सचिन वाझे ने NIA कोर्ट से कहा- मुझे बनाया जा रहा है बलि का बकरा, 3 अप्रैल तक बढ़ी हिरासत

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उद्योगपति मुकेश अंबानी के घर के बाहर मिली विस्फोटक वाली कार और मनसुख हिरेन हत्या केस में गिरफ्तार किए गए मुंबई पुलिस के निलंबित अधिकारी सचिन वाझे को 3 अप्रैल तक एनआईए की हिरासत में भेज दिया गया है। वाझे ने गुरुवार को एनआईए कोर्ट को बताया कि उनका अपराध से कोई लेना देना नहीं है और उन्हें बलि का बकरा बनाया जा रहा है।

मुंबई पुलिस के असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर वाझे को 13 मार्च को एनआईए ने गिरफ्तार किया था। रिमांड खत्म होने के बाद आज वाझे को कोर्ट में पेश किया गया था। एनआई ने वाझे के खिलाफ यूएपीए की धाराएं लगाई हैं और 15 दिनों की कस्टडी मांगी थी।

वाझे ने सुनवाई के दौरान जज पीपी सितरे से कहा, ”मुझे बलि का बकरा बनाया गया है, मेरा केस से कोई लेना देना नहीं है। मैं केवल डेढ़ दिन के लिए केस का जांच अधिकारी था और जो अपनी क्षमता में कर सकता था वह किया। लेकिन अचानक कहीं कुछ प्लान बदल दिया गया। मैं खुद ही एनआईए ऑफिस गया था और गिरफ्तार कर लिया गया।” वाझे ने यह भी कहा कि उन्होंने कोई जुर्म कबूल नहीं किया है।

एनआईए के वकील अडिशनल सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने कोर्ट से कहा कि अपराध में किसी पुलिसकर्मी की संलिप्तता पाकर हर कोई हैरान था। जांच के दौरान एनआई ने वाझे के घर से 62 बुलेट जब्त किए और इसकी जांच की आवश्यकता है कि इन्हें वाझे ने क्यों रखा था। पुलिस डिपार्टमेंट ने वाझे को 30 बुलेट जारी किए थे जिनमें से केवल 5 ही बरामद हुए हैं। 

उधर, एनआईए सूत्रों ने बताया कि सजिन वाझे ने जांच एजेंसी के सामने स्वीकार कर लिया है कि विस्फोटक वाली कार के पीछे उन्हीं का हाथ है। वाझे ने बताया कि एंटीलिया (मुकेश अंबानी का घर) के बाहर विस्फोटक इसलिए रखा क्योंकि जांच अधिकारी के रूप में इस केस को सॉल्व करके सुपर कॉप बनना चाहता था।  

एनआईए ने एंटीलिया के पास से विस्फोटक मिलने के मामले में आरोपी निलंबित पुलिस अधिकारी सचिन वाजे के खिलाफ बुधवार को गैरकानूनी गतिविधियां (निवारण) अधिनियम (यूएपीए) की धाराएं भी लगाई हैं। एनआईए ने विशेष एनआईए अदालत को इस मामले में यूएपीए की धाराएं जोड़ने की जानकारी देते हुए बुधवार को अर्जी दाखिल की। 

सूत्रों के अनुसार मुंबई पुलिस में सहायक निरीक्षक वाजे पर यूएपीपीए की धारा 16 और 18 के तहत आरोप लगाए गए हैं। एनआईए ने वाजे की हिरासत खत्म होने से एक दिन पहले यह कदम उठाया है। एजेंसी उस कार के मालिक मनसुख हिरेन की हत्या के मामले की भी जांच कर रही है। इस बीच, ठाणे की एक अदालत ने बुधवार को महाराष्ट्र आतंकवाद रोधी दस्ते को हिरन की मौत के मामले की जांच को रोकने और मामले से संबंधित रिकॉर्ड तत्काल एनआईए को सौंपने का निर्देश दिया है। हिरेन का शव पांच मार्च को ठाणे में एक नहर से मिला था।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 20 मार्च को इस मामले की जांच एनआईए को सौंप दी थी। लेकिन एटीएस की जांच भी जारी थी। एटीएस ने दो दिन पहले दावा किया था कि उसने हिरन की मौत की गुत्थी सुलझा ली है। वहीं, एएनआईए ने हिरेन की हत्या के मामले में महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) द्वारा गिरफ्तार किए गए दो आरोपियों को बुधवार शाम हिरासत में ले लिया।

एक अधिकारी ने बताया कि NIA ने दोनों निलंबित पुलिसकर्मी विनायक शिंदे और क्रिकेट सटोरिया नरेश गौड़ को हिरासत में लिया। 

अधिकारी ने कहा, ‘‘NIA के सात से आठ अधिकारी यहां एटीएस के दफ्तर में पहुंचे और दोनों आरोपियों को हिरासत में ले लिया।’’ एटीएस ने शिंदे और गौड़ को पिछले हफ्ते गिरफ्तार किया था। एक अधिकारी ने बताया कि इस बीच, मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) के डीसीपी पराग मनेरे शाम में NIA के कार्यालय में पहुंचे। बहरहाल, दक्षिण मुंबई में एजेंसी के कार्यालय में उनके जाने के कारणों के बारे में पता नहीं चल पाया है।

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