पटना: सूबे में किसानों को गैर लाइसेंसी बीज कंपनियां नहीं बेच पाएँगी, अगर पार्सल से भी भेजा तो कूरियर कंपनी पर होगा केस

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बिहार में गैर लाइसेंसी कंपनी का बीज पार्सल किया तो कूरियर कंपनी पर प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी। कृषि विभाग इसकी सूचना राज्य में काम करने वाली सभी कूरियर कंपनियों को पत्र भेजकर देगा। नई व्यवस्था लागू कर दी गई है और कूरियर कम्पनी को किसी भी बीज कंपनी का पार्सल लेने के पहले चेक करना होगा कि बिहार में व्यापार के लिए उसे लाइसेंस है या नहीं।

कृषि विभाग कृषि इनपुट से जुड़ी कंपनियों के साथ बैठक में मिली शिकायतों को लेकर गंभीर हो गया है। अधिकारियों के साथ हुई बैठक में 26 कंपनियों ने कई बिन्दुओं पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी। बैठक में कंपनियों ने यह शिकायत की थी कि कई ऐसी कंपनियां कूरियर के माध्यम से राज्य में बीज का व्यापार कर रही हैं, जिन्हें लाइसेंस नहीं दिया गया है। ऐसी कंपनियों के बीज फेल होने पर किसी की जिम्मेवारी नहीं होती है और किसान ठगे जाते हैं। उसके बाद विभाग ने यह पत्र सभी कूरियर कंपनियों को देने का फैसला किया है।

इसी के साथ प्रक्रिया के ऑनलाइन होने के बाद कंपनियों को हो रही परेशानी को दूरे करने के लिए खाद और बीज सहित सभी कृषि इनपुट के लिए लाइसेंसिंग की प्रक्रिया में कई और सुधार करने का निर्देश कृषि निदेशक आदेश तितरमारे ने दिया है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद लाइसेंस के लिए पुलिस अधीक्षक से निर्गत चरित्र प्रमाण पत्र की अनिवार्यता को खत्म कर दिया गया है। आवेदन के निस्तारण के लिए समय सीमा कम करने पर अभी कोई भी फैसला नहीं लिया गया। विभाग ने अधिकारियों को महाराष्ट्र और ओडिशा की प्रक्रिया का अध्ययन करने का निर्देश दिया है। उसके बाद ही इस पर कोई नया फैस्ला होगा। अभी तीस दिन में खाद का लाइसेंस निर्गत करने का आदेश है। इसे अलावा आवेदन सबमिट करने के पहले प्रीव्यू दिखाने की व्यवस्था भी सॉफ्टवेयर में की जा रही है। इससे कोई भूल हुई तो सबमिट करने के पहले उसमें सुधार किया जा सकेगा।

राज्य में सभी इनपुट की लाइसेंसिग की प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी गई है। आवेदन भी ऑनलाइन लिये जाते हैं। कृषि विभाग ने भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायतों को कम करने के लिए यह व्यवस्था की है। लइसेंस को इच्छुक व्यक्ति को आवेदन के साथ जरूरी सभी कागजात ऑनलाइन ही अपलोड करने होंगे। इससे लाइसेंस लेने के लिए व्यवसायियों को कार्यालय का चक्कर नहीं काटना होगा। आवेदन करने के तीस दिन के भीतर उनका लाइसेंस जारी कर दिया जाएगा। कोई अधिकारी उनके आवेदन को खारिज करते हैं तो उन्हें इसका कारण भी बताना होगा। लिहाजा नई व्यवस्था लाइसेंसिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने में मददगार साबित होगी।

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