कैप्सूल से निकलते ही खुशी से उछल पड़े अमेजन के फाउंडर, उनकी कंपनी ने शुरू की स्पेस टूर की बुकिंग

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अमेजन के फाउंडर जेफ बेजोस मंगलवार को अंतरिक्ष की सैर करके लौट आए। उनकी ये यात्रा 11 मिनट की रही। बेजोस की यात्रा में उनके साथ 3 और यात्री शामिल थे। इसमें उनके भाई मार्क, 82 साल की वैली फंक और 18 साल के ओलिवर डेमेन शामिल थे।

बेजोस की यात्रा पूरी होने के बाद उनकी कंपनी ब्लू ओरिजन ने स्पेस टूर के लिए टिकट बुकिंग शुरू कर दी है। हालांकि, कंपनी ने अभी इसकी कीमत नहीं बताई है।

दुनिया की टॉप ई-कॉमर्स कंपनियों में शामिल अमेजन के फाउंडर जेफ बेजोस अंतरिक्ष की 11 मिनट की यात्रा करके धरती पर लौट आए। वे भारतीय समय के मुताबिक मंगलवार शाम 6:42 बजे रवाना हुए। उनके साथ 3 और यात्री थे। इनमें एक उनके भाई मार्क, 82 साल की वैली फंक और 18 साल के ओलिवर डेमेन शामिल हैं। ओलिवर ने हाल ही में हाई स्कूल पास किया है। बेजोस के साथ स्पेस में जाने के लिए किसी अनजान शख्स ने 28 मिलियन डॉलर की बोली लगाई थी। वह इस ट्रिप में नहीं जा सका। उसी की जगह ओलिवर गए थे।

कैप्सूल के धरती पर लैंड करने के बाद ब्लू ओरिजिन की तरफ से कहा गया कि स्पेसफ्लाइट इतिहास में इस ऐतिहासिक पल तक पहुंचने के लिए टीम ब्लू पास्ट और सभी लोगों को बधाई। पहले ऐस्ट्रोनॉट क्रू ने अपना नाम स्पेस के इतिहास की किताबों में लिख दिया है। इन्होंने जिस दरवाजे को खोला है, उससे अब कई लोग गुजरेंगे। यह वाकई ऐतिहासिक दिन है।

52 साल पहले आज ही के दिन नील आर्मस्ट्रॉन्ग चांद पर पहुंचे थे
रिपोर्ट्स के मुताबिक, बेजोस ने अंतरिक्ष में जाने के लिए यह दिन इसलिए चुना है, क्योंकि अपोलो 11 स्पेसशिप के जरिए एस्ट्रोनॉट्स नील आर्मस्ट्रॉन्ग और बज एल्ड्रिन आज से ठीक 52 साल पहले 1969 में चंद्रमा पर पहुंचे थे। जेफ बेजोस की स्पेसफ्लाइट कंपनी ब्लू ओरिजिन ने रविवार को कहा था कि वह अपनी पहली ह्यूमन स्पेसफ्लाइट के लिए पूरी तरह तैयार है।

बेजोस और उनकी टीम जिस रॉकेट शिप से गए, वह ऑटोनॉमस है यानी उसे पायलट की जरूरत नहीं पड़ती। इसके कैप्सूल में 6 सीटें हैं, लेकिन इनमें से सिर्फ 4 भरी गईं। न्यू शेफर्ड नाम के इस रॉकेट की अब तक 15 फ्लाइट्स कामयाब रही हैं। हालांकि इसमें अब तक यात्री नहीं गए थे।

हफ्तेभर पहले ब्रैन्सन स्पेस में गए थे
इससे एक हफ्ते पहले 11 जुलाई को ब्रिटिश अरबपति रिचर्ड ब्रैन्सन के वर्जिन स्पेस शिप (VSS) यूनिटी स्पेसप्लेन की फ्लाइट सफल रही थी। वे 85 किमी तक गए थे। खास बात यह है कि ब्रैन्सन के साथ भारतीय मूल की सिरिशा बांदला गई थीं, वहीं बेजोस का न्यू शेपर्ड रॉकेट बनाने वाली इंजीनियरों की टीम में महाराष्ट्र के कल्याण की 30 साल की संजल गवांडे भी शामिल थीं।

बेजोस की फ्लाइट ने ऐसे उड़ान भरी

  • बेजोस की फ्लाइट 11 मिनट की सबऑर्बिटल फ्लाइट रही, यानी यह पृथ्वी की कक्षा में नहीं गई। बेजोस की ब्लू ओरिजिन कंपनी के न्यू शेपर्ड रॉकेट ने वेस्ट टेक्सास के रेगिस्तान से भारतीय समयानुसार शाम 6:42 बजे उड़ान भरी।
  • इसके लिए सभी यात्री लॉन्च से 45 मिनट पहले ऑन-बोर्ड हो गए। क्रू ने मिशन के लिए 48 घंटे की ट्रेनिंग की। कर्मचारियों ने भी 8-8 घंटे की 2 दिन की ट्रेनिंग पूरी की। यह ट्रेनिंग टिकट खरीदने वाले सभी कस्टमर्स के लिए भी जरूरी होगी। इस फ्लाइट के बाद फंक सबसे बुजुर्ग और डेमेन सबसे युवा एस्ट्रोनॉट बन गए।
  • करीब 3 मिनट की फ्लाइट के बाद ब्लू ओरिजिन के न्यू शेपर्ड रॉकेट से बेजोस का कैप्सूल अलग हुआ और स्पेस में आगे बढ़ा। 4 मिनट उड़ान भरने के बाद वह 100 किमी ऊपर यानी कारमन लाइन को पार कर गया।
  • इस दौरान यात्रियों ने वेटलेसनेस महसूस की। इसी के साथ कैप्सूल ने जमीन पर लौटने की शुरुआत की। 11 मिनट की फ्लाइट के बाद कैप्सूल पैराशूट की मदद से रेगिस्तान में उतरा। इस दौरान रॉकेट भी धरती पर लौट आया।

फ्लाइट ने कई रिकॉर्ड्स बनाए
इस यात्रा के साथ ही बेजोस की फ्लाइट ने कई रिकॉर्ड भी बनाए हैं। यह ब्लू ओरिजिन की पहली बिना पायलट की सबऑर्बिटल फ्लाइट है, जिसमें आम नागरिक सवार हैं। सबसे बुजुर्ग और सबसे युवा एस्ट्रोनॉट का रिकॉर्ड भी इस फ्लाइट से जुड़ गया। न्यू शेपर्ड रॉकेट और उसका कैप्सूल RSS फर्स्ट स्टेप दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है।

रॉकेट और कैप्सूल इससे पहले भी उड़ान भर चुके हैं और इस मिशन से पहले 2 बार सफलता के साथ लैंड कर चुके हैं। न्यू शेपर्ड के लिए अब तक 15 फ्लाइट्स सफल रही हैं। पर अब तक यात्री कभी नहीं गए।

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