पटना: घोटालेबाज ड्रग इंस्पेक्टर को सरकार ने किया बर्खास्त, अधिकारी ने पूछा- छोटी मछली पर ही कार्रवाई क्यों

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साढ़े 12 करोड़ से अधिक के घोटाले के मामले में बिहार सरकार ने एक ड्रग इंस्पेक्टर को बर्खास्त कर दिया है. एमआरपी से अधिक और खपत से ज्यादा दवा खरीदने के मामले में यह कार्रवाई की गई है. सेवा से बर्खास्त इंस्पेक्टर विकास शिरोमणि ने कहा है कि वह सरकार के इस फैसले के खिलाफ कोर्ट जायेंगे. 12 करोड़ से अधिक के घोटाले के आरोप में मुजफ्फरपुर शहरी क्षेत्र के ड्रग इंस्पेक्टर विकास शिरोमणि को स्वास्थ्य मुख्यालय से तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया है. बिहार सरकार के संयुक्त सचिव राम ईश्वर ने इसको लेकर मुजफ्फरपुर के सिविल सर्जन को पत्र भेजा है. विकास शिरोमणि के खिलाफ पीएमसीएच में दवा खरीद में अनियमितता का आरोप लगा था. इसकी जांच 2013 से हो रही थी. जांच पूरी होने के बाद उन्हें बर्खास्त करने का निर्णय लिया गया है.

बिहार स्वास्थ्य विभाग की ओर जारी आदेश में कहा गया है कि पीएमसीएच में कार्यालय अधीक्षक, लेखापाल व सबंधित क्रय लिपिक ने आपूर्तिकर्ताओं से मिलकर एमआरपी से अधिक मूल्य पर दवा क्रय की. उपकरणों को काफी अधिक मूल्य पर क्रय किया गया. बिना आकलन किए जान बूझकर खपत से कई गुना अधिक मात्रा में दवा खरीद की गई. इससे सरकारी राशि 12,63,52,970 रुपये की गड़बड़ी सामने आई. जांच के क्रम में पाया गया कि तत्कालीन औषधि निरीक्षक विकास शिरोमणि ने मिलीभगत कर सरकारी राशि की गड़बड़ी की.

सेवा से बर्खास्त होने के बाद ड्रग इंस्पेक्टर विकास शिरोमणि ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2009-10 में केवल चार दिन ही उन्होंने पीएमसीएच का निरीक्षण किया था. वह पीएमसीएच में स्थायी कर्मचारी नहीं थे. चार दिनों की प्रतिनियुक्ति पर वहां गए थे, तब उनपर कार्रवाई हुई है, जबकि वहां के अधिकारी और कर्मचारी पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है. उन्होंने बताया कि इस मामले में हाईकोर्ट से कार्रवाई करने पर रोक लगी है, बावजूद विभाग ने कार्रवाई की है. उन्होंने कहा कि वह फिर कोर्ट की शरण में जाएंगे. 

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