जातीय जनगणना पर नीतीश को तेजस्वी ने घेरा: पूछा- जातीय जनगणना पर केन्द्र पुनर्विचार नहीं करेगी तो हमारे साथ आकर आवाज बुलंद करेंगे?

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नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से पूछा है कि माननीय मुख्यमंत्री जी, केन्द्र सरकार अगर जातीय जनगणना पर पुनर्विचार नहीं करेगी तो आप क्या करेंगे? हमारी मांग पर बिहार विधानसभा में सर्वसम्मति से जातिगत जनगणना का प्रस्ताव पारित किया गया था। तेजस्वी यादव ने आगे कहा है- ‘केन्द्र सरकार में आपकी हिस्सेदारी है। आपके कैबिनेट मंत्री हैं। फिर भी अनुनय विनय कर रहे हैं’? वहीं, तेजस्वी के सवाल पर जदयू की ओर से प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि हम तो सिर्फ अपनी बात रख सकते हैं।

तेजस्वी यादव के बयान को उनकी ही पार्टी के प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने आगे बढ़ाते हुए कहा कि नीतीश कुमार जातीय जनगणना के सवाल पर केन्द्र के मंसूबे का प्रतिकार कड़ाई से नहीं कर रहे हैं। वह मजबूरी का प्रकटीकरण कर रहे हैं। पीएम मोदी राष्ट्रवाद की बात करते हैं, लेकिन पिछड़े-अति पिछड़े से इतनी नफरत क्यों करते हैं? शक्ति यादव पूछते हैं कि अगर केन्द्र सरकार नीतीश कुमार की मांग पर पुनर्विचार नहीं करेगी तो वह राष्ट्रीय जनता दल के साथ आकर केन्द्र के खिलाफ आवाज बुलंद करेंगे?

हम अपनी बात रख सकते हैं, लगातार रखेंगे

JDU नेता और पूर्व मंत्री नीरज कुमार ने कहा कि उनकी पार्टी JDU अपनी बात लगातार रखेगी। जातीय जनगणना कराने पर विधान मंडल का सर्वसम्मति फैसला है। उन्होंने यह भी कहा कि हम तो सिर्फ अपनी बात ही रख सकते हैं।

क्षेत्रीय राजनीति करने वाले ही कर रहे मांग

BJP के प्रवक्ता प्रेमरंजन पटेल ने कहा कि पहले भी संसद में जातीय जनगणना का प्रस्ताव आ चुका है और खारिज हो चुका है- ‘1931 में पहली बार जातीय जनगणना हुई। उसके बाद 1941 में नहीं हो सकी। 1951 में प्रस्ताव आया तो सरदार पटेल ने यह कहकर कराने से मना कर दिया था कि देश का ताना-बाना खत्म हो जाएगा। कोई राज्य प्रस्ताव बनाकर केन्द्र भेज देगा तो उसे मानना संसद के लिए बाध्यकारी नहीं हो जाता। उन्होंने कहा कि जो लोग जाति, भाषा से जुड़ी क्षेत्रीय राजनीति करते हैं। वही इसकी मांग कर रहे हैं’।

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