बिहार में खुले स्कूल, देखें कैसा रहा पहला दिन

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कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर से उबकर बिहार के दसवीं से ऊपर के स्कूल सोमवार से 50 फीसदी छात्र उपस्थिति के साथ खुल गए। 98 दिनों बाद गुलजार हुए शिक्षण संस्थानों में पहले ही दिन फुल घंटी लगी और रूटीन के मुताबिक सभी कक्षाएं अपने पूरे समय तक चलीं। हालांकि विद्यार्थियों की उपस्थिति बहुत उत्साहजनक नहीं रही।

उत्तर बिहार के जिलों में स्कूलों में कहीं चार-पांच बच्चे आए तो कहीं कैम्पस खाली रहा। सरकारी स्कूलों में अधिकांश जगह सन्नाटा छाया रहा। शहर के कॉलेजों में 8 से 10 फीसदी छात्र ही कॉलेज पहुंचे। यही हाल कोसी-सीमांचल व पूर्व बिहार के जिलों का भी रहा। कहीं 20 तो कहीं 30 फीसदी ही बच्चे स्कूल पहुंचे। शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय कुमार ने 12 जुलाई से दसवीं के ऊपर के सभी स्कूल, कॉलेज, विवि व तकनीकी संस्थानों के संचालन को लेकर 6 जुलाई को ही विस्तृत दिशा-निर्देश सभी जिला पदाधिकारियों को जारी किया था। छह फीट की दूरी पर बेंच-डेस्क रखे गये थे फिर भी पहले दिन उपस्थिति कम रही।

कम रही उपस्थिति
कोरोना की दूसरी लहर के बाद 5 अप्रैल के बाद से बंद कई स्कूल सोमवार से खुल गए। हालांकि, तीन महीने बाद खुले स्कूल में बच्चों की उपस्थिति काफी कम रही। स्कूल प्रबंधन बच्चों की सीटिंग अरेंजमेंट को लेकर काफी सावधानी बरत रहे हैं। स्कूलों को खोलने की अनुमति मिलने के बावजूद कई स्कूल सोमवार को भी बंद रहे। माउंट कार्मेल स्कूल 12वीं कक्षा के लिए 17 जुलाई से खुलेगा। इसी तरह डॉन बास्को और सेंट कैरेंस अगले सोमवार से खोलने की योजना है। सेंट माइकल स्कूल और लोयला स्कूल भी अभी नहीं खुले हैं।

छात्रावास में रहने के लिए टीका प्रमाण पत्र अनिवार्य
पटना। पीयू के छात्रावासों में रहने के लिए छात्रों को कोरोना टीका का प्रमाण पत्र देना होगा। इसके बाद ही विवि और कॉलेज की ओर से छात्रावास में रहने की अनुमति प्रदान की जाएगी। विवि के डीन प्रो. अनिल कुमार ने सभी प्राचार्य और अधीक्षकों को पत्र भेजकर नियम को पालन करने का निर्देश जारी किया है। वैसे छात्र जो कोरोना का टीका नहीं लिए हैं इन्हें छात्रावास में नहीं रहने की अनुमति दी जाएगी। वहीं वैसे छात्र जो कोविड-19 टीकाकरण करा चुके हैं और अपना प्रमाण पत्र पेश करने के बाद ही छात्रावास में रहने की अनुमति प्रदान की जाएगी।

विवि ने कोविड-19 संक्रमण को देखते हुए ऐसा निर्णय लिया है ताकि छात्रावासों में रहने वाले छात्र पूरी तरह से सुरक्षित रहे और किसी तरह के भय का माहौल आपस में छात्रों के बीच नहीं रहे।

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