कोरोना से हुई मौत का मिलेगा मुआवजा, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- NDMA तय करे रकम

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देश में कोरोना से हुई हर मौत के लिए मुआवजा दिया जाएगा. सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDMA) से कहा है कि वह 6 हफ्ते में मुआवजे की रकम तय कर राज्यों को सूचित करे. कोर्ट ने माना है कि इस तरह की आपदा में लोगों को मुआवजा देना सरकार का वैधानिक कर्तव्य है. लेकिन मुआवजे की रकम कितनी होगी, यह फैसला कोर्ट ने सरकार पर ही छोड़ दिया है.

क्या है मामला

सुप्रीम कोर्ट में 2 वकीलों गौरव कुमार बंसल और रीपक कंसल की तरफ से याचिका दाखिल की गई थी. दोनों का कहना था है कि नेशनल डिज़ास्टर मैनेजमेंट एक्ट की धारा 12 में आपदा से मरने वाले लोगों के लिए सरकारी मुआवजे का प्रावधान है. पिछले साल केंद्र ने सभी राज्यों को कोरोना से मरने वाले लोगों को 4 लाख रुपए मुआवजा देने के लिए कहा था. इस साल ऐसा नहीं किया गया है. याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा था कि हस्पताल से मृतकों को सीधा अंतिम संस्कार के लिए ले जाया जा रहा है. न उनका पोस्टमॉर्टम होता है, न डेथ सर्टिफिकेट में लिखा जाता है कि मृत्यु का कारण कोरोना था. ऐसे में अगर मुआवजे की योजना शुरू भी होती है तो लोग उसका लाभ नहीं ले पाएंगे. सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अशोक भूषण और एम आर शाह की बेंच ने मामले पर केंद्र सरकार को 24 मई को नोटिस जारी किया था.

केंद्र ने किया मुआवजे का विरोध

केंद्र ने याचिका के जवाब में कहा कि इस वित्त वर्ष में राज्यों को 22,184 करोड़ रुपए आपदा राहत कोष में दिए गए हैं. इसका एक बड़ा हिस्सा कोरोना से लड़ने में खर्च हो रहा है. केंद्र ने भी अपनी तरफ से 1.75 लाख करोड़ का प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज घोषित किया है. इसमें गरीबों को मुफ्त राशन के अलावा वृद्ध, दिव्यांग, असमर्थ महिलाओं को सीधे पैसे देने, 22.12 लाख फ्रंटलाइन कोरोना वर्कर्स को 50 लाख रुपए का इंश्योरेंस कवर देने जैसी कई बातें शामिल हैं. कोरोना से हुई लगभग 4 लाख मौतों के लिए 4-4 लाख रुपए का भुगतान करना आर्थिक रूप से बहुत कठिन है. राज्यों को इसके लिए बाध्य किया गया तो आपदा प्रबंधन के दूसरे अनिवार्य कार्य प्रभावित होंगे.

सुप्रीम कोर्ट का फैसला

आज दिए फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की इस दलील को स्वीकार किया है कि नेशनल  डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट की धारा 12 में राष्ट्रीय आपदा से होने वाली मौतों के लिए मुआवजे का प्रावधान है. यह मुआवजा तय करना NDMA की कानूनी ज़िम्मेदारी है. आर्थिक दिक्कत का हवाला देकर इससे नहीं बचा जा सकता. कोर्ट ने यह भी स्वीकार किया है कि इस समय केंद्र और राज्य सरकारों को अपने सीमित संसाधनों से बहुत से दूसरे ज़रूरी काम करने पड़ रहे हैं. ऐसे में कोर्ट ने साफ किया है कि मुआवजे की रकम वह तय नहीं करेगा.

फैसले में कहा गया है कि केंद्र सरकार और NDMA वित्तीय स्थिति और दूसरी बातों के आधार पर 6 हफ्ते में मुआवजे पर राज्यों को निर्देश जारी करे. कोर्ट ने यह भी कहा है कि कोरोना से मरने वालों के मृत्यु प्रमाण पत्र में मौत की वजह साफ लिखी जाए. सर्टिफिकेट पाने की प्रक्रिया सरल की जाए और अगर पहले जारी हो चुके सर्टिफिकेट से परिवार को कोई शिकायत है तो उसका निराकरण किया जाए.

ब्लैक फंगस पर भी होगी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने आज ब्लैक फंगस, व्हाइट फंगस और येलो फंगस के चलते मरने वालों के परिवार को 4 लाख रुपए का मुआवजा देने की मांग पर भी सरकार को नोटिस जारी किया. याचिकाकर्ता रीपक कंसल का कहना है कि इन बीमारियों की मुख्य वजह कोरोना ही है. इसलिए, इनसे होने वाली मौत का भी मुआवजा सरकार को देना चाहिए.

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