मोदी कैबिनेट का होगा विस्तार? जानिए स्पेशल 24 में कौन-कौन नाम होंगे शामिल

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मोदी कैबिनेट का विस्तार की चर्चा तेज हो गई है। बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री ने अपनी टीम फ़ाइनल कर ली है। मोदी के स्पेशल 24 कौन-कौन हैं? मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर मोदी के मन में क्या है? कहा जा रहा है कि जुलाई के पहले हफ्ते में मोदी मंत्रिमंडल का विस्तार हो सकता है। बता दें कि, मोदी के दूसरे कार्यकाल (मोदी सरकार 2.0) में अब तक मंडिमंडल विस्तार नहीं हुआ है। वहीं मोदी के मंत्रिमंडल में 24 नये चेहरे शामिल होने की चर्चा है।

30 जून को होगी बैठक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कैबिनेट के सभी मंत्रियों की बैठक बुलाई है। तीन दिन बाद यानि 30 जून शाम 5 बजे मोदी के सारे मंत्री वर्चुअल बैठक में शामिल होंगे लेकिन डिस्कशन एक्चुअल होगा। मोदी की अगली कैबिनेट मीटिंग की सबसे अलग बात ये है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार से पहले यह मोदी कैबिनेट की आखिरी बैठक हो सकती है। जब मंत्री परिषद की अगली बैठक होगी तो उसका स्वरूप बदला हुआ हो सकता है। बता दें कि, रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुडुचेरी के नए मंत्रियों को बधाई दी। पुडुचेरी में मंत्रिमंडल का विस्तार हुआ तो मंत्रियों को मोदी का मैसेज आया। मगर दिल्ली के पावर कॉरीडोर में दूसरी चर्चा चल रही है। प्रधानमंत्री मोदी अपनी कैबिनेट का विस्तार करने वाले हैं। 24 नये चेहरों को मंत्री पद देने की बात दिल्ली से लेकर गुवाहाटी तक उड़ रही है। कौन बनेगा मंत्री?, हमने इस पर सॉलिड इंफॉर्मेशन वाली जानकारियां जुटाई हैं। मोदी की नई टीम में कितने मंत्री होंगे। उनका डिटेल बायोडाटा इस रिपोर्ट में आप जानेंगे।

मोदी कैबिनेट में नये चेहरे आने वाले हैं?

एक दो नहीं, करीब दो दर्जन नये मंत्रियों के कैबिनेट में शामिल होने की चर्चा चल रही है। दिल्ली से लेकर मुंबई तक, लखनऊ से लेकर पटना और कोलकाता तक, भोपाल से लेकर गुवाहाटी तक सियासी गलियारों में अभी सबसे गर्मागर्म टॉपिक यही है कि कौन बनेगा मंत्री? सियासी हलकों में चर्चा तो कई नामों की है, लेकिन किसके नाम पर लगेगी मोदी की मुहर? ये देखना अभी बाकी है। नरेंद्र मोदी के काम करने के तरीके को जो लोग जानते हैं उन्हें मालूम है कि मोदी के काम करने का तरीका सबसे अलग है। आम तौर पर जब भी मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा चलती है तब दावेदार नेता अपना नाम उछाले जाने को लेकर लालायित रहते हैं, लेकिन फिलहाल दावेदारों की कोशिश है कि उनका नाम किसी भी सूरत में चर्चा में न आए, क्योंकि पिछले 7 साल में जिसका नाम उछला समझिए कि उसका पत्ता कटा।

  • सर्वानंद सोनोवाल, सुशील मोदी कैबिनेट मंत्री बन सकते हैं।
  • ज्योतिरादित्य सिंधिया केंद्र में मंत्री बन सकते हैं। 
  • महाराष्ट्र से नारायण राणे के मंत्री बनने की भी संभावना है।
  • नीतीश कुमार की पार्टी से 2 मंत्री बनाए जा सकते हैं। 
  • पंकजा मुंडे के मुक़ाबले प्रीतम मुंडे का पलड़ा भारी है। 
  • जफर इस्लाम, अनुप्रिया पटेल के नाम भी चर्चा में हैं।  
  • मतुआ समाज के नेता शांतनु ठाकुर मंत्री बन सकते हैं। 

