भागलपुर: हवलदार की पत्नी से जबरन की शादी, बच्चों संग घूमने आई थी

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भागलपुर घूमने आई नेपाल पुलिस के हवलदार की पत्नी से जबरन शादी करने का मामला प्रकाश में आया है। महिला यहां घूमने आई तो उसकी मुलाकात एक युवक से हो गई। उसने उसे अपने जाल में फंसा लिया और उसके बेटे को अगवा कर जबरन उससे कोर्ट में शादी कर ली। पति जब कई महीनों बाद उसे खोजते-खोजते पहुंचा तो उसने पुलिस से मदद मांगी, लेकिन जमादार ने 15 हजार रुपए लेकर उसे भगा दिया। अब थक-हारकर पीड़ित पति और पत्नी बच्चे की रिहाई की मांग को लेकर DIG के पास पहुंचा है।

यह घटना घटी है नेपाल के इनरवा थाना में पदस्थापित हवलदार जितेन्द्र यादव की पत्नी कुसुम के साथ। बताया जाता है कि 21 दिसंबर 2020 को कुसुम अपने देवर धर्मेंद्र यादव और दो छोटे बच्चों आरोही (7 वर्ष) और रियांश (2 वर्ष) के साथ भागलपुर आई थी। यहां आने के बाद वह जीरोमाईल थाना क्षेत्र के गोपालपुर निवासी कक्कू यादव के मकान में किराए पर रहने लगी। वहां उसकी मुलाकात श्रवण मल्लिक से हुई। श्रवण अपने परिवार के साथ रहता था। ऐसे में उसके घर कुसम का आना-जाना था। एक दिन जब कुसुम उसके घर गई तो सिर्फ श्रवण था। उसने चाय बनाकर दिया। चाय पीने के बाद कुसुम बेहोश हो गई। बेहोशी की हालत में ही उसे जबरन सहरसा ले गया और बच्चों को जान से मारने की धमकी देकर कोर्ट में शादी कर ली।

शादी करने के 4 महीनों के बाद दोनों सहरसा से फिर भागलपुर आ गए। दो महीने तिलका मांझी में रहने के बाद श्रवण उसे लेकर अपने घर गया। इसके बाद श्रवण की पहली पत्नी रानी देवी को जब दूसरी शादी की जानकारी हुई तो उसने कुसुम को भला बुरा कहा। कुसुम ने अपनी सारी आपबीती सुनाकर उससे सहायता मांगी। इसके बाद वह कुसुम को वहां से निकालने के लिए उसे लेकर अपने मायके चली गई। वे परबत्ता थाना इलाके के बहतरा गांव पहुंचीं। यहां 15 जुलाई 2021 को नेपाल पुलिस के हवलदार जितेंद्र यादव को बुलाकर कुसुम को सौंप दिया। तब तक श्रवण ने कुसुम के बेटे रियांश को साथ लिया और फरार हो गया। इसके बाद कुसुम और जितेंद्र दोनों पुलिस से गुहार लगा रहे हैं।

पीड़ित जितेन्द्र का आरोप है कि 16 जुलाई को कुसुम बच्चे के अपहरण का मामला दर्ज कराने परबत्ता थाना पहुंचा तो थानाध्यक्ष ने बरारी थाना भेज दिया। बरारी थाने के जमादार रामप्रवेश यादव ने 25 हजार की मांग की। किसी तरह पीड़ित ने उसे 15 हजार रुपए दिए। जमादार ने वादा किया कि अगले दिन बच्चे की बरामदगी हो जाएगी, लेकिन अगले दिन से वह टाल-मटोल करने लगा। दूसरे दिन जब थाना पहुंचा तो जमादार ने जबरन (पत्नी को लेकर जा रहा हूं) लिखवा कर थाने से भगा दिया। विरोध किया तो गाली गलौज की।

पुलिस के सामने थाने में आरोपी के परिजनों ने पीटा

पीड़ित के अनुसार, इसके बाद फिर से बरारी थाने गया। इस बार घूसखोर जमादार ने आरोपी श्रवण मल्लिक को बुलाया, लेकिन वह नहीं आया। उसने कहा कि कुसुम को उसके पास भेजना होगा, तब वह बच्चे को लौटाएगा। थाने पर श्रवण तो नहीं आया, लेकिन श्रवण की मां, बहन और कुछ लोग आए। सभी ने पुलिस के सामने ही उनके साथ मारपीट की, ऐसा जितेंद्र का आरोप है। जमादार चुपचाप तमाशा देखता रहा। बचाव करने की गुहार लगाई तो उसने फिर गाली गलौज कर भगा दिया।

पीड़ित ने बरारी थानाध्यक्ष अवनीश कुमार को इस बात की जानकारी दी, लेकिन थानाध्यक्ष ने रामप्रवेश यादव पर कार्रवाई करने के बदले जितेन्द्र यादव को नौगछिया एसपी का नंबर देकर बरारी थाना से जाने को कह दिया।

परबत्ता थाना में मामला हुआ दर्ज

उसने बताया कि नौगछिया एसपी से बात करने पर उन्होंने इसकी जानकारी एसडीपीओ दिलीप कुमार को दी। एसडीपीओ दिलीप कुमार ने मामले को तुरंत परबत्ता थाने में दर्ज करवाया। फिलहाल पीड़ित जितेन्द्र यादव ने भागलपुर डीआईजी को आवेदन देकर बच्चे की बरामदगी की गुहार लगाई है।

नौगछिया एसडीपीओ दिलीप कुमार ने बताया कि बरारी थाना के जमादार ने पीड़ित से 15 हजार रुपए लेकर उसे थाने से भगा दिया। थाने में आरोपी के परिजनों ने पीड़ित के साथ मारपीट भी की है। बरारी थानाध्यक्ष अवनीश कुमार को फटकार लगाई गई है। उन्होंने बताया कि अगर किसी जमादार ने ऐसा किया है तो उसमें थानाध्यक्ष की भी सहभागिता है। दोनों पर कार्रवाई की जाएगी।

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