पटना: बाबा रामदेव की मुश्किलें बढ़ीं, आईएमए ने दर्ज करवाया केस

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एलोपैथी के खिलाफ बोलने और डॉक्टरों का मजाक उड़ाने से संबंधित वीडियो वायरल करने के आरोप में बाबा रामदेव पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने पटना में केस दर्ज करवाया है। राजधानी के पत्रकार नगर थाने में केस नंबर 317/21 के तहत बाबा रामदेव पर 186/188/269/270/336/420/499/504/505 आईपीसी, 51, 52, 54 डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट 2005 और 3 एपेडेमिक डिजीज एक्ट के तहत एफआईआर की गई है। 

केस बिहार शाखा के मानद राज्य सचिव डॉ. सुनील कुमार के बयान पर दर्ज किया गया है। दर्ज एफआईआर में डॉ. सुनील का आरोप है कि कोरोना की दूसरी लहर के दौरान बाबा रामदेव ने आधुनिक चिकित्सा विज्ञान और पद्धति के प्रति आम लोगों के मन में भ्रम पैदा किया। उसके प्रति अविश्वास बढ़ाया, जिससे डॉक्टरों की भावनाएं आहत हुईं। आरोप है कि बाबा के कारण काफी संख्या में लोगों की कोरोना से मौत हुई। साथ ही कोविड टीकाकरण अभियान पर भी इसका असर पड़ा। 
एफआईआर में आरोप है कि आयुष मंत्रालय ने रामदेव बाबा को कोरोनिल दवा का विज्ञापन बंद करने को कहा था। इसके बावजूद बाबा ने कोरोनिल का प्रचार-प्रसार किया। अब भी वे उसकी बिक्री कर रहे हैं। जब पूरा बिहार और देश कोविड की लहर से जूझ रहा था तब बाबा रामदेव ने आधुनिक चिकित्सा विज्ञान ऑक्सीजन थेरेपी, सरकार द्वारा स्वीकृत दवाओं को लेकर जानबूझकर गलत बातें कहीं। उन्होंने कोविड मरीज को इन सभी तरीकों से इलाज न करवाने की सलाह दी।

रामदेव के वीडियो पर आईएमए नाराज
दर्ज एफआईआर में बाबा रामदेव के एक कथित वीडियो का जिक्र है जिसमें आरोप है कि उन्होंने एलोपैथी को दिवालिया विज्ञान और उसके बारे अन्य आपत्तिजनक बातें कही हैं। आरोप यह भी है कि बाबा के बयानों के कारण मरीज देर से अस्पतालों में पहुंचे और उनकी मौत हो गयी। आईएमए का आरोप है कि बाबा का एक और वीडियो सामने आया, जिसमें उन्होंने डॉक्टर बनो तो रामदेव जैसा बनो। टर्र, ..टर्र, ..टर्र डॉक्टर वाले बयान का जिक्र भी एफआईआर में है। 

राज्य की सभी शाखाओं से केस करने को कहा
आईएमए ने राज्य की सभी शाखाओं को इसी प्रकार का एफआईआर संबंधित थाने में करने का आग्रह किया है। वहीं थाना द्वारा एफआईआर नहीं लिये जाने की स्थिति में ई. एफआईआर करने एवं आवश्यकता पड़ने पर कोर्ट के माध्यम से केस करने का अनुरोध किया। वहीं, आईएमए, बिहार के वरिष्ठ पदाधिकारियों की मंगलवार को आईएमए भवन में आयोजित बैठक में मध्यप्रदेश के आंदोलनरत जूनियर डॉक्टरों की मांगों का समर्थन किया गया। 

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