मां के पैर पकड़ कर रो पड़े चिराग पासवान, कहा- मम्मी का आशीर्वाद साथ है अब ये महाभारत जरूर जीत लूंगा

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चाचा पशुपति कुमार पारस के धोखे से व्यथित चिराग पासवान आज अपनी मां के पैर पकड़ कर रो पड़े. चिराग पासवान ने कहा कि अपने ने धोखा दे दिया लेकिन मां का आशीर्वाद साथ है, मुझे कोई शक नहीं है कि मैं ये महाभारत जीतूंगा. चिराग ने आज राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में अपनी आशीर्वाद यात्रा की योजना तय करने के बाद मां का आशीर्वाद लिया और कहा कि अब लड़ाई जीत कर ही वापस लौटूंगा.

भावुक हुए चिराग
दरअसल चिराग पासवान ने आज अपनी पार्टी की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक बुलायी थी. उसमें 5 जुलाई से हाजीपुर से आशीर्वाद यात्रा शुरू करने का फैसला लिया गया. बैठक के बाद चिराग पासवान की मां रीना पासवान उनसे मिलने पहुंची. अपनी मां के सामने चिराग पासवान भावुक हो उठे. वे अपनी मां के पैर पकड़ कर फफक कर रो पड़े.

चिराग ने कहा कि उनके सामने बेहद मुश्किल समय है. पहले पिता जी नहीं रहे फिर परिवार के लोगों ने साथ छोड़ दिया. ऐसे में उन्हें बिहार के लोगों के आशीर्वाद की जरूरत है. लेकिन सबसे ज्यादा उन्हें अपनी मां के आशीर्वाद की जरूरत है जो ढ़ाल की तरह उनके साथ बना रहा. चिराग ने कहा कि मां के आशीर्वाद से ही वे आगे भी ल़ड़ाई लड़ेंगे.

महाभारत जैसी लडाई लड़ रहा हूं
चिराग ने कहा कि वे महाभारत जैसी लडाई लड़ रहे हैं. जिनसे लडना है वे भी अपने ही हैं. ये मुझे दुखी जरूर कर रहा है लेकिन इस युद्ध में मां का आशीर्वाद से ही वे जीत हासिल करेंगे. चिराग ने कहा कि पापा का आशीर्वाद उनके साथ है. 

पारस-प्रिंस से कोई कटुता नहीं
चिराग पासवान ने कहा कि अपने चाचा औऱ चचेरे भाई से उनकी कोई कटुता नहीं है. वे धर्मयुद्ध लड रहे हैं. जो चाचा औऱ भाई ने किया ये उनकी सोंच थी. लेकिन मुझे मम्मी औऱ पापा ने जो संस्कार दिये मैं उस पर कायम रहूंगा. जिन्होंने बुरा किया उनसे बगैर कोई कटुता रखे मैं जनता के सामने अपनी बातों को रखूंगा. 

चिराग पासवान ने कहा कि उन्हें इस बात की तसल्ली है कि पूरी पार्टी उनके परिवार की तरह साथ ख़ड़ी है. आज भी राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में सारे लोगों ने कहा कि वे परिवार की तरह हर स्थिति में साथ देंगे. जब इतने लोगों का साथ है तो मुझे किसी बात का डर नहीं है. चिराग ने कहा कि जीत मेरी होगी इसमें कोई शक नहीं है.

चिराग ने कहा कि उन्होंने अंत अंत तक कोशिश की. मैं तो उस दिन चाचा के घर गया जब उन्होंने पार्टी तोड़ने का एलान कर दिया था. लोकसभा अध्यक्ष से मिलकर चिट्ठी सौंप दिया था. मुझे पार्टी से निकालने का एलान कर दिया था. मैं बीमार था फिर भी चाचा के घर गया. वहां घंटों खड़ा रहा. मुझे एंटीबायोटिक चल रहा था लेकिन मैं दवा छोड कर चाचा के घर गया था. उनसे बात करने गया था. मुझे बहुत तकलीफ हुई थी जब मेरे लिए वो दरवाजा बंद कर दिया गया था जहां मेरा बचपन गुजरा. जहां मैं खेला, पला बढ़ा. उस दरवाजे के बंद होने पर बहुत तकलीफ हुई थी लेकिन अब कोई दिक्कत नहीं है.

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