जानिए क्यों होगा मोदी कैबिनेट का विस्तार 

मई 2019 में जब से मोदी 2.0 सरकार का गठन हुआ है, तब से एक बार भी मंत्रिमंडल का विस्तार नहीं हुआ। इस बीच शिवसेना और शिरोमणि अकाली दल के NDA से बाहर जाने और LJP कोटे से रामविलास पासवान के निधन के कारण कैबिनेट में जगह खाली है। जुलाई के फर्स्ट वीक में मंत्रिमंडल विस्तार तय माना जा रहा है। इसकी दो मुख्य वजह है, पहली- आने वाले विधानसभा चुनाव और दूसरी- NDA कुनबे का विस्तार। अगले साल यानी 2022 में उत्तर प्रदेश और पंजाब समेत 6 राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। उससे पहले नरेंद्र मोदी अपनी टीम को रि-शेप कर लेना चाहते हैं। कोरोना की दूसरी लहर कमजोर पड़ने और वैक्सीनेशन प्रोग्राम की रफ्तार बढ़ाने के बाद 7 लोक कल्याण मार्ग और बीजेपी हेडक्वार्टर में बैठक और मंथन के कई राउंड हो चुके हैं। नरेंद्र मोदी ने मंत्रियों की 2 साल की रिपोर्ट भी ले ली है। पॉलिटिकल कमेंटेटर भी मानते हैं कि कैबिनेट में पत्ते फेंटने का सही वक्त आ चुका है। 

कैबिनेट में किसे रखना है यह प्रधानमंत्री का विशेषाधिकार है। नरेंद्र मोदी क्या सोचते हैं, ये किसी से शेयर नहीं करते। फिर भी कुछ नाम हैं। कुछ चेहरे हैं जिनका मोदी कैबिनेट में आना करीब-करीब पक्का है। इनमें से पहला नाम है- सर्वानंद सोनोवाल, एक ऐसा चेहरा जिसके मंत्री बनने पर किसी को भी संदेह नहीं है।

जानिए सर्वानंद सोनोवाल के बारे में क्या कहता है गणित

सर्वानंद सोनोवाल असम में बीजेपी की पहली सरकार के मुख्यमंत्री रहे। 5 साल तक सोनोवाल ने असम को संभाला। सोनोवाल ने दोबारा चुनाव जीतकर खुद को साबित किया। हाईकमान ने जब सीएम पद के लिए हेमंता बिस्बा सरमा को चुना तो सोनोवाल ने कोई सवाल किए बिना मुख्यमंत्री की कुर्सी खाली कर दी। सोनोवाल के दावे को समझने के लिए जरा फ्लैशबैक में चलते हैं। 2 मई को असम विधानसभा चुनाव का नतीजा आने के 9 दिन बाद 11 मई को गुवाहाटी में जब हेमंता बिस्बा सरमा को बीजेपी विधायक दल का नेता चुना गया तो सबसे पहले सर्वानंद सोनोवाल ने ही उनको बधाई दी। राजनीति में ऐसी तस्वीरें कम ही देखने को मिलती हैं जब एक चीफ मिनिस्टर भावी चीफ मिनिस्टर को इस तरह गद्दी सौंपता है। 11 मई को ही ये तय हो गया था कि हेमंता बिस्बा सरमा असम संभालेंगे और सोनोवाल दिल्ली जाएंगे।

ज्योतिरादित्य सिंधिया को लेकर क्या चल रहा है

अगर कोरोना न आया होता तो ज्योतिरादित्य सिंधिया 2020 में ही मोदी कैबिनेट के मंत्री बन चुके होते। ज्योतिरादित्य सिंधिया को सेंटर में लाकर नरेंद्र मोदी यह क्लियर मैसेज देंगे कि एमपी तो शिवराज सिंह चौहान ही संभालेंगे। ज्योतिरादित्य सिंधिया राजपरिवार से ताल्लुक रखते हैं, फिलहाल वो राज्य सभा से बीजेपी के सांसद हैं। लोकसभा में वह गुना का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। मनमोहन सिंह सरकार में ज्योतिरादित्य ऊर्जा राज्यमंत्री थे। एमपी में कांग्रेस की सरकार गिराने और बीजेपी की सरकार बनाने में ज्योतिरादित्य सिंधिया का रोल सबसे बड़ा था। सवा साल से सिंधिया कैबिनेट विस्तार का इंतज़ार कर रहे हैं। अब ईनाम मिलने का वक्त करीब आ रहा है। 

