बिहार: ब्लैक फंगस के 13 नए मरीज मिले, पटना में कुल मरीजों की संख्या हुई 32

0
50

बिहार में कोरोना के बाद ब्लैक फंगस (म्यूकोर माइकोसिस) पांव पसारने लगा है। रविवार को पटना में लक्षण वाले छह नए मरीज मिले। वहीं, भागलपुर में छह और भभुआ में भी एक मरीज में इसके लक्षण मिले हैं। इस तरह रविवार को राज्य में इसके 13 मरीज मिले हैं।

कोरोना मरीज और उनके परिजन इसकी दहशत से सहमे हुए हैं। स्वास्थ्य महकमा ने इससे निपटने की तैयारी शुरू कर दी है। आईजीआईएमएस, पटना एम्स, और पीएमसीएच में अलग वार्ड बनाए गए हैं। एम्स और पीएमसीएच में एक-एक, आईजीआईएमएस में तीन और पारस अस्पताल में लक्षण वाले एक मरीज रविवार को मिले हैं। इस तरह पटना के निजी और सरकारी अस्पतालों में ब्लैक फंगस वाले मरीज बढ़कर 32 हो गए हैं। वहीं, रविवार शाम आठ बजे तक पटना एम्स, आईजीआईएमएस, पीएमसीएच और अन्य निजी अस्पतालों में एक भी ब्लैक फंगस के मरीज की मौत की पुष्टि नहीं हुई है। 

आईजीआईएमएस में 30 बेड का अलग वार्ड  बनेगा
आईजीआईएमएस में सोमवार से 25 बेड की आईसीयू शुरू हो जाएगी। उसके चार दिनों बाद 25 बेड और बढ़ाए जाएंगे। इस तरह अस्पताल में कुल 50 बेड की आईसीयू ब्लैक फंगस के मरीजों के लिए होगी। इसके अलावा 30 से 35 बेड का अलग वार्ड होगा। अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मनीष मंडल ने बताया कि रविवार को ब्लैक फंगस के लक्षण वाले तीन केस आए हैं। सोमवार को उनकी जांच होगी। पहले से संस्थान में छह मरीज भर्ती हैं।

एम्स में 10 बेड बढ़ाए जाएंगे
पीएमसीएच में पांच बेड का अलग से वार्ड  सोमवार से शुरू हो जाएगा। वहीं, एम्स में दस बेड और बढ़ाए जाएंगे। अब वहां कुल बेड 30 हो जाएंगे।

उर्दू के प्रसिद्ध साहित्यकार अब्दुस सत्तार की मौत
मुजफ्फरपुर निवासी उर्दू के प्रसिद्ध साहित्यकार अब्दुस सत्तार की मौत शनिवार को ब्लैक फंगस से हो गई। उनमें इस बीमारी के लक्षण मिले थे। हालांकि जांच नहीं हो पाई थी। आईजीआईएमएस में उन्हें भर्ती कराने लाया गया। हालांकि बिना रिपोर्ट उन्हें भर्ती नहीं किया गया और एंबुलेंस में ही उन्होंने दम तोड़ दिया।

ब्लैक फंगस के छह हजार वायल इंजेक्शन भेजे गए
बिहार के विभिन्न अस्पतालों में ब्लैक फंगस के नए मामले की जानकारी के बाद स्वास्थ्य विभाग ने इसके इलाज के लिए छह हजार वॉयल इंजेक्शन उपलब्ध कराए हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अब तक राज्य में ब्लैक फंगस के लगभग दो दर्जन मामले सामने आए हैं। ऐसे मरीज आईजीआईएमएस और एम्स के अलावा निजी संस्थानों में भी इलाजरत हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.