कोविड-19 से लड़ने का एकमात्र और बेहतर उपाय टीकाकरण ही है – एस के मालवीय

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प्रेस इनफार्मेशन ब्यूरो (पीआईबी), पटना तथा यूनिसेफ बिहार के संयुक्त तत्वाधान में आज सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार के बिहार स्थित विभिन्न मीडिया इकाइयों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए “कोविद 19 टीकाकरण रोलआउट: टीकाकरण के बाद संचार संकट और प्रतिकूल घटनाएं” ” विषय पर एक दिवसीय ऑनलाइन उन्मुखीकरण कार्यशाला-सह-वेबिनार का आयोजन किया गया।

       ऑनलाइन उन्मुखीकरण कार्यशाला-सह-वेबिनार की अध्यक्षता करते हुए पीआईबी के अपर महानिदेशक एसके मालवीय ने कहा कि कोविड-19 और टीकाकरण से जुड़ी हुई बहुत सारी भ्रांतियां हमारे समाज में विद्यमान हैं, जिसे दूर किया जाना बेहद जरूरी है। उन भ्रांतियों को दूर करने के कौन-कौन से कारगर उपाय व साधन हो सकते हैं, उसी के ऊपर एक विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराने एवं समझ बढ़ाने के लिए ही बिहार में कार्यरत मंत्रालय के विभिन्न मीडिया इकाइयों के अधिकारियों व कर्मचारियों के लिए ऑनलाइन ओरिएंटेशन वेबिनार का आयोजन किया गया है। उन्होंने कहा कि कोविड-19 का प्रसार एक बार पुनः देखने को मिल रहा है। ऐसे में हमें कोविड-19 से जुड़े नियमों का सख्ती से पालन करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि कोविड-19 से लड़ने का एकमात्र और बेहतर उपाय टीकाकरण ही है।

उन्मुखीकरण कार्यशाला-सह-वेबिनार में अतिथि वक्ता के रूप में शामिल पीआईबी, नई दिल्ली एवं केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की अपर महानिदेशक मनीषा वर्मा ने कहा कि कोविड-19 से जुड़ी किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए हमें विश्वसनीय स्रोतों, जैसे पीआईबी, स्वास्थ्य मंत्रालय, माई गोव, राज्य सरकार की वेबसाइटों आदि को देखना चाहिए। जब तक हम लोग स्वयं सही सूचनाएं विश्वसनीय स्रोतों से नहीं प्राप्त करेंगे, तब तक हम आमजनों को सही सूचनाएं मुहैया नहीं करा सकते हैं।

       वेबिनार में अतिथि वक्ता के रूप में शामिल राज्य प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉक्टर एनके सिन्हा ने कहा कि टीकाकरण के मामले में मौजूदा आंकड़े हमें यह स्पष्ट तौर पर बताते हैं कि कोविड-19 का टीका पूरी तरह सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि अभी तक बिहार में करीब 22 लाख 45 हज़ार लोगों को टीका दिया गया है। इसमें से करीब 18 लाख लोगों को पहला डोज तथा चार लाख लोगों को दूसरा डोज दिया जा चुका है। इसमें से केवल 128 केस ऐसे हैं जिसमें टीका लेने के बाद लोगों पर प्रतिकूल प्रभाव देखने को मिला है। हालांकि इसमें से भी अधिकांश लोग टीका लेने के कुछ घंटों के ऑब्जरवेशन के बाद ही अपने घर चले गए और कुछ अगले दिन स्वस्थ होकर लौट गए। उन्होंने कहा कि टीकाकरण ही कोविड-19 से एकमात्र बचाव है।

       वेबिनार में अतिथि वक्ता के रूप में शामिल आईजीआईएमएस, पटना के डॉक्टर अमित कुमार ने पीपीटी के माध्यम से AEFI (Adverse Events Following Immunization) के बारे में विस्तार पूर्वक चर्चा करते हुए कहा कि टीकाकरण के बाद दिखने वाले प्रतिकूल प्रभाव को हम तीन खंडों Minor, Severe और Serious में बांटकर बेहतर तरीके से अध्ययन कर सकते हैं। भारत में कोविड-19 के टीकाकरण के बाद दिखने वाले प्रतिकूल प्रभाव नगण्य के बराबर हैं। ये टीकें पूरी तरह सुरक्षित हैं।

       वेबिनार में अतिथि वक्ताओं के रूप में यूनिसेफ, बिहार की संचार विशेषज्ञ निपुण गुप्ता, यूनिसेफ इंडिया, नई दिल्ली की संचार अधिकारी सोनिया सरकार एवं शीना शर्मा शामिल थीं।

       उन्मुखीकरण कार्यशाला-सह-वेबिनार का संचालन करते हुए पीआईबी पटना के सहायक निदेशक संजय कुमार ने कहा कि आज पूरा विश्व वैश्विक महामारी कोरोना से जंग लड़ रहा हैं। भारत ने मेक इन इंडिया के बल पर कोरोना के खिलाफ लड़ाई में एक विशिष्ट उपलब्धि हासिल कर विश्व मे परचम लहराया है। उन्होंने कहा कि अब तक देश में लोगों को दिए गए कोरोना वैक्सीन डोज की कुल संख्या 5 करोड़ से अधिक हो गई है।

       उन्मुखीकरण कार्यशाला-सह-वेबिनार में का धन्यवाद ज्ञापन फील्ड आउटरीच ब्यूरो, छपरा के क्षेत्रीय प्रचार अधिकारी पवन कुमार सिन्हा ने किया। वेबिनार में आरओबी, पटना के  निदेशक विजय कुमार; पीआईबी, पटना के निदेशक दिनेश कुमार सहित सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के विभिन्न मीडिया इकाइयों के अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल थे।

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