पटना: “सही पोषण-स्वस्थ जीवन” विषय पर वेबीनार का किया गया आयोजन

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सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार के फील्ड आउटरीच ब्यूरो, सीतामढ़ी द्वारा आज “सही पोषण-स्वस्थ जीवन” विषय पर वेबीनार का आयोजन किया गया।

वेबीनार में अतिथि वक्ता के रूप में शामिल राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय पटना के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ रमन रंजन ने कहा कि जब हम पोषण की बात करते हैं तो इसका अर्थ केवल फल, साग-सब्जियों आदि के सेवन से नहीं है, बल्कि आयुर्वेद में पोषण का अर्थ इससे कहीं आगे की बात है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद में जीवन के तीन अति महत्वपूर्ण बातों का वर्णन किया गया है-आहार, निद्रा एवं आनंद। इसी पर आयुर्वेद की पूरी पोषण प्रणाली आधारित है। उन्होंने कहा कि मनुष्य का शरीर पंचमहाभूत से बना है और इसी के अनुरूप पोषण प्रणाली की चर्चा आयुर्वेद में की गई है। आयुर्वेद में स्वस्थ जीवन के लिए 12 भागों में आहार को बांटा गया है और हर भाग में एक सर्वश्रेष्ठ आहार को इंगित किया गया है जैसे शुकदान में चावल को श्रेष्ठ माना गया है। उन्होंने कहा कि पोषक तत्वों की अधिकता के मामले में सहजन सबसे बेहतर है। कुपोषण को दूर भगाने में सहजन बेहद लाभदायक है। उन्होंने कहा कि एक अध्ययन के मुताबिक बासी भात दुनिया का सबसे पौष्टिक आहार है। बासी भात छत्तीसगढ़ में लोगों का आम नाश्ता भी है।

 वेबीनार में अतिथि वक्ता के रूप में शामिल सीतामढ़ी की जिला प्रोग्राम पदाधिकारी चांदनी सिंह ने कहा कि सीतामढ़ी में 16 से 30 मार्च तक पोषण पखवाड़ा का आयोजन किया गया है। इस पोषण पखवाड़े में पोषण के कुल 5 सूत्रों पर फोकस किया गया है। उन्होंने कहा कि जिले में स्थानीय स्तर पर सब्जियों की पैदावार पर फोकस किया जा रहा है। जिले में एनीमिया के स्तर में प्रतिवर्ष 3% की कमी करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने कहा कि सहजन के पत्तों से पौष्टिक आहार (पाउडर) का निर्माण किया जा रहा है।

वेबीनार में अतिथि वक्ता के रूप में शामिल पोषण अभियान, सीतामढ़ी की जिला समन्वयक रूपम कुमारी ने कहा कि पोषण पखवाड़े में पोषण के 5 सूत्रों पर फोकस किया गया है और पूरा पोषण कार्यक्रम इन्हीं सूत्रों पर आधारित है। उन्होंने कहा कि प्रथम के पहले सुनहरे हजार दिन, एनीमिया को खत्म करना, डायरिया को समाप्त करना, लोगों में व्यवहार परिवर्तन करना और पौष्टिक आहार के सेवन को पोषण के पांच सूत्रों में मुख्य रूप से शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि सीतामढ़ी जिले में करीब 70% महिलाएं व किशोरियां एनीमिया से ग्रस्त हैं। सीतामढ़ी को एनीमिया मुक्त जिला बनाना पोषण पखवाड़े का एक महत्वपूर्ण बिंदु है।

वेबीनार में अतिथि वक्ता के रूप में शामिल पीरामल फाउंडेशन, सीतामढ़ी के जिला परिवर्तन प्रबंधक रवि रंजन कुमार ने बताया कि सीतामढ़ी जिले में एनीमिया का ग्राफ थोड़ा बड़ा हुआ है। हालांकि, इसमें गर्भवती महिलाओं में एनीमिया 67% से घटकर 59% हो गया है, जो कि एक अच्छा संकेत है। उन्होंने कहा कि लोगों को किचन गार्डन को बढ़ावा देने की आवश्यकता है।

वेबीनार में अतिथि वक्ता के रूप में यूनिसेफ पटना के पोषण सलाहकार अनूप कुमार झा भी ने अपनी बात रखते हुए कहा कि लोगों तक पोषण के संदेश को सहज भाषा व कम शब्दों में पहुंचाया जाना चाहिए, जिसे जनता पर आसानी और तेजी से प्रभाव पर सके।

 वेबिनार का संचालन एफओबी, सीतामढ़ी के क्षेत्रीय प्रचार अधिकारी जावेद अख्तर अंसारी ने किया। धन्यवाद ज्ञापन एफओबी, सीतामढ़ी के क्षेत्रीय प्रचार सहायक ग्यास अख़्तर ने किया। वेबिनार में आरओबी, पटना के निदेशक विजय कुमार; पीआईबी, पटना के निदेशक दिनेश कुमार, सहायक निदेशक संजय कुमार, आरओबी के सहायक निदेशक एन एन झा, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के विभिन्न मीडिया इकाइयों के अधिकारी एवं कर्मचारी सहित आमजन शामिल थे।

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