बिहार के डॉ. रंजन ने 100 दिनों तक 500 मरीजों पर स्टडी की, बोले- विटामिन D के प्रॉपर इस्तेमाल से तेज हुई रिकवरी, हावी नहीं हो पाया वायरस

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पटना AIIMS के चेस्ट रोग विभाग के भूतपूर्व चिकित्सक डॉ. अभिषेक रंजन ने कोरोना संक्रमितों के इलाज में विटामिन D पर बड़ी स्टडी की है। उन्होंने दावा किया है कि पल्स थेरेपी से कोरोना संक्रमितों को गंभीर होने से बचाया जा सकता है। यह भी दावा है कि इससे मरीजों में रिकवरी कई गुना तेज हुई है। उनका यह भी कहना है कि विटामिन डी को इलाज में शामिल कर कोरोना की संभावित लहरों में भी बड़े पैमाने पर संक्रमितों को गंभीर होने से बचाया जा सकता है।

डॉ अभिषेक रंजन का कहना है- “कोरोना की दूसरी लहर में उन्होंने 100 दिनों में 500 मरीजों पर विटामिन D के पल्स थेरेपी को शामिल कर बड़ी स्टडी की है। इससे अप्रत्याशित परिणाम सामने आए हैं। 100 दिनों में जिन 500 मरीजों पर यह प्रयोग किया गया, वह काफी कारगर साबित हुआ है। ऐसे मरीजों की रिकवरी काफी तेजी के साथ हुई और उनकी हालत भी गंभीर नहीं हुई है। हर केस की स्टडी का मेरे पास ब्यौरा है’।

उन्होंने बताया- “पल्स थेरेपी के तहत हाई डोज में 80 से 100n g/ml विटामिन D दी है। लक्षण के बेहद शुरुआत से ही सभी संभावित संक्रमितों में उन्होंने यह प्रयोग किया है जिससे उन्हें मरीजों की रिकवरी में आश्चर्यजनक तरीके से हुई है। इससे मरीजों की जीवन रक्षा भी की जा सकी है’।

जानिए, क्या है पल्स-थेरेपी

पल्स थेरेपी मरीज के उम्र, वजन और उसके स्वास्थ्य को देखते हुए दी जाती है। अगर मरीज वृद्ध है और बीमार है तो डोज अधिक दी जाती है। विटामिन की दो डोज देनी है। हायर डोज में ही विटामिन D इम्यूनिटी को बढ़ाती है। पल्स थेरेपी का नियम शॉर्ट ड्यूरेशन, हाई डोजिंग है। 5 से 7 दिन में मरीजों को कैप्सूल दी जाती है, सामान्य मरीज को 60K तक दिया जाता है। यह शरीर में कम समय में तेजी से घुलकर, फैट से घुलकर तेजी से काम करता है। यह CRP लेबल कम करता है, जिससे शरीर के अंगों का सूजन कम होता है। कोविड में CRP लेबल से ही इलाज किया गया और इसमें पल्स थेरेपी से लाभ मिला। विटामिन डी की पल्स थेरेपी देने वालों को स्टेयराइड भी कम किया है। विटामिन डी हड्डियों के लिए भी लाभदायक है। कोविड के बाद हडि्डयों पर कोई साइड इफेक्ट नहीं देखा गया है।

ऐसे काम करता है विटामिन D

डॉ अभिषेक रंजन का कहना है कि विटामिन D हमारी इम्युनिटी को बढ़ा देता है, विशेषकर सूजन लाने वाली TNF अल्फा और इंटरफेरॉन गामा के निकलने को कम करके यह काम करती है। यह एन्टी Inflammatory cytokines को बढ़ा कर लाभ पहुंचाती है। जिस वजह से विटामिन D “साइटोकाइन स्टॉर्म’ (जो संक्रमण के बाद ARDS द्वारा रोगियों की मौत का कारण बनता है।) उसकी रोकथाम में काफी कारगर होती है।

उनका कहना है कि TH17 सेल को भी विटामिन D कम करने का काम करती है। TH1 TH2 द्वारा सूजन लाने वाली केमिकल को भी यह तेजी से कम कर देती है। विटामिन D वायरस के खिलाफ विशेष CD8 और T सेल में तेजी से बढ़ोत्तरी का काम करती है, जिससे सांस सम्बंधित वायरस के संक्रमण की संभावना काफी कम हो जाती है।

तेजी से बढ़ती है प्रतिरोधक क्षमता

डॉ अभिषेक रंजन का दावा है कि विटामिन D Macrophage (जो प्रतिरोधक क्षमता में अहम होते हैं) को Mature करने में मदद करता है और Oxidative burst capacity को भी तेजी से बढ़ाता है। इतना ही नहीं यह Autophagy को भी निष्क्रिय करता है। इससे वायरल रेप्लिकेशन नहीं हो पाती है। MONOCYTES को दबा कर, इनके द्वारा IL 6 के रिसाव को भी कम करता है। विटामिन D Epithelial linings को भी मजबूती प्रदान करता है, जिससे संक्रमण के प्रति शरीर की प्रतिरोधक क्षमता भी तेजी से बढ़ती है। विटामिन डी द्वारा Gap junctions, adherent junctions और tight junctions को भी सुदृढ़ किया जाता है।

सांस के गंभीर संक्रमण से बचाव

डॉ. रंजन का कहना है कि IL1 BETA और TNF अल्फा जिससे ARDS यानी सांस की गम्भीर बीमारी से मौत तक हो सकती है। इसके लिए विटामिन D की कमी को बेहद ज़िम्मेदार माना गया है। Higher latitudes के देशों में विटामिन D की कमी संक्रमण के ज्यादा खतरनाक होने का बड़ा कारण मानी गई है। दक्षिण के देशों की तुलना में, जहां विटामिन डी की मात्रा आबादी में ज्यादा है।

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