Patna: फिर चाचा पारस के घर पहुंचे चिराग पासवान लेकिन नहीं हुई मुलाकात

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अपने चाचा पशुपति कुमार पारस से मिलने की चिराग पासवान की एक और कोशिश आज बेकार हो गयी. चिराग पासवान आज पटना में चाचा पारस के घर पर पहुंच गये. लेकिन फिर चाचा नहीं मिले. चिराग पशुपति पारस के दामाद से मिलकर वापस लौट आये.

अचानक चाचा के घर पहुंचे चिराग

वैसे तो पशुपति कुमार पारस का पटना में अपना घर है. लेकिन वे लोजपा कार्यालय के लिए आवंटित दफ्तर के ही पिछले हिस्से में रहते हैं. उनके परिवार के लोग भी अगर पटना आते हैं तो वहीं रहते हैं. आज अचानक से चिराग पासवान की गाडी लोजपा दफ्तर के अंदर घुसी. पारस गुट के दो-चार नेता वहां मौजूद थे. लेकिन चिराग पासवान पार्टी नेताओं से बात करने के बजाय सीधे घर के अंदर गये. वहां जहां पशुपति पारस रहते हैं. लेकिन पारस वहां नहीं थे. लेकिन पारस के दामाद मौजूद थे. चिराग पासवान ने उनसे ही कुछ देर के लिए बात की और फिर वापस लौटे.

चाचा के घर क्यों गये चिराग

वैसे अगर आप ये सोंच रहे हैं कि चिराग पासवान सुलह-सफाई के लिए पारस के घऱ गये थे तो आप गलत सोंच रहे हैं. चिराग पासवान तो अपने पिता स्व. रामविलास पासवान की बरसी का निमंत्रण देने पारस के घर गये थे. चिराग पासवान 12 सितंबर को पटना के अपने आवास पर स्व. रामविलास पासवान की बरसी मना रहे हैं.

इसके लिए चिराग औऱ उनके समर्थक बड़े पैमाने पर तैयारी कर रहे हैं. दिलचस्प बात ये है कि चिराग पासवान ने बरसी को लेकर जो कार्ड छपवाया है उसमें पूरे पासवान फैमिली का नाम दिया है. कार्ड पर पशुपति पारस, उनके भतीजे सांसद प्रिंस राज और पारस के बेटे यशराज का नाम छपा है. लेकिन वे पारस को ही निमंत्रण देने उनके घऱ पहुंच गये. चाचा मिले नहीं तो अपने चचेरे बहनोई को कार्ड दिया. घर पर जो कर्मचारी हैं उनसे भी मौखिक तौर पर कहा कि वे बरसी में आयें और फिर चंद मिनटों में वहां से निकल गये.

गौरतलब है कि चिराग पासवान मंगलवार की रात ही पटना पहुंचे हैं. बुधवार की सुबह से ही वे नेताओं के घर जाकर उन्हें पिता की बरसी का निमंत्रण दे रहे हैं. सुबह वे तेजस्वी यादव से मिलने पहुंचे. उसके बाद जीतन राम मांझी से मिलकर न्योता दिया. फिर अपनी पार्टी के पूर्व नेता सुनील पांडेय के घर भी गये.

बरसी में पारस जायेंगे या नहीं

चिराग पासवान के पारस के घर जाने की खबर सुनकर फर्स्ट बिहार की टीम भी वहां पहुंची. वहां मौजूद लोजपा (पारस गुट) के कोषाध्यक्ष सुनील सिन्हा ने बताया कि पशुपति कुमार पारस दिल्ली में हैं. आज वहां केंद्रीय कैबिनेट की बैठक थी उसमें शामिल हुए फिर मंत्रालय का कामकाज किया. सुनील सिन्हा ने बताया कि उन्हें बरसी को लेकर कोई जानकारी नहीं है. 

वैसे भी ये राजनीतिक नहीं पारिवारिक मामला है. लोजपा (पारस) के कोषाध्यक्ष सुनील सिन्हा ने बताया कि वे 27 सालों से पशुपति पारस के सिपाही हैं औऱ उन्होंने देखा है कि पशुपति पारस अपने बड़े भाई को भगवान की तरह मानते थे. पारस ने अपनी पार्टी के नेताओं को सख्ती से मना कर रखा है कि कोई भी पारिवारिक मसले पर नहीं बोलेगा. लिहाजा उन्हें नहीं मालूम है कि पारस जी क्या करेंगे. जो पारस जी का आदेश होगा उसका पूरी पार्टी पालन करेगी.

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