आरा: कुख्यात बुटन चौधरी के भतीजे का गैंगवार में मर्डर, बदमाशों ने खदेड़कर ठोक दिया

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बिहार में इन दिनों अपराधी बेलगाम हो गए हैं. ताजा मामला आरा का है, जहां अपराधियों ने भोजपुर जिले के कुख्यात अपराधी और हथियारों के शौक़ीन बुटन चौधरी के भतीजे दीपू चौधरी का मर्डर कर दिया है. बेखौफ बदमाशों ने ताबड़तोड़ दो लोगों को गोली मारी है, जिसमें से एक जख्मी हो गया है जबकि दूसरे की मौत हो गई है. भोजपुर पुलिस इस बड़ी वारदात की छानबीन में जुटी हुई है.

गैंगवार के बाद दहशत 
घटना भोजपुर जिले के नवादा थाना इलाके की है, जहां अपराधियों ने आरा शहर के पॉश इलाके में बदमाशों ने गैंगवार की बड़ी घटना को अंजाम दिया. अपराधियों ने सर्किट हाउस के पास बेलाउर गांव के कुख्यात बुटन चौधरी के भतीजे का मर्डर कर दिया है. हथियारबंद अपराधियों ने दीपू चौधरी और अजय चौधरी को गोली मारी है. बताया जा रहा है कि दीपू चौधरी के सिर और गर्दन में गोली लगी, जिसके कारण उसकी मौत हो गई है. पुलिस ने घटनास्थल से 4 खोखा और 2 जिंदा कारतूस बरामद किया है. इस घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है.

अपराधियों ने खदेड़कर मारी गोली
इस घटना के संबंध में जानकारी मिली है कि दीपू चौधरी अपने दोस्त अजय चौधरी के साथ घर में चल रहे हरिकीर्तन के लिए फल लाने बाजार गया था. आरा शहर के पकड़ी चौक के पास जब वह फल खरीद रहा था. तभी हथियारबंद अपराधियों ने उनके ऊपर हमला बोल दिया. उनके ऊपर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी. गोली चलते ही दोनों युवक अपनी जान बचाकर सर्किट हाउस की ओर भागे. इसी बीच अपराधियों को घेरकर दोनों को गोली मार दी.

जानिए कौन है मृतक दीपू चौधरी
इस गैंगवार में मरने वाला दीपू चौधरी AK 47 और अन्य आधुनिक हथियारों के शौकीन बुटन चौधरी का भतीजा है. दीपू को भी पुलिस ने 2 साल पहले 2019 में 20 सितंबर को गिरफ्तार किया था. जब ये स्कॉर्पियो गाड़ी में हथियार लेकर जा रहा था. तब आरा के एसपी रहे सुशील कुमार की टीम ने गाड़ी चेकिंग के दौरान दीपू को हथियार के साथ दबोचा था. इसके ऊपर भी कई मामले दर्ज हैं.

जानिए कौन है हथियारों का शौक़ीन बुटन
भोजपुर जिले के कुख्यात अपराधियों में शुमार बुटन चौधरी भी है, जो एके-47 राइफल समेत अत्याधुनिक हथियारों का काफी शौक़ीन है. 5 साल पहले 2016 में 5 मार्च इसे पुलिस ने हथियारों के जखीरे के साथ अरेस्ट किया था. तब इसके पास से एक एके-47, 1 रेगुलर रायफल, 3 देशी कट्टा, 29 एके-47 की गोलियां और 31 राइफल और कट्टे की गोलियां बरामद की गई थीं. तत्कालीन एसपी नवीन चंद्र झा के मुताबिक बुटन चौधरी उदवंतनगर के बेलाउर में एक शादी समारोह में अत्याधुनिक हथियारों के साथ पहुंचने वाला था. जैसे ही इसकी सूचना पुलिस को मिली, पुलिस ने फौरन जाल बिछाया और बुटन को हथियारों के साथ धर दबोचा.

बूटन चौधरी और उसके भाई को कारावास
गिरफ़्तारी के 3 साल बाद 2019 में षष्टम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश त्रिभुवन यादव ने एके 47 और अन्य घातक हथियारों की बरामदगी के मामले में दोषी करार दिए देते हुए बूटन चौधरी और उसकेे भाई उपेन्द्रर चौधरी समेत पांंच को सश्रम कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई. इस बात की चर्चा जोरों पर रही है कि बुटन चौधरी को पकड़वाने के मामले में गांव के रंजीत चौधरी ने भूमिका निभाई थी. इसके बाद बुटन के साथ रंजीत की दुश्मनी हो गई थी. इस मामले में रंजीत के भाई हेमंत चौधरी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. कभी दोनों दोस्त भी थे. बाद में दुश्मनी इतनी बढ़ गई कि एक दूसरे के हत्या कर देने पर आमदा हो गए.

बुटन और रंजीत की दुश्मनी
आपको बता दें कि कुख्यात बुटन चौधरी ने वर्चस्व की लड़ाई से अपराध की दुनिया में कदम रखा था. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बुटन चौधरी और रंजीत चौधरी में करीब 8 साल पहले काफी घनिष्टता थी. बाद में दोनों के बीच ऐसा तनाव पैदा हुआ कि एक-दूसरे के कट्टर दुश्मन बन गये. यहां तक कि एक-दूसरे के खून के प्यासे भी हो गए. नवंबर 2013 में बुटन चौधरी पर गोलियों से हुए हमले और फिर दिसंबर 2013 में मुखिया चंपा देवी की रस्सी से गला घोंटकर हत्या किये जाने के मामले में रंजीत चौधरी समेत उसके भाई दोनों को आरोपी बनाया गया था. बुटन चौधरी ने साल 2011 के पंचायत चुनाव में अपने नौकर की पत्नी चंपा देवी को मुखिया चुनाव लड़वाया था. जीत भी दर्ज की थी.

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