Patna: तेजस्वी ने बुलाई महागठबंधन की बैठक, देश भर के बीजेपी विरोधी नेताओं को करेंगे एकजुट, 27 को गोलबंदी की तैयारी

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देश में जातिगत जनगणना को लेकर लंबे वक्त से बहस छिड़ी है. जातिगत जनगणना को लेकर बिहार की सियासत चरम पर है. जब से केंद्र सरकार ने ये कहा है कि इसबार जातिगत जनगणना नहीं होने वाली है. तब से बिहार में बयानबाजी शुरू हो गई है. बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव देश भर में बीजेपी विरोधी नेताओं को एक जुट करने की तैयारी में हैं.

केंद्र सरकार द्वारा जातिगत जनगणना कराने के फैसले के बाद तेजस्वी यादव ने महागठबंधन एक तमाम दलों प्रतिनिधियों के साथ अहम बैठक दस सर्कुलर स्थिति राबड़ी देवी आवास पर बुलाई है. शुक्रवार को पटना में मीडियाकर्मियों से बातचीत में तेजस्वी ने कहा कि “केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एफिडेविट देकर कहा है कि उनका फैसला है कि इसबार जातिगत जनगणना नहीं होगी. यानि कि उन्होंने साफ़ कर दिया है कि केंद्र में बैठी आरएसएस विचारधारा वाली पार्टी जातीय जनगणना नहीं कराना चाहती है. आरएसएस वाले नहीं चाहते कि देश में तरक्की हो.”

तेजस्वी ने कहा कि “कास्ट सेन्सेस राष्ट्रहित में है. इससे पहले भी हर किसी की गिनती होती रही है. एससी-एसटी या हिन्दू-मुस्लिम सबकी गिनती होती है. ये इसलिए होता है ताकि वास्तविक संख्या पता हो ताकि उनके लिए सरकार योजना बना सके. गरीबी को खत्म किया जा सके. जो पार्टी जातिगत जनगणन की मांग कर रह है क्या वे देश की तरक्की नहीं चाहती? बीजेपी जो तय करेगी वही होगा?”

तेजस्वी ने कहा कि “जातिगत जनगणना होने से यह भी पता चलेगा कि आरक्षण में जिन जातियों को लाना है और किन जातियों को नहीं लाना है. देश भर में 80-90 फीसदी लोग चाहते हैं कि उनकी गिनती हो. इसलिए मैं देश भर में अपने जितने भी सहयोगी दल हैं. जातिगत जनगणना को लेकर हम उन्हें पत्र लिखेंगे. केंद्र में इतने सारे ओबीसी मंत्री बनाने का दावा हो रहा है. वे सभी कहां हैं. बिहार में 40 में से 39 सांसद जीत गए हैं, वे क्या कर रहे हैं?” 

उधर जातीय जनगणना को लेकर केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि कोई जातिगत जनगणना नहीं होने जा रही. जातीय जनगणना कराने से केंद्र के इनकार के बाद बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने धैर्य खो दिया है. लालू ने ताबड़तोड़ दो ट्वीट किया है, जिससे साफ़ जाहिर हो रहा कि जातिगत जनगणना को लेकर लालू के सब्र का बांध टूट गया है.

लालू ने ट्वीट में लिखा कि “जनगणना में साँप-बिच्छू, तोता-मैना, हाथी-घोड़ा, कुत्ता-बिल्ली, सुअर-सियार सहित सभी पशु-पक्षी पेड़-पौधे गिने जाएँगे लेकिन पिछड़े-अतिपिछड़े वर्गों के इंसानों की गिनती नहीं होगी.वाह! BJP और RSS को पिछड़ों से इतनी नफ़रत क्यों? जातीय जनगणना से सभी वर्गों का भला होगा. सबकी असलियत सामने आएगी.”

एक अन्य ट्वीट में लालू ने लिखा कि “BJP-RSS पिछड़ा और अतिपिछड़ा वर्ग के साथ बहुत बड़ा छल कर रहा है. अगर केंद्र सरकार जनगणना फ़ॉर्म में एक अतिरिक्त कॉलम जोड़कर देश की कुल आबादी के 60 फ़ीसदी से अधिक लोगों की जातीय गणना नहीं कर सकती तो ऐसी सरकार और इन वर्गों के चुने गए सांसदों व मंत्रियों पर धिक्कार है. इनका बहिष्कार हो.”

गौरतलब हो कि हाल में बिहार के सीएम नीतीश कुमार की अगुवाई वाली प्रतिनिधिमंडल ने जाति गणना की मांग पीएम से की थी. इसमें लालू यादव के बेटे और बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भी शामिल थे. सभी ने जल्द से जल्द जातिगत जनगणना कराने की मांग की थी, जो लंबे वक्त से अटकी हुई है. लेकिन सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने कहा है कि पिछड़े वर्ग की जाति जनगणना एडमिनिस्ट्रेटिव तौर पर कठिन और बोझिल कार्य है. सोच समझकर एक नीतिगत फैसले के तहत इस तरह की जानकारी को जनगणना के दायरे से अलग रखा गया है.

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