पटना: नई-नई बीमारियां हो रही कोरोना से बचनेवालों को, अस्पतालों में 30% पोस्ट-कोविड के मरीज

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कोरोना को हराने वाले अब नई नई बीमारियों के इलाज से हार रहे हैं। अजीबोगरीब बीमारियां लोगों को सता रही हैं। बीमारियां भी ऐसी हैं जो डॉक्टर को भी परेशान कर रही हैं। जबड़े का सूख जाना और खून का फ्लो कम हो जाना आम हो गया है। बिना किसी कारण सर में दर्द तो अलग ही परेशान कर रहा है। कोरोना की दूसरी लहर में जो बीमारियां आई हैं, वे नई और अलग तरह की हैं। इस कारण अब पटना AIIMS में पोस्ट कोविड बीमारियों पर काम हो रहा

पटना AIIMS में चल रहा पोस्ट कोविड पर अध्ययन

यहां के एम्स में ट्रॉमा एंड इमरजेंसी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ अनिल कुमार इन बीमारियों पर विशेष रूप से अध्ययन कर रहे हैं। डॉ अनिल का कहना है कि सेकेंड वेव में जो भी पोस्ट कोविड के मामले आ रहे हें वह पहली लहर से काफी अलग हैं। इस बार कई नई तरह की परेशानी देखने को मिल रही है। कुछ मामले तो पहली लहर में थे लेकिन कई ऐसे मामले हैं जो इस बार एक दम से नए हैं। इसमें सबसे बड़ा मामला धमनियों तक खून का नहीं पहुंचना है।

धमनियों तक खून नहीं पहुंचना कर रहा परेशान

पटना AIIMS के ट्रामा एंड इमरजेंसी के HOD डॉ. अनिल का कहना है कि कोरोना की दूसरी लहर के बाद ऐसे मामले अधिक आ रहे हैं जिसमें धमनियों तक खून नहीं पहुंचने की समस्या है। इस समस्या के कारण पोस्ट कोविड के मरीजों में हाथ और पैर की उंगलियों में आखिरी प्वाइंट पर खून नहीं पहुंच रहा है जिससे समस्या हो रही है। हाथ पैर की उंगलियों का सही से काम नहीं करना बड़ी समस्या है। ऐसे मरीज भी आ रहे हें जिनको खून में थक्का की समस्या है।

AIIMS के अध्ययन में ऐसे मामले अधिक

  • कोरोना के बाद लंबे समय तक अधिक कमजोरी की शिकायत
  • कफ के साथ खांसी में काफी दिनों तक सुधार नहीं
  • कोरोना को मात देने के बाद भी भूख नहीं लगना
  • कोरोना के बाद लंबे समय तक चिड़चिड़ा हो जाना
  • मानसिक रूप से कमजोरी होना, मानसिक परेशानी
  • कोरोना के बाद सुस्ती बने रहने की समस्या नहीं जा रही
  • हाथ पैर की उंगलियों का सुन्न होना
  • कोरोना के कारण खून में थक्का बन जाना
  • धमनियों में खून का सही से नहीं पहुंचना
  • शरीर में खून का संचार कम होते जाना

पोस्ट कोविड के इलाज पर मंथन

पोस्ट कोविड के मामलों को लेकर अध्ययन किया जा रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि पोस्ट कोविड के मामले में कई ऐसी बीमारियां सामने आ रही हैं जिसमें मरीजों को इलाज के लिए काफी भटकना पड़ता है। अब पटना AIIMS से लेकर अन्य बड़े अस्पतालों में इस पर काम किया जा रहा है। मेदांता ने भी पोस्ट कोविड के मरीजों की समस्या को लेकर कई विभागों के डॉक्टरों को मिलाकर एक टीम बनाई है।

ऐसे मामले जिसमें बीमारी की पकड़ मुश्किल

पटना के कंकड़बाग की रहने वाली 32 साल की सुनीता का पूरा परिवार कोविड से लड़ाई लड़ा। सब लोग ठीक हो गए 23 जून काे सुनीता की रिपोर्ट निगेटिव आई थी। ठीक एक माह बाद उन्हें परेशानी शुरु हुई। सिर में तेज दर्द होने लगा। इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान में इलाज कराया। ब्लैक फंगस से लेकर सब जांच कराई गई लेकिन बीमारी पकड़ में नहीं आई। डॉक्टर इसे पोस्ट कोविड का मामला बता कर ठीक होने में समय लगने की बात कह रहे हैं। फिलहाल, सुनीता का इलाज अब पटना AIIMS में चल रहा है। राजीवनगर के राकेश झा भी पोस्ट कोविड से परेशान हैं। हाथों की उंगलियों का आखिरी प्वाइंट कोई काम ही नहीं कर रहा है। हर समय झनझनाहट होती है जिससे वह कोई काम नहीं कर पाते हैं। PMCH और AIIMS के साथ IGIMS में इलाज करा चुके हैं। उनका कहना है कि डॉक्टर पोस्ट कोविड का मामला बता रहे हैं।

पटना AIIMS में ढूंढा जा रहा रास्ता

पटना AIIMS के ट्रामा इमरजेंसी में इलाज का रास्ता ढूंढा जा रहा है। विभाग के HOD डॉ. अनिल कुमार का कहना है कि वह इस पर अध्ययन कर रहे हैं। पोस्ट कोविड में ऐसी बीमारियां आ रही हैं जो लोगों को परेशान कर रही हैं। कई ऐसे मामले है जिसमें बीमारी डिटेक्ट करने में समस्या हो रही है। पोस्ट कोविड पर मंथन किया जा रहा है। ऐसे मरीजों का इलाज किया जा रहा है जो पोस्ट कोविड से पीड़ित हैं और जटिल रोग है। डॉ. अनिल का कहना है कि पोस्ट कोविड में अजीबोगरीब लक्षण हैं इस पर अध्ययन कर बीमारी पर काबू पाया जा रहा है।

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