बिहार: शिक्षकों को मिड डे मील से मिलेगी मुक्ति, अक्षय पात्र फाउंडेशन को दी गयी जिम्मेदारी

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बिहार के शिक्षकों को मिड डे मील से अलग रखा जाएगा। इसकी जिम्मेदारी सरकार ने अक्षय पात्र फाउंडेशन को दे दी गयी है। ऐसे में अब प्रदेश के 72 हजार प्रारंभिक विद्यालयों के एक करोड़ 70 लाख बच्चों की सेहत अब अक्षय पात्र रसोई से सुधरेगी। आए दिन मिड डे मिल योजना में मिल रही शिकायतें अब दूर होगी। फिलहाल पटना के कुछ स्कूलों में मिड डे मील की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी अक्षय पात्र फाउंडेशन को दी गयी है। यदि यह सफल रहा तब पूरे बिहार में इसे लागू किया जाएगा।

इस व्यवस्था के लागू होने से मिड डे मील में लगे शिक्षकों को राहत मिलेगी। अब उनका पूरा ध्यान सिर्फ बच्चों की पढ़ाई पर ही रहेगा। पहले इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होता था। बिहार के शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी ने बताया कि फिलहाल पायलट प्रोजेक्ट के तहत अक्षय पात्र फाउंडेशन को पटना के कुछ स्कूलों के बच्चों को मिड डे मील की व्यवस्था किए जाने की जिम्मेदारी दी गयी है। यदि यह प्रयोग पूरी तरह से सफल रहा तो पूरे प्रदेश में अक्षय पात्र रसोई को लागू किया जाएगा।

मिड डे मील योजना के संचालन में करीब साढ़े तीन लाख शिक्षकों के जुड़े रहने से बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है। इस व्यवस्था के लागू होने से शिक्षकों को इससे अलग कर दिया जाएगा। ऐसे में शिक्षकों का पूरा ध्यान बच्चों की पढ़ाई पर रहेगा। बच्चों को भी बेहतर भोजन मिल सकेगा। अक्षय पात्र रसोई में एक साथ 50 हजार बच्चों का खाना तैयार किया जा सकेगा। मानकों पर परखने के बाद ही बच्चों को परोसा जाता है। खाने की थाली स्कूलों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी अक्षय पात्र फाउंडेशन पर होगी।   

गौरतलब है कि बेंगलुरु में अक्षय पात्र फाउंडेशन आकाशीय संस्था के रूप में कार्य कर रहा है। उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, असम, छत्तीसगढ़, गुजरात, कर्नाटक, ओडिशा, तेलंगाना और तमिलनाडु में भी अक्षय पात्र रसोई का संचालन किया जा रहा है। अक्षय पात्र रसोई में एक्सपर्ट कुक के साथ-साथ साफ-सफाई, शुद्ध मसाले और सब्जियों का विशेष ध्यान रखा जाता है। बिहार में भी इस व्यवस्था को लागू करने की पहल की गयी है। 

फिलहाल पटना के कुछ विद्यालयों में भोजन की व्यवस्था की जिम्मेदारी संस्था को दी गयी है। यदि सब कुछ बेहतर रहा तो यह व्यवस्था पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा। जिससे शिक्षकों का टेंशन दूर होगा वे अपना ज्यादा से ज्यादा समय बच्चों की पढ़ाई पर केंद्रीत कर सकेंगे। इससे सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को फायदा होगा। उन्हें बेहतर भोजन मिल सकेगा और बेहतर पढ़ाई का भी माहौल बनेगा।

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