पटना: पीके घोष है सृजन घोटाले का मास्टरमाइंड! ईडी ने 5 दिनों की पूछताछ के बाद भेजा बेऊर जेल

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बिहार के सबसे बड़े और चर्चित सृजन घोटाले के किंगपिंग स्वर्गीय मनोरमा देवी के वित्तीय और टैक्स मुख्य सलाहकर प्रवीण कुमार घोष यानी पीके घोष से ईडी ने 5 दिनों तक पूछताछ की। पूछताछ में घोटाले से संबंधित अहम जानकारियां मिलने के बाद पीके घोष को ही घोटाले का मास्टमाइंड माना जा रहा है।

दरअसल, ईडी ने धनशोधन अधिनियम के तहत पटना के पीएमएलए कोर्ट में केस दर्ज कराया है, जिसमें 1 अरब 50 करोड़ 15 लाख 1 हजार रुपए की मनीलॉन्ड्रिंग का आरोप है। यह पैसा सृजन घोटाला का है और मामला भागलपुर, सहरसा और बांका से जुड़ा है। धनशोधन अधिनियम के तहत ही ईडी ने पीके घोष को गिरफ्तार किया था।

इसके बाद पीएमएलए कोर्ट की अनुमति पर 13 अगस्त को ईडी ने पूछताछ के लिए 5 दिनों की पुलिस रिमांड पर पीके घोष को लिया था। रिमांड की अवधि पूरी होने पर ईडी ने उसे 17 अगस्त को फुलवारीशरीफ जेल में दाखिल किया। जहां से 19 अगस्त को उसे बेऊर जेल भेज दिया गया।

बता दें कि ईडी के अलावा पीके घोष पर सीबीआई सृजन घोटाला से संबंधित नौ अलग-अलग मामले दर्ज कर अनुसंधान कर रही है। 81 करोड़ 47 लाख 57 हजार रुपए की लेन-देन पीके घोष की जानकारी में होने का आरोप है। सृजन महिला विकास समिति की अध्यक्ष स्व. मनोरामदेवी के वित्तीय, आयकर और इनवेस्टमेंट से संबंधित सभी कार्य पीके घोष ही देखते थे। इससे संबंधित कागजात की देखरेख भी वही करते थे।

पैसे को कहां और किस मद में इनवेस्ट करना है, इसकी भी सलाह घोष ही देते थे। इन जानकारियों के आधार पर पीके घोष को सृजन घोटाले का मास्टरमाइंड माना जा रहा है। इस आधार पर आगे की कारवाई करने की तैयारी चल रही है। खुलासे के बाद सृजन घोटाला में शामिल लोगों के परिजनों, रिश्तेदारों और उनके राजनीतिक करीबियों में हड़कंप मच गया है।

सृजन घोटाला के 30 मामले चल रहे हैं सीबीआई कोर्ट में

अरबों रुपए के सृजन घोटाले में सीबीआई 30 से अधिक मामले दर्ज कर अनुसंधान कर रही है। दो दर्जन से अधिक मामलों में सीबीआई अनुसंधान पूरा कर आरोपितों के खिलाफ सीबीआई कोर्ट पटना में चार्जशीट दायर कर चुकी है। कई मामलो में सीबीआई के विशेष न्यायाधीश ने संज्ञान लिया है। कोराना संक्रमण के कारण पिछले दो वर्ष से कोर्ट का न्यायिक कार्य प्रभावित रहने के चलते सृजन घोटाला से संबंधित मामलों की सुनवाई बाधित थी।

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