हजारों करोड़ के खाद घोटाले में गिरफ्तार किये गये हैं RJD सांसद अमरेंद्रधारी सिंह, जाने उनका इतिहास

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आखिर क्या है वह खाद घोटाला जिसमें आज प्रवर्तन निदेशालय यानि ED ने राजद के राज्यसभा सांसद अमरेंद्रधारी सिंह को गिरफ्तार कर लिया है. अमरेंद्र धारी सिंह की गिरफ्तारी के बाद खाद घोटाले की बात तो आ रही है लेकिन आखिरकार ये घोटाला है क्या? इसे कब अंजाम दिया गया? कितने पैसे की हेराफेरी हुई? आपके जेहन में ढेर सारे सवाल उठ रहे होंगे. हम आपको विस्तार से उस घोटाले की जानकारी दे रहे हैं.

कई हजार करोड़ रूपये का है खाद सब्सिडी घोटाला
जिस घोटाले में गुरूवार को ईडी ने अमरेंद्र धारी सिंह को गिरफ्तार कर लिया है, वह कई हजार करोड़ रूपये का घोटाला है. देश की सबसे बड़ी सहकारी संस्था इफको औऱ भारत सरकार की कंपनी इंडियन पोटाश लिमिटेड ने कई निजी कंपनियों के साथ मिलकर इस घोटाले को अंजाम दिया. सारा खेल सरकार से किसानों को खाद यानि उर्वरक पर मिलने वाली सब्सिडी की बंदरबांट करने का है. 8 सालों तक लगातार हुए इस खेल में कई हजार करोड़ रूपये की लूट हुई. मामले की जांच सीबीआई कर रही थी. लेकिन बाद में जब इस घोटाले के आरोपियों की अकूत संपत्ति का पता चला गया तो ईडी भी मैदान में उतरी. ईडी ने ही आज अमरेंद्र धारी सिंह को गिरफ्तार कर लिया.

2007 से 2014 तक चला घोटाला
पहले हम आपको समझाते हैं कि घोटाला हुआ कैसे. दरअसल केंद्र सरकार किसानों को दी जाने वाली यूरिया, पोटाश जैसे उर्वरक पर मोटी सब्सिडी देती है. किसानों के लिए यूरिया, पोटाश जैसे खाद का दाम फिक्स कर दिया जाता है. खाद बनाने या आपूर्ति करने वाली कंपनियां सरकार को खाद का लागत मूल्य बताती है. किसानों के लिए तय किये दाम के अलावा लागत मूल्य का जो डिफरेंस होता है उसे केंद्र सरकार कंपनियों को सब्सिडी के तौर पर देती है. उदाहरण के लिए अगर सरकार ने तय कर रखा है कि किसानों को यूरिया 100 रूपये प्रति बोरी पर ही किसानों को बेचनी है. वहीं खाद आपूर्ति करने वाली संस्था इफको ये कहती है कि उसका यूरिया खाद की एक बोरी पर लागत डेढ़ सौ रूपये है तो सरकार पचास रूपये की सब्सिडी इफको को दे देगी. सब्सिडी के इसी खेल में कई हजार करोड रूपये का घोटाला हुआ.

कैसे हुआ घोटाला
खाद सब्सिडी घोटाले की जांच कर रही सीबीआई के मुताबिक सहकारी संस्था इफको और इंडियन पोटाश लिमिटेड ने 2007 से 2014 के बीच हजारों करोड के इस घोटाले को अंजाम दिया. दोनों कंपनियों ने देश औऱ विदेश की कुछ खाद औऱ कच्चा माल आपूर्ति करने वाली कंपनियों के साथ सांठ-गांठ की. उनसे बाजार भाव से काफी मंहगे दर पर यूरिया, पोटाश से लेकर अन्य उर्वरक खाद औऱ कच्चा माल की सेटिंग की गयी. कागजों में ये दिखाया गया कि काफी ऊंचे दाम पर विदेशों से खाद औऱ कच्चा माल मंगवाया गया है. लेकिन किसानों को तो फिक्स दाम पर ही खाद देना था. बाकी पैसा तो सरकार से सब्सिडी के तौर पर लेना था. सेटिंग के जरिये विदेशों से ऊंचे दाम पर कच्चा माल मंगवा कर सरकार से कई हजार करोड रूपये की गलत सब्सिडी ले ली गयी.

सीबीआई के मुताबिक करार इफको औऱ इंडियन पोटाश के अधिकारियों ने सप्लायर कंपनियों से करार किया कि वे ऊंची दर पर जो उर्वरक खऱीदेंगे उसके अवैध मुनाफे में हिस्सेदारी होगी. इफको औऱ इंडियन पोटाश के अधिकारियों को अवैध कमाई का बडा हिस्सा मिलेगा. लिहाजा इफको औऱ इंडियन पोटाश के अधिकारियों के साथ साथ विदेशों से खाद आपूर्ति करने वाली कंपनियां मालामाल हो गयीं.

इफको औऱ इंडियन पोटाश के MD ने लिया 685 करोड रूपये का कमीशन
खाद आपूर्ति घोटाले में पिछले महीने ही सीबीआई ने इफको के एमडी रहे यूएस अवस्थी और इंडियन पोटाश के एमडी रहे परविंदर सिंह गहलोत के 12 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की थी. सीबीआई की छापेमारी में पता चला कि खाद घोटाले में सिर्फ इन दोनों अधिकारियों ने 685 करोड़ रूपये का कमीशन लिया. दोनों अधिकारियों के बेटों के नाम पर कमीशन का पेमेंट हुआ. फर्जी कागजों के सहारे इस अवैध लेन देन को वैध बनाने की कोशिश भी गयी थी लेकिन सीबीआई की प्रारंभिक जाचं में ही सारा मामला क्लीयर हो गया.

