च को परमवीर ने फिर से व्हाट्सएप पर एक बातचीत का सबूत बनाने की कोशिश की, क्योंकि मैंने कहा था कि मैंने लोगों से बात करने के दौरान उनके खिलाफ कुछ गंभीर मुद्दों के कारण उन्हें पद से हटा दिया। पुलिस विभाग में सभी जानते हैं कि सचिन वाज़े और एसीपी संजय पाटिल, परमबीर सिंह के बहुत करीब हैं।”

देशमुख ने कहा, “परमवीर सिंह ने 16 साल से निलंबित वाज़े को फिर से पुलिस में लेने का फैसला लिया। परमबीर सिंह ने खुद को बचाने के लिए ये झूठे आरोप लगाए हैं। अगर परमबीर सिंह कहते हैं कि सचिन वाज़े ने फरवरी में परमबीर सिंह से मुलाकात की और उन्हें यह सब बताया, तो उन्होंने उसी समय क्यों नहीं बताया।  इतने दिन चुप क्यों रहे? यह पता चलने के बाद कि विस्फोटक मामले में हम मुश्किल में पड़ सकते हैं, परमबीर सिंह ने इस तरह के झूठे आरोप लगाकर सरकार को ब्लैकमेल करने की कोशिश की है। परमवीर सिंह द्वारा विस्फोट मामले की जांच और मनसुख हिरेन की संदिग्ध मौत की साजिश रची गई है। मुख्यमंत्री को परमबीर सिंह द्वारा लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच करनी चाहिए।”

फडणवीस ने कहा, देशमुख को उनके पद से हटाया जाए

सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उद्धव सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि परमबीर सिंह के आरोप मुकेश अंबानी के घर के पास जिलेटिन मिलने से भी ज्यादा विस्फोटक हैं। उन्होंने कहा, ‘मुंबई की पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने पत्र के माध्यम से जो आरोप लगाए हैं वो गंभीर हैं। महाराष्ट्र के गृह मंत्री को तुरंत इस्तीफा देना चाहिए या मुख्यमंत्री को उन्हें हटाना चाहिए। इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। केंद्रीय एजेंसी इसकी जांच करें। अगर राज्य सरकार को लगता है कि हमें केंद्रीय एजेंसी से जांच नहीं करानी तो कोर्ट मॉनिटर इंक्वायरी होनी चाहिए।’  वहीं, बीजेपी नेता राम कदम ने भी गृहमंत्री अनिल देशमुख का इस्तीफा मांगा है। उन्होंने महाराष्ट्र सरकार पर जनता से उगाही का आरोप लगाया है।

महाराष्ट्र के CM ठाकरे ने शरद पवार समेत कई नेताओं से की बात

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने शनिवार देर रात डीजी रजनीश सेठ से बैठक की और परमवीर सिंह के लेटर पर चर्चा की। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री निवास वर्षा बंगले में करीब 45 मिनट बैठक चली। सूत्रों के मुताबिक, परमवीर के पत्र को लेकर उद्धव ठाकरे ने शरद पवार समेत शिवसेना के प्रमुख नेताओं से फोन पर बात की। उधर अनिल देशमुख के सरकारी निवास ज्ञानेश्वरी के बाहर सुरक्षा बढ़ाई गई।

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