Patna: CAG रिपोर्ट में खुलासा, गलत तरीके से सरकारी खजाने से करोड़ों की निकासी, बजट निर्माण प्रक्रिया पर कैग ने उठाये सवाल

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उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद ने मंगलवार को नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (सीएजी) से प्राप्त वित्तीय वर्ष 2017-18 का सामान्य, सामाजिक एवं आर्थिक प्रक्षेत्र पर प्रतिवेदन और वर्ष 2018-19 के विनियोग लेखे के साथ ही राज्य के वित्त की प्रति विधानमंडल के पटल पर रखी। इस रिपोर्ट में वित्तीय प्रबंधन को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट में वित्तीय नियमों को दरकिनार कर की गई कपटपूर्ण निकासी के चलते 2.89 करोड़ के गबन की बात कही गई है। वहीं स्वीप खाते को बचत खाते में बदले जाने के गलत फैसले के कारण भी सरकार को 5.15 करोड़ की हानि हुई।

खाते में बदलाव का यह मामला महिला विकास निगम से संबंधित है। सीएजी रिपोर्ट में मेडिकल शिक्षा से संबंधित लेखा परीक्षण में वित्तीय प्रबंधन को लेकर कहा गया है कि योजना मद में केवल 75 प्रतिशत राशि को ही 2013-18 के दौरान व्यय किया गया। यह विभिन्न योजनाओं के तहत शुरू किए गए निर्माण कार्यों की प्रगति बेहद धीमी होने के कारण हुआ। वर्धमान इंस्टीट्यू्ट ऑफ मेडिकल साइंस, पावापुरी और मधेपुरा में मेडिकल कॉलेज निर्माण के अलावा अक्टूबर 2012 से मार्च 2017 के दौरान बेतिया और पटना के चार कॉलेजों में सुरक्षा, सफाई और गृह व्यवस्था के लिए मानव बल की आपूर्ति के लिए 78.47 करोड़ के अधिक भुगतान का खुलासा रिपोर्ट में किया गया है। 

वहीं, काम कराने वाली संस्थानों ने 21.41 करोड़ की अधिक सेंटेज दी। चौदहवें वित्त आयोग के तहत मिलने वाली पूरी राशि भी अनिवार्य शर्तें पूरी नहीं किए जाने के चलते नहीं ली जा सकी। रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2016-18 की अवधि के लिए 878.56 करोड़ का निष्पादन अनुदान प्राप्त नहीं किया गया। वहीं वर्ष 2015-17 के दौरान स्थानीय निकायों को जारी 4621.85 करोड़ का उपयोगिता प्रमाणपत्र प्राप्त ही नहीं किया गया। स्थानीय निकायों द्वारा राजस्व संग्रह के लिए अपने स्तर पर जरूरी कदम न उठाए जाने पर भी सवाल खड़े किए गए हैं। नगर परिषद सीवान द्वारा भराव क्षेत्र के लिए भूमि अर्जन के लिए 3.15 करोड़ का अनियमित भुगतान भी जांच में पाए जाने की बात कही गई है। मुख्यमंत्री सात निश्चय योजना के कार्यों की धीमी प्रगति को लेकर भी सवाल उठाया गया है।

बजट निर्माण प्रक्रिया पर सीएजी ने उठाये सवाल
नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (सीएजी) ने अपनी रिपोर्ट में बजट के निर्माण की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। वित्त विभाग को सुझाव दिया है कि बजट तैयारी की जो प्रक्रिया है, उसे तर्कसंगत बनाया जाए। सीएजी ने कहा है कि बजट अनुमान और वास्तविकता के बीच का अंतर कम होना चाहिए। यह टिप्पणी वित्तीय वर्ष 2017-18 से 2018-19 के दौरान आय और व्यय दोनों के आकलन के बाद की गई है। दरअसल इस दौरान राजस्व प्राप्ति 14347 करोड़ हुई। राजस्व संग्रह में 12.22 की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि बजट के अनुसार 26 हजार 257 करोड़ का राजस्व संग्रह यानी 16.61 प्रतिशत की वृद्धि होनी चाहिए थी। यानी जो अनुमान लगाया गया था, उससे कम संग्रह हुआ। जबकि वित्तीय वर्ष 2017-18 से 2018-19 के बीच व्यय में 22 हजार 273 करोड़ यानी 21.70 प्रतिशत का इजाफा हुआ। यह बजट प्राक्कलन से 8.66 फीसदी कम था। पूंजीगत खर्च में 27.15 प्रतिशत की कमी आई जो कि बजट अनुमान से 35.04 फीसदी कम थी।

