मानसून सत्र : विपक्ष के बगैर चलेगी विधानसभा? कार्यमंत्रणा समिति की बैठक में गतिरोध खत्म करने का होगा प्रयास

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बिहार विधान मंडल का मानसून सत्र छोटा होने के बावजूद बेहद हंगामेदार साबित हो रहा है। बजट सत्र में विपक्षी विधायकों की पिटाई का मामला अब तक सदन के अंदर टकराव का कारण बना हुआ है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मंगलवार को इस मामले पर चर्चा के लिए सदन में प्रस्ताव पेश किया था लेकिन तेजस्वी के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया गया। इसके बाद विपक्ष ने एलान कर दिया कि वह पूरे मानसून सत्र में सदन की कार्यवाही का बहिष्कार करेगा। तेजस्वी यादव ने कहा था कि जब जनहित के सवालों और विधायकों के सम्मान के मसले पर सदन में चर्चा नहीं हो सकती तो कार्यवाही में शामिल होने का कोई मकसद नहीं बचता।

तेजस्वी के इस एलान के साथ यह तय हो गया कि विपक्ष इस मामले पर झुकने वाला नहीं है। महागठबंधन में शामिल तमाम दलों आरजेडी के साथ-साथ कांग्रेस और वाम दलों ने भी तेजस्वी के स्टैंड का साथ दिया है। मंगलवार को भोजन अवकाश के बाद की कार्यवाही विपक्ष के बगैर चली थी। ऐसे में इस बात की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता कि आज भी विपक्ष के बगैर सदन की बैठक हो। हालांकि नेता प्रतिपक्ष के एलान के बाद विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच गतिरोध खत्म करने का प्रयास भी शुरू है। विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा इस मामले पर कार्यमंत्रणा समिति की बैठक के बुला सकते हैं। तेजस्वी यादव ने खुद कहा था कि विपक्ष सदन में नहीं जाएगा लेकिन विधानमंडल परिसर में मौजूद रहेगा। अगर कार्यमंत्रणा समिति की बैठक बुलाई जाती है तो हम बातचीत करेंगे। ऐसे में इंतजार है कि क्या सदन की कार्यवाही शुरू होने के पहले कार्यमंत्रणा समिति की बैठक होगी।

आपको बता दें कि 23 मार्च को बजट सत्र के दौरान सरकार ने विधेयक पेश किया था। पुलिस विधेयक को लेकर विपक्ष ने विधानसभा में जोरदार हंगामा किया था। इस दौरान विधानसभा अध्यक्ष को विपक्षी विधायकों ने उनके कक्ष में बंधक भी बना लिया था। जिसके बाद बाहर से पुलिस बुलानी पड़ी थी। विधानसभा में पहुंचे पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने विधायकों को पीट-पीटकर सदन से बाहर निकाला था। इस दौरान कई विधायकों को जूतों से पीटा गया था। इस मामले में सरकार ने एक्शन लेते हुए दो कांस्टेबल निलंबित किए हैं। सदन की आचार समिति इसकी जांच कर रही है लेकिन तेजस्वी यादव और विपक्ष चाहता है कि इस मामले पर सदन के अंदर चर्चा हो।

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