Patna: जनता दरबार में फरियादियों को लाने के नाम पर हो रहा खेल, नीतीश के सामने बोला युवक.. सुबह से भूखे है, गाड़ी भी खटारा है

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मुख्यमंत्री के जनता दरबार कार्यक्रम में बदली हुई व्यवस्था के तहत अब लोगों को जिला स्तर से रजिस्ट्रेशन करा कर आना होता है. फरियादियों को जनता दरबार कार्यक्रम में लाने और उन्हें वापस ले जाने का जिम्मा भी जिला प्रशासन के अधिकारियों के ऊपर ही होता है. लेकिन जनता दरबार में इससे बदली हुई व्यवस्था के साथ नया खेल शुरू हो गया है. दरअसल मुख्यमंत्री के सामने आज सीवान जिले से पहुंचे एक युवक ने बड़ा खुलासा कर दिया. युवक ने कहा कि जनता दरबार कार्यक्रम में उन्हें लाने के लिए जो गाड़ी इस्तेमाल की गई, वह बेहद खटारा है. इतना ही नहीं वक्त ने यह भी आरोप लगाया कि जनता दरबार में पहुंचने के बावजूद हम सुबह से भूखे हैं.

जनता दरबार कार्यक्रम में यह युवक सीवान जिले से आया था. उसकी शिकायत थी कि उसके निजी जमीन में ग्रामीण कार्य विभाग में गलत तरीके से बिना अनुमति के काम करा दिया.  ग्रामीण कार्य विभाग से जुड़ी शिकायत को लेकर पहुंचे युवक को मुख्यमंत्री ने संबंधित विभाग के अधिकारियों के पास भेजने को कहा.

इसी दौरान युवक वहां रुक गया. युवक ने मुख्यमंत्री से कहा कि सर एक और शिकायत है. जनता दरबार कार्यक्रम में लाने के लिए जिस गाड़ी का इस्तेमाल किया गया, वह बेहद जर्जर है. इतना ही नहीं सुबह से उन्हें खाने पीने के लिए भी कुछ भी नहीं दिया गया. मुख्यमंत्री इतना सुनते ही चौक गए. उन्होंने तत्काल अधिकारियों को तलब किया और कहा कि इस मामले को बेहद गंभीरता से देखें.

आपको बता दें कि जनता दरबार में मुख्‍यमंत्री से मिलने के लिए पहले से रजिस्‍ट्रेशन कराना और अप्‍वाइंटमेंट मिलना जरूरी है. इसके लिए संबंधित व्‍यक्ति को आनलाइन आवेदन देना होता है. बिहार के दूर दर्ज इलाकों से आने वाले लोगों के लिए पटना तक आने की व्‍यवस्‍था संबंधित जिला अधिकारी को करनी होती है. मुख्‍यमंत्री सुबह 10 बजे से आम लोगों की शिकायतें सुनते हैं. एक दिन में वे आम तौर पर 150 से 200 लोगों से ही रूबरू होते हैं. बताया जा रहा है कि यह सीमा कोविड संक्रमण को देखते हुए तय की गई है. 

जनता के दरबार में मुख्यमंत्री कार्यक्रम में सीएम नीतीश आज ग्रामीण विकास विभाग, ग्रामीण कार्य, पंचायती राज, ऊर्जा, पथ निर्माण, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण, कृषि, सहकारिता, पशु एवं मत्स्य संसाधन, जल संसाधन, लघु जल संसाधन, उद्योग, गन्ना उद्योग, नगर विकास एवं आवास, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण, परिवहन, आपदा प्रबंधन, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन, योजना एवं विकास, पर्यटन, भवन निर्माण, सूचना एवं जनसंपर्क, वाणिज्यकर तथा सामान्य प्रशासन विभाग से जुड़ी शिकायतों को सुन रहे हैं.

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