‘इक्कीसवी सदी के अंतराष्ट्रीय श्रेष्ठ व्यंग्यकार’ का प्रकाशन,मनमोहन हर्ष के ‘पादुका उत्सव’ को भी मिला स्थान

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राजस्थान में जयपुर के निवासी लेखक और व्यंग्यकार मनमोहन हर्ष की व्यंग्य रचना ‘पादुका उत्सव’ को इंडिया नेटबुक्स, नोएडा द्वारा प्रकाशित ‘इक्कीसवी सदी के अंतराष्ट्रीय श्रेष्ठ व्यंग्यकार’ संकलन में देश के नामचीन व्यंग्यकारों की रचनाओं के बीच स्थान मिला है। इस व्यंग्य संकलन का सम्पादन देश के प्रसिद्ध साहित्य सृजकों श्री लालित्य ललित और श्री राजेश कुमार की जोड़ी द्वारा किया गया है। इस व्यंग्य संग्रह में विश्व हिंदी सचिवालय, मॉरीशस द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय व्यंग्य प्रतियोगिता के विजेताओं के साथ ही देश के 19 राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के व्यंग्यकारों की 251 रचनाओं को संजोया गया है। 

चप्पल गुम होने के इर्द गिर्द बुना गया व्यंग्य  
रोजमर्रा की जिंदगी में चप्पल-जूते गुम या चोरी हो जाने की सामान्य सी घटना के अनुभव से हम कई बार गुजरे होंगे, एक ऐसी ही सामान्य घटना के अनुभव के इर्द-गिर्द ‘पादुका-उत्सव’ शीर्षक से मनमोहन हर्ष द्वारा व्यंग्य बुना गया है, जो पाठकों को भीतर तक गुदगुदा देता है।
पात्र ‘हटकरजी’ पर केन्द्रित व्यंग्य सृजन
बीकानेर मूल के हर्ष राजस्थान सूचना एवं जनसम्पर्क सेवा के अधिकारी है और पिछले 13 वर्षों से जयपुर में कार्यरत है। देश के लगभग सभी प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं में गत 31 वर्षों में उनके खेल और समसामयिक विषयों पर आलेख प्रकाशित होते रहे है। उन्होंने गत कुछ सालों से अपने व्यंग्य पात्र ‘हटकरजी’ के साथ कई रचनाएं लिखी है, जिन्हें भी देश के कई प्रकाशनों में समय-समय पर स्थान मिला है।
‘हटकरजी’ और नए शब्द ‘चपलास्तु’ पर विशेष चर्चा
‘इक्कीसवी सदी के अंतराष्ट्रीय श्रेष्ठ व्यंग्यकार’ पुस्तक में सम्पादक द्वय श्री लालित्य ललित और श्री राजेश कुमार ने अपनी भूमिका में मनमोहन हर्ष के व्यंग्य पात्र ‘हटकरजी’ का प्रमुखता से उल्लेख करते हुए लिखा है कि इसके नामकरण में रचनात्मकता का परिचय दिया गया है। यह ऐसा पात्र है, जिसके नाम में ही इसकी विशेषताएं समाहित है। इसके साथ ही हर्ष द्वारा अपने इस व्यंग्य में गढ़े गए एक नए शब्द ‘चपलास्तु’ का सम्पादकों ने ‘अभिनव शब्द प्रयोग’ के तहत विशेष रूप से जिक्र किया है। संकलन में लेखकों द्वारा प्रयुक्त किए ऐसे ही नए शब्दों पर टिप्पणी में कहा गया है कि कथ्य की प्रभावी प्रस्तुति के लिए यह लेखकों की भाषिक दक्षता और रचनात्मकता को दर्शाता है।
देश—विदेश से 251 लेखकों को मिला स्थान
 ‘इक्कीसवी सदी के अंतराष्ट्रीय श्रेष्ठ व्यंग्यकार’ संकलन में मॉरीशस, कनाडा, यूएसए, ऑस्ट्रेलिया, यूके, न्यूजीलैंड, दुबई और नेपाल से सम्बद्ध लेखकों के अलावा देश के राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों में मध्यप्रदेश से 66, उत्तरप्रदेश से 37, राजस्थान और नई दिल्ली से 31-31, महाराष्ट्र से 17, छत्तीसगढ़ से 12, हिमाचल प्रदेश से 9, बिहार से 6, हरियाणा से 4, चंडीगढ़, झारखंड एवं उत्तराखंड से 3-3, कर्नाटक, पंजाब, पश्चिम बंगाल एवं तेलंगाना से 2-2 तथा तमिलनाड़ू, गोवा और जम्मू एवं कश्मीर से 1-1 लेखक की रचनाओं का चयन कर प्रकाशन किया गया है।

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