अमरेंद्रधारी सिंह क्यों फंस गये
दरअसल सीबीआई ने पिछले महीने जो छापेमारी की थी उसमें बडे पैमाने पर अवैध कमाई औऱ उससे अवैध संपत्ति को अर्जित करने की बात सामने आयी थी. इसमें उन इफको औऱ इंडिशन पोटाश के अलावा उन कंपनियों के भी नाम आये जो इस घोटाले में शामिल थे. लिहाजा ईडी को भी इस मामले की जांच में शामिल किया गया. प्रवर्तन निदेशालय सूत्रों के मुताबिक खाद सब्सिडी घोटाले में ज्योति ट्रेडिंग नाम की एक कंपनी का सबसे बडी भूमिका सामने आय़ी. खाद सब्सिडी घोटाले में मोटा पैसा इसी कंपनी ने वारे-न्यारे किये थे.

ईडी सूत्रों के मुताबिक अमरेंद्र धारी सिंह इस कंपनी के वाइस प्रेसिडेंट हुआ करता था. हालांकि कागज पर कंपनी के डायरेक्टर दूसरे लोग थे लेकिन सारा कामकाज अमरेंद्र धारी सिंह के हाथों में ही था. ईडी की जांच पड़ताल में पता चला कि खाद सब्सिडी घोटाले का मोटा पैसा अमरेंद्र धारी सिंह के पास आय़ा औऱ उस पैसे से उन्होंने अकूत संपत्ति अर्जित की. ईडी ने देश के कम से काम पांच राज्यों में अमरेंद्र धारी सिंह की संपत्ति का विवरण जुटाया. उससे साबित हुआ कि वैध कमाई से कई गुणा ज्यादा पैसे की संपत्ति अर्जित की गयी. इसके बाद ही अमरेंद्र धारी सिंह के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉंड्रिंग एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया. इस मामले में ईडी को ठोस सबूत मिले तो आज सुबह अमरेंद्र धारी सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया.

आइए आपको बताते हैं कौन हैं अमरेंद्र धारी सिंह

चुनावी हलफनामे के मुताबिक एडी दिल्ली के डिफेंस कॉलोनी में रहते हैं और किरोड़ी मल कॉलेज से ग्रैजुएट हैं। वह अविवाहित हैं और करीब 237 करोड़ की चल-अचल संपत्ति के मालिक हैं। राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा और मुंबई में जमीन, अपार्टमेंट और दफ्तर हैं। हलफनामें मे उन्होंने यह भी बताया था कि 2019-20 में उन्होने करीब 24 करोड़ रुपए इनकम टैक्स दिया था।

एडी के करीबी बताते हैं कि वह फर्टिलाइजर के कारोबार से जुड़े हुए हैं। 90 के दशक की शुरुआत में दिल्ली के एक प्रभावशाली नौकरशाह ने उन्होंने खादों के आयात-निर्यात का लाइसेंस दिलवाने में मदद की थी। तब से ही वह निजी कंपनियों के लिए खाद का आयात करते हैं और खाड़ी के देशों से लेकर रूस तक में निर्यात भी करते हैं। 

सूत्रों ने बताया कि भूमिहार समाज के अमरेंद्र धारी पटना जिले के विक्रम के रहने वाले हैं। 61 साल के हो चुके अमरेंद्रधारी सिंह का राजधानी के पाटलिपुत्र कॉलोनी में अपना मकान है। पटना के पालीगंज के अंइखन गांव में उनके पास एक हजार बीघा जमीन है और रियल एस्टेट में भी डील करते हैं। 

एडी का कनेक्शन
सीबीआई के मुताबिक कमीशन के पैसे अमेरिका में रहने वाले अवस्थी और गहलोत के बेटों और अन्य आरोपियों के जरिए भारत से बाहर भेजे गए। प्राथमिकी के मुताबिक सक्सेना और उसके सहयोगियों ने अपने समूह की कंपनियों के खाते और जैन, गहलोत के बेटे विवेक, अवस्थी के बेटे अमोल और एडी सिंह के निजी खातों में 60 रुपए प्रति डॉलर की लेन-देन दर पर करीब 685 करोड़ रुपए (11.43 करोड़ डॉलर) का अवैध कमीशन हासिल किया। प्राथमिकी में कहा गया कि जानकारी मिली है कि रिश्वत के पैसे यू एस अवस्थी के बेटों अमोल अवस्थी और अनुपम अवस्थी और परविंदर सिंह गहलोत के बेटे विवेक गहलोत को मिले। तीनों अमेरिका में रहने वाले प्रवासी भारतीय हैं। सीबीआई ने यह भी आरोप लगाया है कि अमोल अवस्थी और अनुपम अवस्थी और विवेक गहलोत को उनके स्वामित्व वाली कंपनियों के खातों में या नकदी के रुप में जैन के रेयर अर्थ ग्रुप के जरिए करीब 8.02 करोड़ डॉलर (करीब 481 करोड़ रुपए) और बाकी 3.41 करोड़ डॉलर (करीब 204 करोड़ रुपये ) मिले।

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