विशेष : स्वस्थ और सुपोषित नौनिहाल से ही देश खुशहाल

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आशुतोष अनत

स्वस्थ तन में ही स्वस्थ मन का निवास होता है और  स्वस्थ मन में ही सुंदर और सकारात्मक विचार पनपते हैं। बेहतर पोषण के बिना बेहतर स्वास्थ्य की कल्पना नहीं की जा सकती है। पोषण में आहार का महत्वपूर्ण स्थान है। पोषणयुक्त भोजन शरीर को सुचारू रूप से कार्य करने में मदद करता है। कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन तथा खनिज लवण भोजन के प्रमुख पौष्टिक तत्व हैं।

केंद्र सरकार देश को कुपोषण से मुक्ति दिलाने के लिए तत्परता के साथ सतत कार्य करते रही है। कोरोना संकट में भी बच्चों के पोषण के प्रति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चिंतित रहे हैं। प्रधानमंत्री ने 30 अगस्त 2020 को प्रसारित रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 68वें संस्करण में पोषण पर विस्तार से चर्चा की थी, कहा था कि नेशन और न्यूट्रिशन का गहरा संबंध है। बच्चों के साथ-साथ मां को भी पौष्टिक आहार मिलना चाहिए। न्यूट्रिशन अभियान में लोगों की भागीदारी बहुत जरूरी है। जन-भागीदारी ही से यह अभियान सफलता हासिल करेगा। उन्होंने बताया था कि पोषण यह नहीं है कि आप क्या खाते हैं और कितना खाते हैं, बल्कि आवश्यक है कि आप यह समझें कि आपके शरीर को किस न्यूट्रिएंट की कितनी मात्रा में जरूरत है। बच्चे किसी भी देश का भविष्य होते हैं। अतः उनके पोषण और उन्हें जन्म देनेवाली मां के पोषण पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

पोषण के प्रति लोगों में जागृति आये, बच्चों का बेहतर तरीके से पोषण हो, कोई भी बच्चा कुपोषित न रह जाये, इसके लिए सरकार लगातार प्रयासरत है। पोषण के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए पोषण अभियान चलाया जा रहा है। जिसके तहत 16 मार्च से 31 मार्च 2021 तक पोषण पखवाड़ा मनाया जा रहा है। इस अभियान के माध्यम से  बताया जा रहा है कि बच्चों को कुपोषण से कैसे बचाया जाये।  पोषण पखवाड़ा 2021 का मुख्य उद्देश्य पोषण वाटिका के निर्माण को बढ़ावा देना, स्थानीय पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित सदस्यों की भागीदारी के साथ पोषण संबंधी विषयों पर जागरूकता लाना, अंतरविभागीय समन्वय से पोषण के पांच सूत्रों का व्यापक प्रचार-प्रसार करना और स्वास्थ्य के लिए योग के महत्व को लोगों तक पहुंचाना है। पोषण पखवाड़ा के दौरान सुपोषण संबंधी संदेशों को लक्षित परिवारों तक पहुंचाने और उद्देश्यों की पूर्ति के लिए कई कार्यक्रम किये जा रहे हैं। इस दौरान आंगनबाड़ी केन्द्रों में औषधि और फलदार पौधों का वितरण और रोपण, पोषण वाटिका का निर्माण, पोषण पंचायत का आयोजन और कुपोषित बच्चों को चिन्हित किया जा रहा है। पोषण के पांच सूत्रों के प्रचार-प्रसार के लिए अन्तरविभागीय समन्वय से सुपोषण रथ, पोषण मेला, एनीमिया कैम्प, रैली, कृषक समूह की बैठक, स्कूल आधारित गतिविधियां, युवा और स्व-सहायता समूह की बैठक जैसी गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। पोषण पखवाड़े के दौरान हितग्राहियों के घर-घर जाकर पोषण, स्तनपान, उपरी आहार, पोषण आहार में विविधता संबंधी जागरुकता बढ़ाने के प्रयास किये जा रहे हैं। साथ ही आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका द्वारा अपने क्षेत्र के सभी घरों में जाकर एक से 19 वर्ष तक के सभी बच्चों को कृमि मुक्ति की दवा खिलायी जा रही है। गर्भवती महिलाओं को क्या आहार लेना चाहिए, ताकि गर्भ में पल रहे शिशु का बेहतर पोषण हो, इसकी जानकारी  दी जा रही है। बच्चों के स्वस्थ विकास के लिए बचपन का पोषण बेहद जरूरी है। उचित पोषण किसी भी व्यक्ति के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, लेकिन बच्चों के पोषण पर खास ध्यान देने की जरूरत है। पौष्टिक आहार बच्चों को सिर्फ स्वस्थ ही नहीं रखते, अपितु आहार का प्रभाव बच्चों के विकास पर भी पड़ता है।

