इसरो कल आसमान में तैनात करेगा भारत का निगहबान, EOS-3 सैटेलाइट की लॉन्चिंग का काउंटडाउन शुरू, जानें इसकी खासियत

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भारत के 75वें स्वतंत्रता दिवस से तीन दिन पहले भारतीय अंतरिक्ष अनसंधान संगठन भारत को एक तोहफा देने जा रहा है। भारत अंतरिक्ष में एक बड़ी छलांग लगाने जा रहा है जिसके बाद से आसमान में भारत का एक निगहबान अपनी जगह बना लेगा। बता दें कि इसरो पृथ्वी की निगरानी करने वाले अपने देश के पहले उपग्रह ईओएस-03 का प्रक्षेपण करने वाला है। जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल-एफ 10 (जीएसएलवी ) ईओएस-03 मिशन के प्रक्षेपण के लिए काउंटडाउन शुरू हो चुका है। इसके सफल होने के बाद से भारत की ताकत में बढ़ोतरी होगी। यह उपग्रह भारत में आने वाली बाढ़ और चक्रवात जैसी आपदाओं की निगरानी रखने में सक्षम होगा। इसका प्रक्षेपण कल सुबह पांच बजकर 43 मिनट पर होगा।

इसरो ने ट्वीट कर काउंटडाउन शुरू होने की जानकारी दी है, इसने लिखा, “जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल-एफ 10 ईओएस-03 के प्रक्षेपण के लिए काउंटडाउन आज सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC) शार, श्रीहरिकोटा पर शुरू हो चुका है।”

कल होगा प्रक्षेपण

बता दें कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से 12 अगस्त को सुबह पांच बजकर 43 मिनट पर उपग्रह ईओएस-03 का प्रक्षेपण किया जाएगा। इससे मौसम संबंधी गतिविधियों को समझने में और आसानी होगी।

इससे भारत को बहुत फायदा होगा। बताया जा रहा है कि जीएसएलवी उड़ान उपग्रह को 4 मीटर व्यास-ओगिव आकार के पेलोड फेयरिंग में ले जाएगी, जिसे रॉकेट पर पहली बार उड़ाया जा रहा है, जिसने अब तक अंतरिक्ष में उपग्रह और साझेदार मिशनों को तैनात करने वाली 13 अन्य उड़ानें संचालित की हैं।

क्या है खासियत?

इसके बारे में कहा जा रहा है कि जीएसएलवी उड़ान उपग्रह एक दिन में पूरे देश की चार-पांच बार तस्वीर लेगा, जो मौसम और पर्यावरण परिवर्तन से संबंधित प्रमुख डेटा भेजेगा। इतना ही नहीं, यह EOS-03 उपग्रह भारतीय उपमहाद्वीप में बाढ़ और चक्रवात जैसी प्राकृतिक आपदाओं की लगभग रीयल टाइम निगरानी में सक्षम होगा क्योंकि यह प्रमुख पर्यावरणीय और मौसम परिवर्तनों से गुजरता है।

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