आधार सक्षम बाल डिजिटलीकरण पर 1.98 करोड़ का व्यय बेकार गया
सीएजी की रिपोर्ट में शिक्षा विभाग द्वारा आधार सक्षम बाल अभिलेख डिजिटलीकरण के रोके जाने के निर्णय के कारण खर्च हुए 1.98 करोड़ को निष्फल व्यय माना है। दरअसल 2012-14 में बिहार शिक्षा परियोजना परिषद (बीईपी) ने विद्यालयों में नामांकित बच्चों का यू-डायस के साथ माइक्रोसॉफ्ट एक्सल में आधार सक्षम बाल अभिलेख डिजिटलीकरण प्रारंभ करने का निर्णय लिया। इसके साथ ही वर्ष 2013-14 एवं 2014-15 में लक्षित बच्चों के क्रमश: 94 फीसदी एवं 74 फीसदी डाटा का डिजिटलीकरण किया गया। इसपर 1.98 करोड़ का व्यय हुआ। सीएजी की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत सरकार के निर्णय के अनुसार बीईपी ने आधार सक्षम बाल अभिलेख को बंद कर राष्ट्रीय शैक्षिक योजना एवं प्रशासन विश्वविद्यालय (नीपा) के छात्र डाटा प्रबंधन सूचना प्रणाली को नए सिरे से शुरू किया था। इस नयी प्रणाली में डाटा प्रविष्टि माइक्रोसॉफ्ट एक्सल टेम्पलेट में भी की गयी थी। इसपर 1.76 करोड़ का व्यय हुआ जहां 11 अतिरिक्त क्षेत्र जिसमें कुछ और अनिवार्य डाटा यथा बच्चों का बैंक खाता विवरण, ईमेल आईडी, मोबाइल नम्बर आदि सम्मिलित थे। 

व्यय निष्फल साबित हुआ
ऑडिट जांच रिपोर्ट के मुताबिक मौजूदा आधार सक्षम डाटा बेस में इन आवश्यक डाटा को सम्मिलित किया जा सकता था। रिपोर्ट में कहा गया है कि राष्ट्रीय शैक्षिक योजना एवं प्रशासन विश्वविद्यालय ने भी आश्वस्त किया था कि यदि उपलब्ध है तो मौजूदा छात्रवार डाटा को नए डाटाबेस में मैप एवं संकलित मूल डाटा को नए सिरे से इकट्ठा करना चुना गया , जिससे आधार सक्षम बाल अभिलेख पर 1.98 करोड़ का सम्पूर्ण व्यय निष्फल साबित हुआ। इस मामले में शिक्षा विभाग के उत्तर को रिपोर्ट में न्याय संगत नहीं माना गया है।

नई पेंशन योजना की राशि वक्त पर हो जमा
नई पेंशन योजना में कटौती और जमा के समयांतराल को लेकर सीएजी ने आपत्ति की है। सीएजी रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार यह सुनिश्चित करे कि कर्मचारियों के वेतन से होने वाली कटौती और उसमें सरकार का अंशदान मिलाकर राष्ट्रीय प्रतिभूति डिपाजिटरी लिमिटेड (एनएसडीएल) या नई पेंशन स्कीम के ट्रस्टी बैंक में समय पर जमा हो सके। दरअसल वर्ष 2018-19 के दौरान सरकार को 1141 करोड़ एनपीएस मद में जमा करने थे, लेकिन 1081 करोड़ ही जमा हुए। जबकि 31 मार्च 2019 तक 188 करोड़ रुपए जमा नहीं हुए थे। इस राशि पर सरकार को ब्याज देना पड़ा। बता दें कि वर्ष 2005 के बाद नियुक्त हुए कर्मचारी नई पेंशन स्कीम का हिस्सा हैं।

मेडिकल कॉलेजों में 92% तक रिक्तियां
राज्य में एक लाख की आबादी पर फिजिशियन, आयुष चिकित्सक, दंत चिकित्सक और नर्सों की 92 प्रतिशत तक रिक्तियों की बात सीएजी रिपोर्ट में कही गई है। मेडिकल कॉलेजों में सीट बढ़वाने के लिए प्रभावी प्रयास न होने का जिक्र भी इस रिपोर्ट में है। पटना के आईजीआईएमएस, एनएमसीएच, पीएमसीएच के अलावा बेतिया और दरभंगा मेडिकल कॉलेज के 20 विभागों की जांच में 38 से 92 प्रतिशत तक उपकरणों की कमी पाए जाने का खुलासा किया गया है।

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