जानिए बिहार से मोदी कैबिनेट में किसे मिलेगी जगह

दरअसल, नवंबर 2020 में बिहार चुनाव में NDA की जीत के बाद सुशील मोदी, नीतीश कुमार के साथ सबसे अगली पंक्ति में चल रहे थे। लेकिन बीजेपी ने उनको पटना की जगह दिल्ली बुलाने का फैसला किया। सरकार बनी तो सुशील मोदी की जगह 2 नये डिप्टी सीएम बनाए गए और सुशील मोदी को राज्यसभा का मेंबर बनाया गया। सुशील मोदी के बारे में नरेंद्र मोदी क्या सोचते हैं, ये उसी दिन सामने आ गया था जब बिहार के प्रभारी देवेंद्र फडणवीस ने सुशील मोदी के बारे में नरेंद्र मोदी का प्लान बताया था। सुशील मोदी 11 साल तक बिहार के उपमुख्यमंत्री रहे। अर्थव्यवस्था की उनकी समझ गहरी है। फिलहाल सुशील मोदी राज्यसभा सांसद हैं। हाईकमान के निर्देश पर सुशील मोदी ने बिहार का मोह छोड़ा है।

NDA का मेन गठबंधन पार्टनर होने के बावजूद मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में JDU का कोई मंत्री नहीं है। 2019 में बीजेपी ने JDU को एक मंत्री पद का ऑफर दिया था, जिसे नीतीश कुमार ने ठुकरा दिया था। बिहार कोटे से रामविलास पासवान की सीट खाली होने के बाद नये कैबिनेट विस्तार में JDU के दो नेताओं को मंत्री बनाया जा सकता है। नरेंद्र मोदी के पास JDU के तीन सांसदों के नाम हैं- आरसीपी सिंह, लल्लन सिंह और संतोष कुशवाहा। तीनों ही नेता नीतीश कुमार के भरोसेमंद हैं। आरसीपी सिंह पूर्व IAS ऑफिसर हैं। उन पर नीतीश का भरोसा इतना है बिहार के सीएम ने पूरी पार्टी ही RCP सिंह के हाथों में सौंप रखी है। लल्लन सिंह मुंगेर से जेडीयू के सांसद हैं और संतोष कुशवाहा पूर्णिया से सांसद हैं। नरेंद्र मोदी JDU के तीन में से 2 नेताओं को ही मंत्री बनाएंगे। वे दो नाम कौन होंगे, इसका फ़ाइनल निर्णय नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार को करना है। 

जानिए महाराष्ट्र से किस नाम की है चर्चा

बिहार के बाद अब महाराष्ट्र चलते हैं, जहां से नारायण राणे के मंत्री बनने की चर्चा सबसे ज़्यादा है। नारायण राणे महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके हैं। राणे ने शिवसेना से राजनीति की शुरुआत की। शिवसेना से कांग्रेस में आए, फिर अपनी पार्टी बनाई। फिलहाल राणे बीजेपी से राज्यसभा के सांसद हैं। नरेंद्र मोदी की नई टीम इंडिया में महाराष्ट्र से 2 और नामों की चर्चा है। पावर कॉरीडोर में दो नई एंट्री हुई है। नाम नोट कर लीजिए, ये हैं- प्रीतम मुंडे और हिना गावित। बीड लोकसभा की सांसद प्रीतम मुंडे बीजेपी के सीनियर नेता रहे गोपीनाथ मुंडे की बेटी हैं। पापा की पॉलिटिकल लीगेसी को संभालने में प्रीतम मुंडे अपनी बहन पंकजा मुंडे से आगे चल रही हैं। हिना गावित नंदुरबार से सेकंड टाइम एमपी हैं। 2014 में हिना गावित ने कांग्रेस के 9 बार के एमपी माणिकराव गावित को हराकर उनका पॉलिटिकल करीयर ख़त्म किया था। आदिवासी समुदाय से आने वाली हिना गावित पेशे से डॉक्टर हैं जो उनको एक्स्ट्रा मार्क्स दिलाता है।