वित्तीय वर्ष 2021-22 के बजट में बच्चों और महिलाओं में कुपोषण की समस्या दूर करने के लिए 2,700 करोड़ रुपये आवंटित किये गये हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार बच्चों के पोषण और उनके बेहतर स्वास्थ्य के लिए कई योजनाएं भी चला रही है। स्वास्थ्य संबंधी बुनियादी ढांचागत सुविधाओं में निवेश-वृद्धि की गयी है।  मिशन पोषण 2.0 के लिए 20,105 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने घोषणा की है कि छह वर्षों में लगभग 64,180 करोड़ रुपये के परिव्यय वाली एक नयी स्कीम ‘पीएम आत्मनिर्भर स्वस्थ भारत योजना’ शुरू की जायेगी। इससे प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक स्वास्थ्य प्रणालियों की क्षमता विकसित होगी। साथ ही मौजूदा राष्ट्रीय संस्थान मजबूत होंगे, और नये संस्थानों का सृजन होगा, जिससे नयी बीमारियों की पहचान कर इलाज करने में आसानी होगी। साथ ही, नये बजटीय प्रावधान के अनुसार 17,788 ग्रामीण और 11,024 शहरी स्वास्थ्य एवं वेलनेस केंद्रों के लिए आवश्यक सहायता दी जाएगी। 11 राज्यों के सभी जिलों और 3382 प्रखंड सार्वजनिक स्वास्थ्य इकाइयों में एकीकृत सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी। देश के 602 जिलों और 12 केन्द्रीय संस्थानों में गंभीर बीमारी की देखभाल से जुड़े अस्पताल ब्लॉक स्थापित किये जाएंगे। राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केन्द्र (एनसीडीसी), इसकी 5 क्षेत्रीय शाखाओं और 20 महानगरों में स्थित स्वास्थ्य निगरानी इकाइयों को मजबूत किया जाएगा। 15 स्वास्थ्य आपातकालीन आपरेशन केन्द्रों और 2 मोबाइल अस्पतालों की स्थापना की जाएगी। साथ ही, सभी सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशालाओं को आपस में जोड़ने के लिए एकीकृत स्वास्थ्य सूचना पोर्टल का विस्तार सभी राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों में किया जाएगा। इनके अलावा वन हेल्थ के लिए एक राष्ट्रीय संस्थान, डब्ल्यूएचओ के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र के लिए एक क्षेत्रीय अनुसंधान प्लेटफॉर्म, जैव सुरक्षा स्तर-3 की 9 प्रयोगशालाओं और विषाणु विज्ञान के लिए 4 क्षेत्रीय राष्ट्रीय संस्थानों की स्थापना की जाएगी। बच्चों और महिलाओं को कुपोषण से मुक्ति दिलाने की दिशा में राष्ट्रीय पोषण अभियान ने माइलस्टोन का काम किया है।

राष्ट्रीय पोषण अभियान (नेशनल न्यूट्रिशन मिशन) की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला दिवस के मौके पर 08 मार्च  2018 को राजस्थान के झुंझुनू जिले में की थी। इस मिशन के तहत बच्चों, महिलाओं में कुपोषण की समस्या को दूर करना है राष्ट्रीय योजना के अंतर्गत नवजात बच्चों के वजन में कमी, ठिगनेपन, खून की कमी, खाने में पोषक तत्वों का असंतुलन आदि के निवारण के लिए महती कार्य किये गये हैं। इसका उद्देश्य वर्ष 2022 तक भारत को कुपोषण से मुक्त करना है। अनुमान है कि इस योजना से देश में करीब 10 करोड़ लोगों को लाभ पहुंचाया जाएगा।  इसके अतिरिक्त नरेंद्र मोदी सरकार अन्य कई योजनाओं के द्वारा कुपोषण की समस्या से निबटने का सतत प्रयास कर रही है। उनमें प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना भी शामिल है।  केंद्र सरकार ने मातृत्व सहयोग के मकसद से प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना शुरू किया है। इस योजना के तहत गर्भवती और स्तनपान करानेवाली माताओं को पहले जीवित जन्म के लिए 6000 रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान किया जाता है। इसके अलावा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम भी कुपोषण को दूर करने में कारगर साबित हुआ है।  इसका उद्देश्य लोगों को सस्ती दर पर पर्याप्त मात्रा में बेहतर खाद्यान्न उपलब्ध कराना है ताकि उन्हें खाद्य और पोषण सुरक्षा मिले और वे सम्मान के साथ जीवन जी सकें। इस कानून का खास जोर गरीब-से-गरीब व्यक्ति, महिलाओं और बच्चों की जरूरतें पूरी करने पर है। बच्चों के पोषण स्तर में सुधार करने में मध्याह्न भोजन योजना भी मददगार साबित हुई है। इसके तहत हर सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूल के प्रत्येक बच्चे को न्यूनतम 200 दिनों के लिए 8-12 ग्राम प्रतिदिन प्रोटीन और ऊर्जा के न्यूनतम 300 कैलोरी अंश के साथ मध्याह्न भोजन परोसा जाता है।  ऐसे में यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि बच्चे स्वस्थ और सुपोषित हों, इसके लिए सरकार लगातार बेहतर कार्य कर रही है। क्योंकि बच्चे ही देश के भविष्य हैं और उन्हें सुपोषित करके ही किसी भी देश के उज्ज्वल भविष्य की नींव रखी जा सकती है। 

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।)  

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