Patna: कौन हैं तेजस्वी यादव के प्रवासी सलाहकार संजय यादव, जिस पर तेज प्रताप ने बोला है हमला

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लालू यादव की पार्टी राजद में चल रहा घमासान तेज होता जा रहा है। अब ऐसा लग रहा है कि तेजस्वी और तेज प्रताप के बीच भी सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। तेज प्रताप के निशाने पर प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद के बाद तेजस्वी के राजनीतिक सलाहकार संजय यादव आ गए हैं। तेज प्रताप ने संजय यादव को प्रवासी सलाहकार बताते हुए लगातार दूसरे दिन हमला बोला है। तेज प्रताप ने यहां तक कह दिया कि प्रवासी सलाहकार हरियाणा में एक सरपंच तक नहीं बनवा सकता, खाक तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री बनवाएगा।

बुधवार को जब तेज प्रताप के करीबी आकाश यादव को राष्ट्रीय जनता दल की छात्र इकाई के अध्यक्ष पद से हटाए गया तो जगदानंद के साथ संजय यादव ही निशाने पर आ गए थे। गुरुवार को तेज प्रताप ने अपने ट्वीट में कहा कि जिस प्रवासी सलाहकार के इशारों पर पार्टी चल रही है, वह हरियाणा में अपने परिवार से किसी को सरपंच नहीं बनवा सकता। वो ख़ाक मेरे अर्जुन (तेजस्वी) को मुख्यमंत्री बनायेगा। तेज प्रताप ने यहां तक कहा कि प्रवासी सलाहकार सिर्फ लालू परिवार और राजद में मतभेद पैदा कर सकता है।

बुधवार की रात आकाश यादव को पद से हटाने पर तेज प्रताप ने संजय यादव पर निशाना साधते हुए कहा था कि प्रवासी सलाहकार से सलाह लेने में अध्यक्ष जी ये भूल गए कि पार्टी संविधान से चलता है। राजद का संविधान कहता है कि बिना नोटिस पार्टी के किसी पदाधिकारी को पदमुक्त नहीं कर सकते। आज जो हुआ वो राजद के संविधान के खिलाफ हुआ।

लंबे समय से तेजस्वी के साथ काम कर रहे संजय यादव

तेज प्रताप ने जिन्हें प्रवासी सलाहकार संबोधित कर रहे हैं वह संजय यादव बतौर राजनीतिक सलाहकार तेजस्वी यादव के साथ लंबे समय से काम कर रहे हैं। संजय यादव हरियाणा के रहने वाले हैं। हरियाणा के नांगल सिरोही गांव के रहने वाले 37 वर्षीय संजय यादव तेजस्वी यादव के रिश्तेदार भी हैं। संजय यादव की तेजस्वी यादव से पहली बार दिल्ली में वर्ष 2010 में मुलाकात हुई थी। इसके बाद तेजस्वी यादव और संजय यादव की दोस्ती मजबूत हुई। संजय यादव के काम से प्रभावित होकर तेजस्वी ने उन्हें अपना राजनीतिक सलाहकार बना लिया।

पिछले साल हुए बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान पहली बार लालू यादव मैदान में कहीं नहीं थे। कहा जाता है कि इस दौरान संजय यादव ने अपनी रणनीति से लालू यादव की कमी खलने नहीं दी। आरजेडी के पोस्टर से लालू का गायब होना, सिर्फ तेजस्वी की तस्वीर लगाना, लालू-राबड़ी के शासनकाल को लेकर माफी मांगना, सभी फैसले के पीछे संजय यादव का ही दिमाग था। इन रणनीति का ही असर था कि जदयू-भाजपा गठबंधन के बाद भी राजद सबसे बड़े दल के रूप में उभरा।

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