पश्चिम बंगाल से मोदी के सामने 3 नाम आए हैं

पश्चिम बंगाल से मोदी के सामने 3 नाम आए हैं- नंबर 1 लॉकेट चटर्जी, नंबर 2 शांतनु ठाकुर और नंबर 3 दिलीप घोष। बंगाल बीजेपी के मौजूदा अध्यक्ष दिलीप घोष अगर मंत्री बनाए जाते हैं तो लॉकेट चटर्जी को प्रदेश पार्टी अध्यक्ष की कुर्सी पर बिठाया जा सकता है। अब शांतनु ठाकुर का बायोडाटा जानिए। शांतनु ठाकुर मतुआ समाज के नेता हैं, वो हरिचंद ठाकुर के पोते हैं जिनको मतुआ भगवान मानते हैं। शांतनु ठाकुर बनगांव (सुरक्षित) सीट से सांसद हैं। मोदी अपनी नई टीम इंडिया ऐसे वक्त पर बना रहे हैं, जब मोदी विरोधी फेडरल फ्रंट के नाम से नया मोर्चा बनाने की तैयारियों में जुटे हैं। मोदी विरोधियों का अल्टीमेट टारगेट 2024 है और फर्स्ट टारगेट 2022 है।

यूपी से इन चेहरों को मोदी कैबिनेट में मिल सकती है जगह

उत्तर प्रदेश में अगले साल चुनाव होने वाला है, इसलिए वहां के कुछ नेता भी मोदी के मंत्रिमंडल का हिस्सा बनेंगे। मनोज तिवारी यूं तो दिल्ली के सांसद हैं लेकिन उनके भोजपुरी सिनेमा के स्टार होने का फायदा बीजेपी को यूपी में मिलता है। हाल ही अमित शाह से मुलाकात करने वाली अनुप्रिया पटेल मोदी 1.0 सरकार में मंत्री थीं। मोदी 2.0 में अब तक उनको मौका नहीं मिला है। चुनाव से पहले अपना दल की नेता को दोबारा मौका मिल सकता है। वेस्टर्न यूपी के जातीय समीकरणों को साधने के लिए किसी जाट चेहरे को भी मंत्री पद दिया जाएगा।
इनको भी मिल सकती है मोदी कैबिनेट में जगह
मंत्री बनने की चर्चा में कुछ और नाम हैं, उनके बारे में भी संक्षेप में जान लीजिए। जामयांग नामग्याल लद्दाख से बीजेपी के युवा सांसद हैं जो अपने राष्ट्रवादी विचारों के लिए चर्चा में रहते हैं। राहुल कासवान राजस्थान के चुरू से सांसद हैं, वो सेकंड टाइम एमपी हैं। अश्विनी वैष्णव ओडिशा से राज्यसभा के सांसद हैं। सुनीता दुग्गल हरियाणा से एकलौती महिला सांसद हैं। सिरसा की एमपी 22 साल तक इनकम टैक्स डिपार्टमेंट में अफसर रही हैं और VRS लेकर पॉलिटिक्स में आई हैं। सैय्यद जफर इस्लाम बीजेपी में उभरते हुए मुस्लिम फेस हैं। वे हजारीबाग, झारखंड के रहने वाले हैं। बीजेपी के प्रवक्ता हैं और राज्यसभा के मेंबर हैं। पावर पॉलिटिक्स, एलायंस पॉलिटिक्स, कास्ट इक्वेशन, स्टेट रिप्रेजेंटेशन… नरेंद्र मोदी को एक साथ कई फ्रंट पर बैलेंस बनाकर चलना है। मोदी की नई टीम ऐसी होगी जो चुनाव में जीत की गारंटी भी देगी और इंडिया को ग्रोथ और डेवलपमेंट के रास्ते पर भी ले जाएगी।

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