एनआईए ने बताया, अंबानी के घर के बाहर सचिन वाझे के ड्राइवर ने खड़ी की थी विस्फोटक से भरी स्कॉर्पियो गाड़ी

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कारोबारी मुकेश अंबानी के घर के बाहर विस्फोटक से भरी स्कॉर्पियो गाड़ी खड़ी करने के मामले में रोज नए खुलासे हो रहे हैं। इस केस की जांच में जुटी एनआईए ने अब बताया है कि 25 फरवरी को मुकेश अंबानी के घर के बाहर जिलेटिन के छड़ों से भरी गाड़ी गिरफ्तार हो चुके पुलिस अधिकारी सचिन वाझे के निजी ड्राइवर ने रखी थी। एनआईए ने यह भी बताया कि स्कॉर्पियो के पीछे दिखी इनोवा गाड़ी खुद वाझे चला रहे थे।

खबरों के मुताबिक, स्कॉर्पियो की कहानी 17 फरवरी को ही शुरू हो गई थी जब इसके मालिक मनसुख हिरेन ने गाड़ी को मुंलुंड-एरोली रोड पर पार्क कर दिया था और दावा किया था कि गाड़ी में तकनीकी खराबी आ गई है। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, हिरेन ने इसी दिन गाड़ी की चाबियां सिटी पुलिस हेडक्वॉर्टर्स जाकर वाझे को दी थी। इसके अगले दिन वाझे के निजी ड्राइवर ने गाड़ी वहां से ली और उसे चलाकर ठाणे ले गया। इसके बाद ड्राइवर ने गाड़ी को साकेत हाउसिंग सोसायटी में पार्क किया, जहां वाझे रहता था।

सूत्रों के मुताबिक, 19 फरवरी को ड्राइवर यह गाड़ी क्रॉफर्ड मार्केट में स्थित पुलिस हेडक्वॉर्टर ले गया और वहीं पार्क कर दी। गाड़ी वहीं खड़ी रही और फिर 21 फरवरी को ड्राइवर इस दोबारा वाझे की सोसायटी ले गया जहां गाड़ी 25 फरवरी की रात तक खड़ी रही। ड्राइवर यहां से गाड़ी दक्षिणी मुंबई ले गया और वहां अंबानी के घर के पास खड़ी कर दी।

एक अधिकारी के मुताबिक, ‘वाझे खुद स्कॉर्पियो के पीछे इनोवा गाड़ी चलाकर जा रहा था। एंटीलिया के पास गाड़ी छोड़ने के बाद ड्राइवर भी इनोवा में बैठा और दोनों वहां से चले गए। यह इनोवा थोड़ी देर में दूसरे नंबर प्लेट के साथ एंटीलिया के पास दिखी। इसके बाद कुर्ता-पायजामा पहने सचिन वाझे ने ही स्कॉर्पियो के पास जाकर धमकी भरी चिट्ठी वहां रखी।’

बता दें कि एंटीलिया के बाहर रखी विस्फोटक भरी गाड़ी और फिर गाड़ी के कथित मालिक मनसुख हिरेन की संदिग्ध हालत में मौत, दोनों ही मामलों की जांच एनआईए कर रही है। इस मामले में पुलिस ने सचिन वाझे को गिरफ्तार किया था। वह पहले जांच की कमान संभाल रहे थे और स्कॉर्पियो का इस्तेमाल करने के लिए उनका नाम सामने आया था। एनआईए का कहना है कि मामले में उनकी संलिप्तता सामने आई है।

कौन हैं सचिन वाझे?
49 साल के वाझे महाराष्ट्र के कोल्हापुर के रहने वाले हैं और वह 1990 में एक सब-इंस्पेक्टर के रूप में महाराष्ट्र पुलिस में भर्ती हुए थे। सबसे पहले उनकी पोस्टिंग नक्सल प्रभावित गढ़चिरौली में हुई थी और फिर ठाणे में तैनाती हुई। मुंबई पुलिस में आने के बाद वह एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के रूप में मशहूर हुए। वाझे ने अंडरवर्ल्ड के कई गैंगस्टर्स के एनकाउंटर में हिस्सा लिया। बताया जाता है कि उन्होंने 5 दर्जन से अधिक अपराधियों को इन मुठभेड़ों में मार गिराया। बताया जाता है कि वाझे टेक्नॉलजी की अच्छी जानकारी रखते हैं और उन्होंने कई साइबर क्राइम और आपराधिक केसों को भी उन्होंने सुलझाया था।

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