सुपौल: बिना वैक्सीन लगवाए ही मिल गया सर्टिफिकेट, छात्रा ने डायरेक्ट DM को लगाया फोन तो मच गया हड़कंप

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इन दिनों कोरोना वैक्सीनेशन अभियान में लगातार लापरवाही की ख़बरें सामने आ रही हैं. ऐसे मामले सामने आ रहे है, जहां पर बिना वैक्सीन लिए ही लोगों को सर्टिफिकेट दिए जा रहा है. इसको लेकर लोगों को परेशानी का सामना भी करना पड़ रहा है. ऐसा ही एक मामला के सुपौल जिले से सामने आया है. यहां बिना वैक्सीन लगवाए ही एक छात्रा को स्वास्थ्य विभाग ने सर्टिफिकेट थमा दिया. जिसकी शिकायत छात्रा ने डायरेक्ट जिले के डीएम महेंद्र कुमार से की. मामला जिलाधिकारी के संज्ञान में आने के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया.

घटना सुपौल जिले के सुपौल के त्रिवेणीगंज की है. यहां का अनुमंडलीय अस्पताल अपनी कारगुजारी को लेकर एक बार फिर से चर्चा में है. दरअसल स्वास्थ्य विभाग ने बिना टीका लगवाए ही एक छात्रा को सर्टिफिकेट थमा दिया. बताया जा रहा है कि 18 साल की स्वीटी प्रिया कोरोना का वैक्सीन लेने के लिए कोविन पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की थी. स्वीटी को मैसेज आया कि शनिवार को दोपहर एक बजे त्रिवेणीगंज अनुमंडल अंतगर्त लालपट्टी स्थित मध्य विद्यालय में उसे टीका लगाया जायेगा. जब स्वीटी वहां पहुंची तो वैक्सीनेशन सेंटर ही बंद पड़ा था.

स्वीटी प्रिया ने बताया कि शनिवार के दिन दोपहर में अपने अभिभावक के साथ वह कोरोना का टीका लेने के लिए लालपट्टी मध्य विद्यालय स्थित कोरोना टीकाकरण केंद्र पहुंची लेकिन वहां वैक्सीनेशन नहीं हो रहा था. जब उसने वहां मौजूद स्वास्थ्यकर्मियों से इस बारे में पूछताछ की तो उन्होंने कोई भी अनुकूल जवाब नहीं दिया. थक हारकर स्वीटी ने अस्पताल के प्रभारी उपाधीक्षक को फोन मिलाया. प्रभारी उपाधीक्षक की ओर से स्वीटी को कोई रिस्पांस नहीं मिला. 

हद तो तब हो गई, जब स्वीटी प्रिया को बिना कोरोना का टीका लगाए, उसे सक्सेफुल फर्स्ट डोज का सर्टिफिकेट थमा दिया गया. स्वीटी अपना सर्टिफिकेट देखकर हैरान हो गई. उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था. क्योंकि न तो उसे टीका दिया गया और न ही सही जानकारी दी गई. मगर फिर भी सर्टिफिकेट जरूर थमा दिया गया. वह काफी हैरान परेशान हो गई. उसने डायरेक्ट सुपौल के डीएम महेंद्र कुमार को फोन लगाया और पूरे घटनाक्रम की जानकारी जिलाधिकारी महोदय को दी.

जब जिलाधिकारी महेंद्र कुमार ने स्वीटी की आपबीती सुनी, वे भी काफी हैरान रह गए. उन्होंने फौरन संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को फोन लगाया और इस बाबत जानकारी ली. मामला जिलाधिकारी के संज्ञान में आते ही प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया. त्रिवेणीगंज अनुमंडलीय अस्पताल के प्रभारी उपाधीक्षक सहित अन्य कर्मियों और अफसरों की आंख खुली.

रविवार को दोपहर में स्वास्थ्यकर्मियों के साथ अधिकारी त्रिवेणीगंज बाजार स्थित स्वीटी प्रिया के घर पहुंचे. उन्होंने स्वीटी को वैक्सीन लगाने की बात कही. स्वीटी ने अफसरों के आग्रह को ठुकरा दिया और कहा कि वे वैक्सीन नहीं लगवायेगी. अधिकारियों ने काफी मानमनौवल किया. लेकिन स्वीटी उनकी एक न सुनी और उसने कहा कि वह वैक्सीन नहीं लगवायेगी.

स्वीटी ने अधिकारियों से कहा कि पहले वे अपनी व्यवस्था को सुदृढ़ करें. साथ ही इस प्रकरण के पीछे जो अधिकारी या स्वास्थ्यकर्मी दोषी हैं, उनके खिलाफ सख्त कदम उठाया जाये. उनके खिलाफ एक्शन लेना जरूरी है. काफी मनाने के बावजूद भी स्वीटी ने एएसडीएम प्रमोद कुमार, प्रभारी उपाधीक्षक डॉक्टर वीरेंद्र दर्वे और यूनीसेफ कॉर्डिनेटर अनुपमा चौधरी के सामने घर पर वैक्सीन लगवाने से साफ़ इनकार कर दिया.

गौरतलब हो कि पिछले दिनों बिहार के छपरा से एक मामला सामने आया था, जहां बिना दवा के ही शख्स को सीरींज लगा दी. इसके बाद नर्स पर कार्रवाई की गई. फिर इसी जिले में एक अन्य लड़की को बिना वैक्सीन लगाए सर्टिफिकेट दे दिया गया. रसूलपुर थाना क्षेत्र के असहनी गांव की रहने वाली कल्पना द्विवेदी ने  23 जून को वैक्सीनेशन के लिए अपना स्लॉट बुक कराया था. हालांकि किसी कारणवश कल्पना टीकाकरण केंद्र पर नहीं पहुंच पाई लेकिन लापरवाही के चलते दो दिन बाद यानी 25 जून को ही उनके मोबाइल पर वैक्सीन लेने का मैसेज आ गया और साथ ही वैक्सीनेशन का सर्टिफिकेट भी जारी कर दिया गया.

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